UCC (समान नागरिक संहिता) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद बिहार में सत्ताधारी NDA में खींचतान शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा असमंजस की स्थिति JDU में है।
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सोमवार को पार्टी के प्रदेश महासचिव श्याम रजक ने कहा, ‘बिहार में इसे लागू नहीं होने देंगे।’ इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, ‘हम इसके प्रारूप को देखेंगे, इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे।’
मंगलवार को पूर्व CM नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच दो राउंड की बैठक हुई। बैठक के बाद डिप्टी CM विजय चौधरी सामने आए। उन्होंने कहा, 'पार्टी पहले UCC बिल के प्रावधानों का अध्ययन करेगी। पार्टी से विचार के बाद आगे का निर्णय होगा। अभी तो बिल किसी ने देखा ही नहीं है। बिल ऐसा हो जिसमें हमारी बात हो।’
क्या सहयोगी दलों की रजामंदी के बिना UCC बिल बिहार में लागू किया जा सकता है? क्या बिहार में इस बिल को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है? JDU को किस बात पर आपत्ति है। 5 पॉइंट में पूरा मामला समझिए।
1- क्या बिहार में UCC बिल लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है?
UCC बिल केवल केंद्र सरकार की इच्छा से लागू नहीं हो सकता। इसे लागू करने से पहले सरकार को अपना UCC मॉडल तैयार करना होगा। अभी एक मात्र राज्य उत्तराखंड है, जहां UCC को लागू किया गया है। इसे लागू करने की प्रक्रिया को समझें..
सबसे पहले एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ड्राफ्ट तैयार किया गया। इसके बाद लोगों से सुझाव लिया गया। इन सारी प्रक्रिया के पूरी होने के बाद इसे पहले कैबिनेट से पास कराया गया तब विधानसभा में बिल पेश किया गया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद कानून बना।

भास्कर ने बिहार सरकार के विधि विभाग के अधिकारियों और मंत्री से इसे समझने की कोशिश की। पूछा, क्या बिहार सरकार ने UCC पर काम शुरू कर दिया है? भास्कर की पड़ताल में ये बात निकल कर आई कि 15 सितंबर 2026 तक बिहार सरकार ने UCC लागू करने के लिए कोई आधिकारिक बिल, ड्राफ्ट, विशेषज्ञ समिति या कैबिनेट प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया है। इसको लेकर अभी कोई तैयारी नहीं है।
2- क्या JDU के सपोर्ट के बिना बिहार में से लागू करना संभव है?
UCC बिल को बिहार विधानसभा और विधान परिषद दोनों जगह से पास कराना जरूरी होगा। इससे पहले इन्हें कैबिनेट से भी अप्रूवल दिलाना होगा। फिलहाल दोनों सदनों में NDA के पास पूर्ण बहुमत है। लेकिन, अगर JDU इस मुद्दे पर सपोर्ट नहीं करती है तो बिल को विधान मंडल में पेश कराना मुश्किल हो जाएगा।
- 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत होती है। NDA के पास फिलहाल 202 विधायक हैं। इनमें BJP (89) और JDU (85) के 174 विधायक हैं।
- NDA के अन्य सहयोगियों को मिला दें तो LJP(R) के 19, HAM के 5 और RLM के 4 विधायक हैं। इन तीनों को मिला दें तो 28 विधायक होते हैं। बिना JDU के इनकी संख्या 117 है, जो बहुमत से 5 कम है।
- 75 सदस्यीय विधान परिषद में बहुमत के लिए 38 MLC की जरूरत होती है। यहां NDA के पास फिलहाल 48 MLC हैं। इनमें BJP के 25 और JDU के 20 हैं। बाकी तीनों सहयोगियों के 1-1 MLC हैं।

3- इस बिल से JDU को क्या आपत्ति है?
बिहार के सीएम रहते हुए JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने UCC पर विधि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस चौहान को दो पन्ने का पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था, 'विभिन्न धार्मिक समूहों, विशेषकर अल्पसंख्यकों की सहमति के बिना UCC को लागू करने से सामाजिक वैमनस्य पैदा होगा और धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।'
जुलाई 2016 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधियों को नीतीश कुमार ने भरोसा दिया था, 'जब तक समान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में एक आम राय नहीं बनती तब तक बिहार में लागू नहीं करेंगे।'
अब JDU नीतीश कुमार के इस स्टैंड पर कायम है। यही कारण है कि UCC बिल का मसला सामने आते ही JDU अचानक एक्टिव हो गई है। पार्टी इसे लागू करने से पहले मुस्लिम हितों का ख्याल रखने के साथ-साथ इस पर उनकी सहमति भी चाहती है।
साल दर साल मुस्लिम छोड़ रहे JDU का साथ
नीतीश कुमार की पार्टी अपने पारंपरिक ‘धर्मनिरपेक्ष’ चेहरे और मुस्लिम-अति पिछड़ा वोट बैंक को किसी भी कीमत पर नाराज नहीं करना चाहती। NDA के साथ गठबंधन के बाद लगातार नीतीश कुमार के इस वोट बैंक का हिस्सा कम हुआ है।

4- अब जानिए NDA के दूसरे सहयोगी का क्या स्टैंड है
RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहाा ने कहा, 'यूसीसी पर केंद्र सरकार का क्या प्रस्ताव आता है, उसके आधार पर हम अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले इन तमाम मसलों पर हम पार्टी के भीतर विचार-विमर्श करेंगे।'
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मांझी ने कहा, 'अमित शाह बोले हैं, तो अच्छी ही बात होगी। UCC को लागू करने में क्या हर्ज है? यह लागू हो सकता है। विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया जा सकता है।’
LJP(R) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा, 'भारत का सामाजिक ताना-बाना अलग-अलग है। ड्राफ्ट सार्वजनिक हो, सभी के हितों का पूरा ध्यान रहे, इस पर चर्चा हो। इन सबका अवलोकन करने के बाद हम अपना मत रखेंगे। अपनी बात बताएंगे।
5- अभी तक का पूरा घटनाक्रम समझिए
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, '2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य है'।
- इसके बाद बिहार में NDA की सहयोगी JDU ने आपत्ति जताई।
- JDU नेता श्याम रजक ने कहा, 'बिहार में UCC लागू नहीं होने दिया जाएगा।'
- JDU नेताओं की नीतीश कुमार के आवास पर मीटिंग हुई।
- डिप्टी CM विजय चौधरी ने कहा, प्रारूप की स्टडी के बाद आगे कुछ कहेंगे।
- BJP नेता अभी तक इस पूरे मामले पर शांत हैं।