TET में मराठी अनिवार्य करने पर विवाद, महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ खड़ा हुआ कर्नाटक विद्यावर्धक संघ| Navbharat Live

Published on 13 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 13, 2026 | 05:00 PM IST

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सार

KVS Protest Warning: महाराष्ट्र सरकार द्वारा कन्नड़ माध्यम के शिक्षकों के लिए TET में मराठी अनिवार्य करने पर KVS ने कड़ा विरोध जताया है। इस फैसले को नियमों के खिलाफ बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

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सीएम देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Maharashtra TET Marathi Mandatory: महाराष्ट्र सरकार की ओर से कन्नड़-मीडियम के शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा में मराठी भाषा अनिवार्य करने पर कर्नाटक विद्यावर्धक संघ (केवीएस) ने विरोध किया है। संगठन का आरोप है कि यह कदम एनसीटीई के नियमों का उल्लंघन है और इसका मकसद महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में कन्नड़ शिक्षा को कमजोर करना है।

संगठन की स्पेशल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें इस फैसले को भेदभावपूर्ण और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया है। इसके साथ ही, यह भी बताया गया है कि कर्नाटक में मराठी-मीडियम के शिक्षकों को मराठी में टीईटी परीक्षा देने की इजाजत है और मांग की गई है कि महाराष्ट्र भी कन्नड़ शिक्षकों के लिए यही मॉडल अपनाए।

कन्नड़ भाषा को दबाने की कोशिश का आरोप

केवीएस ने महाराष्ट्र पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वह कन्नड़ शिक्षकों को मराठी में परीक्षा देने के लिए मजबूर करके कन्नड़ भाषा को दबाने की कोशिश कर रहा है। केवीएस का कहना है कि कन्नड़ शिक्षकों को राहत देने के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को महाराष्ट्र ने नजरअंदाज कर दिया है।

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सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत यह फैसला वापस नहीं लिया तो वे जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन करेंगे। केवीएस ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया है कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर बात करें और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत दखल देने की अपील की है।

महारष्ट्र में मराठी जरूरी: संजय उपाध्याय

महाराष्ट्र में मराठी भाषा अनिवार्य करने को लेकर भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने बीते दिन कहा था कि अगर आप महाराष्ट्र में रहते हैं, तो मराठी जानना जरूरी है; आपको यह भाषा आनी चाहिए। स्थानीय भाषा में महारत होने से कामकाज आसान हो जाता है और लोगों के साथ बेहतर ढंग से बातचीत की जा सकती है। इसलिए, मैं मराठी सिखाने और सीखने की पहल का स्वागत करता हूं।

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महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी बोलनी चाहिए

मराठी भाषा को लेकर रेलवे यात्री और टिकट परीक्षक के बीच हुए विवाद पर एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी बोलनी चाहिए, या कम से कम इसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति केंद्र सरकार का कर्मचारी है, तो उन पर ऐसी कोई सख्त शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि उनका चयन अखिल भारतीय चयन प्रक्रिया के आधार पर होता है; वे किसी एक खास राज्य से नहीं आते हैं।

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