5 दिन से सड़क पर छात्र, अब मैदान में उतरे राज ठाकरे! पुणे में MPSC के खिलाफ फूटा गुस्सा, क्या कुर्सी गंवाएंगे अध्यक्ष?

Published on 5 अक्टू॰ 2026

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं को लेकर पुणे में शुरू हुआ आंदोलन अब और बड़ा होते दिखाई दे रहा है. आयोग की कार्यप्रणाली, कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता समेत कई मुद्दों को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन के पांचवें दिन सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी छात्रों के बीच पहुंचने वाले हैं. आज शाम राज ठाकरे पुणे पहुंचेंगे और एस.एम.जोशी सभागृह के पास चल रहे आंदोलन मे हिस्सा लेंगे. इतना ही नहीं आज राज ठाकरे वहां MPSC के छात्रों को संबोधित भी करने वाले हैं.

5वें दिन भी जारी रहा आंदोलन 

MPSC के प्रमुख विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग करते हुए छात्रों ने पांच दिन पहले आंदोलन शुरु किया. इस आंदोलन का नेतृत्व एनसीपी के नेता और विधायक रोहित पवार कर रहे हैं. रोहित पवार पिछले पांच दिन से आंदोलन स्थल पर ही डेरा डाले हुए हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया है कि विवेक भीमनवार इस्तीफा नहीं देंगे तब तक यहां से नहीं हिलेंगे.  आंदोलन मे हर रोज दो से तीन हजार से ज्यादा परीक्षार्थी भाग ले रहे है. तीन दिन से लगातार राज्य के सभी नेता आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं. 

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राज ठाकरे आज छात्रों के बीच पहुंचेंगे

अब इस मामले में सियासत भी तेज होते दिखाई दे रही है. मामले की गंभीरता को लेकर MNS प्रमुख राज ठाकरे सोमवार को पुणे में MPSC छात्रों के आंदोलन में शामिल होने वाले हैं. रिपोर्टों के मुताबिक वह एस.एम. जोशी ब्रिज के पास चल रहे प्रदर्शन में पहुंचेंगे और छात्रों को संबोधित करेंगे. उनका समर्थन MPSC में पारदर्शिता और अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन के लिए होगा. 

शिंदे के सांसद को करना पड़ा हूटिंग का सामना

वहीं, ठाकरे की पार्टी से चुनकर आए धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने कल शाम आंदोलन स्थल पर जाकर अपना समर्थन दिया. जब ओमराजे अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, तब परीक्षार्थीयों ने उनके पार्टी बदलने के रुख पर भी हल्ला- गुल्ला किया. बार-बार समझाने के बावजूद भी MPSC के छात्र उनके भाषण के दौरान टोकते रहे, जिसके बाद वह काफी नाराज भी नदर आए. उन्होंने सत्ता ना होने की वजह से किस तरह से हमने स्थानिक स्वराज्य संस्था के चुनाव गंवा दिए इसकी कहानी भी सुना दी.

फिर भी बच्चों ने उनसे सवाल करना बंद नहीं किया. इस घटना ने राजनीतिक माहौल को भी और ज्यादा गरम कर दिया. इसके बाद ओमराजे पर तंज कसते हुए शिवसेना नेता संजय राऊत ने कहा कि शिंदे आपको पैसा तो दे सकते हैं लेकिन प्रतिष्ठा कभी नहीं दे सकते.

आखिर क्यों नाराज हैं छात्र?

बता दें कि छात्रों के नाराजगी की सबसे बड़ी वजह MPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले हैं. अगस्त 2026 में MPSC ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी. बाद में जब जांच हुई तो पेपर लीक होने की बात सामने आई थी. इसके बाद से छात्रों ने आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. छात्रों का कहना है कि आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और तत्कालीन सचिव महेंद्र हरपाळकर के कार्यकाल में ये घटनाएं हुईं, इसलिए दोनों को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए. इसी आधार पर दोनों के इस्तीफे की मांग उठी थी.

हालांकि, अब इस मामले में एक बड़ा बदलाव हो चुका है. महाराष्ट्र सरकार ने MPSC के सचिव महेंद्र हरपाळकर को पद से हटा दिया है. सरकार ने इसे प्रशासनिक कारणों से लिया गया फैसला बताया है. अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की मांग अब भी प्रदर्शनकारियों के प्रमुख मुद्दों में शामिल है.

मुख्यमंत्री से हुई थी छात्रों की बातचीत

इससे पहले 30 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई थी. बैठक के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था. इनमें MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन कराने, सचिव को बदलने, भर्ती प्रक्रिया में सुधार, सिंगल कार्ड व्यवस्था और अगले तीन वर्षों की रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया चलाने जैसे मुद्दे शामिल थे. इन आश्वासनों के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बनने के बाद प्रदर्शन फिर शुरू हो गया. 

आंदोलन में क्यों पड़ी फूट?

अब सवाल ये भी खड़ा होता है कि छात्र पहले MPSC में पारदर्शिता को लेकर विरोध कर रहे थे लेकिन देखते ही देखते छात्रों के आंदोलन में अब परीक्षा के पैटर्न को लेकर भी मतभेद सामने आ गया है. एक गुट चाहता है कि MCQ यानी बहुविकल्पीय प्रश्नों वाला पैटर्न वापस लाया जाए. इसके समर्थन में छात्रों ने अलग प्रदर्शन शुरू किया है. इस प्रदर्शन को कुछ सत्तारूढ़ दलों के नेताओं का समर्थन भी मिला है.

वहीं, दूसरे छात्र मौजूदा डिस्क्रिप्टिव पैटर्न को जारी रखने के पक्ष में हैं. उनका कहना है कि इस पैटर्न से उम्मीदवार की समझ, विश्लेषण क्षमता और लिखने की क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सकता है. इसी मुद्दे पर एक अलग समूह ने प्रदर्शन शुरू किया है. इस तरह अब पुणे में MPSC को लेकर तीन अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. एक जगह अध्यक्ष के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग है, दूसरी जगह MCQ पैटर्न वापस लाने की मांग उठ रही है, जबकि तीसरा समूह डिस्क्रिप्टिव पैटर्न को बनाए रखने के पक्ष में है..

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