
ईरान के मिनाब शहर में 28 फरवरी 2026 को शाजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ था। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने कहा है कि उसके पास यह मानने के उचित आधार हैं कि इस हमले के पीछे अमेरिकी सेना थी। हमले में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें करीब 120 स्कूली बच्चे बताए गए हैं।
युद्ध अपराध क्यों
UN जांचकर्ताओं के मुताबिक स्कूल एक स्पष्ट नागरिक इमारत थी और उसे सैन्य उद्देश्य के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का कोई सबूत नहीं मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने स्कूल से जुड़ी अपनी लक्ष्य संबंधी जानकारी को पर्याप्त रूप से अपडेट नहीं किया और यह भी सुनिश्चित नहीं किया कि इमारत सैन्य लक्ष्य है।
जांच मिशन ने इस हमले को नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला अंधाधुंध हमला बताया और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसे युद्ध अपराध माना। हालांकि, UN फैक्ट-फाइंडिंग मिशन खुद किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू करने वाली न्यायिक संस्था नहीं है। उसकी रिपोर्ट भविष्य की जांच या अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इस्तेमाल हो सकती है।
ट्रम्प ने क्या कहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जून में कहा था कि ईरान के गर्ल्स स्कूल पर किसी ने जानबूझकर हमला नहीं किया और उन्होंने मामले की अमेरिकी जांच का हवाला दिया था। वहीं, रॉयटर्स की पहले की रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य जांच के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर अमेरिकी सेना के हमले के लिए जिम्मेदार होने की संभावना सामने आई थी। पेंटागन ने बाद में जांच को आगे बढ़ाया, लेकिन उसके शुरुआती निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए।
दूसरे हमले का जिक्र
UN मिशन ने ईरान के लामेर्ड में एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हुए हमले की भी जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक वहां आसपास की रिहायशी इमारतों और एक स्कूल को नुकसान पहुंचा तथा 22 नागरिक मारे गए या घायल हुए। जांचकर्ताओं ने इसे भी अंधाधुंध हमला मानते हुए युद्ध अपराध बताया। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च में कहा था कि उस दिन अमेरिकी सेना ने लामेर्ड शहर में कोई हमला नहीं किया था।
ईरान पर भी आरोप
इसी रिपोर्ट में ईरानी अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। UN मिशन ने कहा कि सरकार ने दिसंबर से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों के खिलाफ व्यापक और व्यवस्थित कार्रवाई की, जिसमें गैरकानूनी हत्याएं, यातना, मनमानी गिरफ्तारी और जबरन गायब किए जाने जैसी घटनाएं शामिल थीं। मिशन ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया।
रिपोर्ट अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने रखी जानी है। इसके निष्कर्षों के आधार पर आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा हो सकती है।
Kirtika Tyagi
Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat.