Supreme Court Hearing: 'कक्षा नौ पहले से ही तनावपूर्ण होती है, 9वीं के स्तर पर नई भाषा न लाएं'- जस्टिस नागरत्ना - Haribhoomi

Published on 16 जुल॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत कक्षा नौवीं से तीसरी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि नौवीं कक्षा के स्तर पर एक नई भाषा जोड़ना छात्रों पर अनावश्यक मानसिक तनाव बढ़ाएगा।

justice b v nagarathna

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि भारत सरकार को नौवीं कक्षा के संवेदनशील स्तर पर तीसरी भाषा नीति को जबरन लागू करने से बचना चाहिए।

  • Published: 16 Jul 2026, 03:43 PM IST
  • Last Updated: 16 Jul 2026, 03:43 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अंतर्गत नौवीं कक्षा के स्तर पर तीसरी भाषा को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने की योजना पर गंभीर विधिक और व्यावहारिक चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को मौखिक रूप से निर्देशित किया कि वे नौवीं कक्षा में नई भाषा थोपने की इस प्रक्रिया को तुरंत रोकें।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कक्षा नौवीं में पहले से ही पढ़ाई का अत्यधिक बोझ होता है, ऐसे में एक नई भाषा को जोड़ना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। पीठ ने सुझाव दिया कि यदि कोई नई भाषा सिखानी ही है, तो उसकी शुरुआत प्राथमिक स्तर यानी कक्षा पांचवीं या छठी से की जानी चाहिए, जहां बच्चे इसे बिना किसी मानसिक दबाव के सहजता से सीख सकते हैं।

कक्षा नौवीं पहले से ही तनावपूर्ण होती है, केंद्र सरकार बच्चों पर बेवजह मानसिक दबाव न बढ़ाए— न्यायमूर्ति नागरत्ना
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने केंद्र सरकार के वकील को कहा कि भारत सरकार को नौवीं कक्षा के संवेदनशील स्तर पर तीसरी भाषा नीति को जबरन लागू करने से बचना चाहिए। उन्होंने अपने स्वयं के विद्यालयी दिनों का संस्मरण साझा करते हुए उल्लेख किया कि उनके समय में छात्र मध्य विद्यालय के दौरान ही तीसरी भाषा का चयन कर लेते थे, जिससे उच्च माध्यमिक स्तर पर उन पर बोझ नहीं पड़ता था।

उन्होंने कहा कि जिनकी दूसरी भाषा हिंदी थी, वे कन्नड़ या संस्कृत चुनते थे, जिससे भाषा सीखने की क्षमता का प्राकृतिक विकास होता था। पीठ ने कहा कि बच्चों के लिए नई भाषा सीखने की शुरुआत जितनी जल्दी होगी, परिणाम उतने ही बेहतर और सुगम होंगे।