मध्य प्रदेश: व्यापम आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, 13 साल बाद दो पर FIR - fraud in vyapam constable recruitment exam fir registered against two individuals after 13 years

Published on 16 सित॰ 2026

मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में घपले वर्षों बाद भी सामने आ रहे हैं। वर्ष 2013 में आयोजित ...और पढ़ें

मध्य प्रदेश: व्यापम आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश: व्यापम आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. अभ्यर्थी ने अपनी जगह सॉल्वर से दिलवाई परीक्षा, चयनित भी हो गया 

  2. अभी सॉल्वर का नाम सामने नहीं आया है, पुलिस जांच में जुट गई है

जेएनएन, जबलपुर। मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में घपले वर्षों बाद भी सामने आ रहे हैं। वर्ष 2013 में आयोजित आरक्षक चयन परीक्षा में अभ्यर्थी ने साल्वर से परीक्षा दिलवाई और चयनित हो गया।

मामले में अब 13 साल बाद जबलपुर जिले की माढ़ोताल थाना पुलिस ने सोमवार रात को संबंधित अभ्यर्थी और साल्वर के खिलाफ परीक्षा अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया।

पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2013 में आयोजित आरक्षक चयन परीक्षा के लिए जबलपुर जिले के माढ़ोताल क्षेत्र स्थित एक निजी कालेज पर आरोपित अभ्यर्थी विवेक सिंह का केंद्र बनाया गया था।

आरोप है कि विवेक ने अपनी जगह सॉल्वर को परीक्षा देने के लिए भेज दिया। इस दौरान साल्वर के अंगूठे के निशान भी लिए गए थे। परीक्षा परिणाम में विवेक का चयन हो गया।

हालांकि अभी सॉल्वर का नाम सामने नहीं आया है, इसलिए एफआईआर में वह अज्ञात है। माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पंवार का कहना है कि मामले की विवेचना में पता लगेगा कि साल्वर कौन था। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अंगूठे के मिलान से खुला फर्जीवाड़ा

चयन प्रक्रिया के दौरान पुलिस मुख्यालय ने अभ्यर्थी विवेक के अंगूठे के निशान लिए, जो संदिग्ध पाए गए। इसके बाद उसे विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की सागर स्थित 10वीं बटालियन में भेजा गया और अंगुलियों के निशान की जांच कराई गई।

जांच में ओएमआर शीट पर मिले अंगूठे के निशान और विवेक के निशान का मिलान नहीं हो पाया। इससे परीक्षा में साल्वर बैठाए जाने का फर्जीवाड़ा सामने आया था। एसएएफ की ओर से विधिक कार्रवाई के लिए जबलपुर पुलिस को रिपोर्ट भेजी गई थसी, इस पर अब कार्रवाई की गई है।

कार्रवाई में इतने साल कैसे लगे, अहम प्रश्न

इस मामले में 13 साल बाद पुलिस कार्रवाई क्यों की गई, यह अहम प्रश्न है, लेकिन जवाब कोई नहीं दे रहा। माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पंवार का कहना है कि एसएएफ की ओर से मामले में कार्रवाई के लिए अब पत्र मिला है, इसलिए कार्रवाई की जा रही है। उनकी सत्यापन प्रक्रिया में इतना समय क्यों लगा, यह वह नहीं बता सकते। विवेचना में यह भी देखा जाएगा।