सरकारी रिकॉर्ड में डेटा अपडेट नहीं होने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को जोधपुर जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से चुनाव ड्यूटी से जुड़ा नोटिस भेज दिया गया। नोटिस में चुनाव संबंधी जानकारी अपडेट नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। खास बात यह है कि रावत करीब ढाई साल पहले सरकारी सेवा से VRS लेकर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में सांसद हैं।
पूरा मामला जोधपुर जिला निर्वाचन शाखा के सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ा है। डॉ. मन्नालाल रावत अक्टूबर 2023 में जोधपुर में परिवहन विभाग में संयुक्त यातायात आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। इसके बाद उनका प्रमोशन एडिशनल कमिश्नर पद पर हुआ और उनका तबादला जयपुर कर दिया गया था। रावत ने एक मार्च 2024 को सरकारी सेवा से वीआरएस ले लिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर सांसद बने। इसके बावजूद जोधपुर जिला निर्वाचन शाखा के रिकॉर्ड में उनका नाम सरकारी कर्मचारियों की सूची में दर्ज बताया जा रहा है।
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13 अगस्त की शाम जारी हुआ नोटिस
जोधपुर जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक रंजन के कार्यालय की ओर से सांसद रावत को गुरुवार, 13 अगस्त की शाम नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उनके कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों से संबंधित जानकारी मांगी गई है। निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित जानकारी सरकारी पोर्टल पर 14 अगस्त को दोपहर 3 बजे तक अपडेट की जाए। ऐसा नहीं करने पर इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 134 के तहत अपराध माना जा सकता है और कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, नोटिस जारी करने से पहले निर्वाचन शाखा की ओर से सरकारी सेवा छोड़ चुके रावत का रिकॉर्ड अपडेट क्यों नहीं किया गया, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सांसद ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
नोटिस मिलने के बाद सांसद मन्नालाल रावत ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह जोधपुर निर्वाचन शाखा के एक कर्मचारी ने फोन कर उन्हें नोटिस की जानकारी दी। इसके बाद गुरुवार शाम उन्हें वॉट्सऐप पर नोटिस की कॉपी भेजी गई। रावत ने कहा कि डिजिटल दौर में भी निर्वाचन विभाग का डेटा करीब तीन साल पुराना चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी सिस्टम में अधिकारियों और कर्मचारियों का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हो रहा है, तो आम लोगों और कर्मचारियों का डेटा किस तरह मेंटेन किया जा रहा होगा, यह गंभीर सवाल है। सांसद रावत ने कहा कि वह जल्द ही निर्वाचन विभाग और कलेक्टर को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत कराएंगे। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए रिकॉर्ड को तत्काल दुरुस्त करने की बात कही।

पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में निर्वाचन शाखा के रिकॉर्ड में वर्षों पुराने डेटा का मौजूद रहना सवाल खड़े करता है।
जानकारों का कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में कर्मचारियों और अधिकारियों का डेटा महत्वपूर्ण होता है। चुनाव ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति और जिम्मेदारियां इसी तरह के रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाती हैं। ऐसे में रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से भविष्य में भी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
फिलहाल यह सवाल बना हुआ है कि सरकारी सेवा से VRS लेकर लोकसभा सांसद बन चुके व्यक्ति का नाम इतने समय बाद भी सरकारी कर्मचारी के रिकॉर्ड में क्यों दर्ज रहा और निर्वाचन शाखा ने इसे अपडेट क्यों नहीं किया।