'मनमानी की तो सब रद्द कर देंगे!' SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को 3 कड़ी चेतावनी

Published on 5 अक्टू॰ 2026

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि कानून तोड़ा तो हर फैसला पलट देंगे। CEC ज्ञानेश कुमार समेत तीनों आयुक्तों से जवाब तलब किया है।

Supreme Court on SIR Row: वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाली अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग भले ही एक संवैधानिक संस्था हो, लेकिन वह देश के कानून और तय नियमों से ऊपर बिल्कुल नहीं है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों साथी चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी कर सीधा जवाब तलब किया है। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को 3 दो-टूक हिदायतें दीं।

'कानून तोड़ा तो हम हर फैसला पलट देंगे'

सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि आयोग के अंदर पूरी बेंच की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए यहां तक कह दिया कि अगर अदालत ने तुरंत दखल नहीं दिया तो हालात बेहद बिगड़ जाएंगे। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों के बजाय पूरे प्रामाणिक रिकॉर्ड तलब करने की बात कही, लेकिन साथ ही दो-टूक शब्दों में चेताया। सीजेआई ने कहा कि 'देश में एक अनिवार्य कानून है और चुनाव आयोग से उम्मीद की जाती है कि वह उसका पूरी तरह पालन करे।' अदालत ने दो टूक कहा कि 'अगर कानून का रत्ती भर भी उल्लंघन हुआ, तो हम उसे पूरी तरह पलट देंगे।' जस्टिस बागची ने भी स्पष्ट किया कि 'अगर रिकॉर्ड से ये साबित हुआ कि सर्वसम्मति के जरूरी नियम को ताक पर रखकर फैसले थोपे गए हैं, तो अदालत उन सभी फैसलों पर तुरंत रोक लगाकर उन्हें गैर-कानूनी घोषित कर देगी।'

'बदला हुआ फॉर्म-6 हमने पास नहीं किया, दिमाग से निकाल दें'

नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 (Form 6) में अचानक किए गए बदलावों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद यs है कि नए वोटर फॉर्म में माता-पिता या पूर्वजों की वंशावली और पुराने रिवीजन से जुड़े एक्स्ट्रा कॉलम ऑनलाइन जोड़ दिए गए, जिसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। इस पर खुद चुनाव आयुक्तों के बीच भी मतभेद की खबरें थीं। चीफ जस्टिस ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि 'ये बात एकदम साफ समझ लें, बदले हुए किसी भी फॉर्म-6 को हमारी कोई मंजूरी नहीं मिली है।' बेंच ने निर्देश दिया कि पूरे दस्तावेज पेश किए जाएं ताकि अदालत यह पता लगा सके कि आखिर किसके इशारे पर और किस अधिकार से फॉर्म में यह फेरबदल किया गया।

चुनाव आयुक्तों की 'इम्यूनिटी' पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान 2023 के नए कानून की धारा 16 (Section 16) के तहत चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) पर भी अदालत ने तीखे सवाल खड़े किए। अब तक इस धारा के तहत चुनाव आयुक्तों पर उनके पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों के खिलाफ कोई सिविल या क्रिमिनल केस नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि यह कानूनी सुरक्षा कवच असीमित नहीं हो सकता। जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि 'अगर मामला व्यक्तिगत मनमानी या नियमों की अवहेलना का है, तो चुनाव आयोग के अफसर इस कवच के पीछे नहीं छिप सकते। कोर्ट अब गहराई से परखेगा कि क्या नए प्रावधानों का पालन सही तरीके से हुआ है या नहीं।'

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।