UP Rain Alert: बारिश ने मचाई तबाही, दो दिन में 88 मौतें; नेपाल सीमा वाले जिलों पर मंडराया बाढ़ का खतरा – Sanjeevni Today

Published on 28 सित॰ 2026

उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। 25 से 27 सितंबर के बीच बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 81 लोगों की मौत और 62 लोगों के घायल होने की सूचना है। इस दौरान राज्य में 2,254 मकानों को नुकसान पहुंचा है। ये आंकड़े उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर सामने आए हैं।

48 घंटे में सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश

राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, 25 से 27 सितंबर की सुबह तक उत्तर प्रदेश में औसतन 66.5 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 7.6 मिमी है। यानी बारिश सामान्य से करीब 775 फीसदी ज्यादा रही। राज्य के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई।

फर्रुखाबाद में बारिश सामान्य से करीब 7,385 फीसदी अधिक दर्ज की गई, जबकि कन्नौज, शाहजहांपुर, हमीरपुर और महोबा में भी सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश हुई।

इन जिलों में सबसे ज्यादा मौतें

राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, सीतापुर में सबसे ज्यादा 7 मौतें दर्ज हुईं। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में 5-5 मौतें हुईं, जबकि अयोध्या, महराजगंज और गोरखपुर में 4-4 लोगों की जान गई।

कई जगह तेज बारिश और हवाओं के कारण पेड़ गिरने, कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने और जलभराव जैसी घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव टीमों को सक्रिय रखा है।

2,254 मकानों को नुकसान

लगातार बारिश के कारण राज्य में 2,254 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। प्रशासन को कच्चे मकानों और जलभराव वाले इलाकों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर असुरक्षित मकानों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।

बारिश से फसलों को हुए नुकसान का आकलन अभी जारी है। प्रभावित किसानों को नियमों के अनुसार सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

नेपाल सीमा वाले जिलों में बढ़ी निगरानी

भारी बारिश का असर सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। नेपाल में भी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने की चिंता बनी हुई है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे, खासकर पूर्वी हिस्से के जिलों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी और बाढ़ राहत टीमों को तैयार रखने को कहा गया है।

ऐसे इलाकों में प्रशासन की नजर निचले क्षेत्रों और नदी किनारे बसे गांवों पर है, जहां जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तेजी से राहत एवं बचाव अभियान चलाने की जरूरत पड़ सकती है।

राहत और बचाव टीमें अलर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों से संपर्क करने और मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। फायर सर्विस, PAC, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं जरूरत के अनुसार लेने को कहा गया है।

प्रशासन को जलभराव वाले इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था करने और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम में सुधार की उम्मीद

राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, मौसम में अगले चरण में सुधार की संभावना जताई गई थी, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन कराने के निर्देश जारी हैं।

नोट: शुरुआती रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा अलग-अलग समय पर अलग रहा है। 26 सितंबर को 117 मकानों के नुकसान और कम मौतों की रिपोर्ट थी, जबकि 27 सितंबर तक के अपडेट में आंकड़ा बढ़ा। इसलिए ऊपर दिए गए 81 मौत और 2,254 मकानों के नुकसान के आंकड़े 25–27 सितंबर की नवीनतम उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित हैं।