Rajasthan News: राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद सात मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण फैल गया. मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर और अजमेर भेजा गया.
Rajasthan News: राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद सात मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण फैल गया. मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर और अजमेर भेजा गया.
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cataract surgery eye infection Photograph: (NN)
Rajasthan News: राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. डीडवाना कुचामन के राजकीय जिला अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद सात मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण फैल गया. जिन मरीजों को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद उनकी धुंधली दुनिया फिर से साफ दिखाई देने लगेगी, वे अब अपनी आंखों की बची हुई रोशनी बचाने के लिए अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं. इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और सफाई के दावों की पोल खोल दी है.
रोशनी की उम्मीद में मिला अंधेरा
डीडवाना कुचामन के जिला अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने कई मरीज पहुंचे थे. मोतियाबिंद की सर्जरी को चिकित्सा क्षेत्र में बहुत ही सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है. ऑपरेशन के अगले दिन जब मरीज अपनी नियमित जांच और पट्टी खुलवाने के लिए अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उनकी आंखों में असामान्य लक्षण देखे. कुछ ही घंटों में यह साफ हो गया कि मरीजों की आंख में ऑपरेशन के बाद का गंभीर संक्रमण हो चुका है. मरीजों को आंखों में तेज जलन और धुंधलापन महसूस होने लगा था.
जयपुर और अजमेर किए गए रेफर
मरीजों की हालत बिगड़ते देख अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पांच मरीजों को जयपुर के एसएमएस अस्पताल और दो मरीजों को अजमेर रेफर कर दिया गया. एसएमएस अस्पताल में भर्ती मरीजों की आंखों में तेज दर्द और जलन की शिकायत थी, जबकि कई लोगों को दिखाई देना पूरी तरह बंद हो गया था. जयपुर के डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद पाया कि मरीज एंडोफ्थमाइटिस नाम के गंभीर इंफेक्शन से पीड़ित हैं. स्थिति को काबू में करने के लिए पांच मरीजों का दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा.
ऑपरेशन थिएटर सीज और जांच के आदेश
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया. जिला कलेक्टर के निर्देश पर उपखंड अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर पूरी स्थिति का जायजा लिया. एहतियात के तौर पर नेत्र रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर को तुरंत प्रभाव से सीज कर दिया गया है. चिकित्सा मंत्री के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम का गठन भी किया गया है. जयपुर और अजमेर से आई विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन थिएटर, वहां इस्तेमाल की गई दवाओं, सर्जिकल उपकरणों और आई फ्लूइड्स के सैंपल लिए हैं, ताकि संक्रमण फैलने की असली वजह का पता लगाया जा सके.
पीड़ित परिवारों का छलका दर्द
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है. परिजनों का कहना है कि वे अपने बुजुर्गों का इलाज कराने बड़ी उम्मीद के साथ सरकारी अस्पताल आए थे, लेकिन लापरवाही के कारण उनकी आंखों की रोशनी पर ही खतरा मंडराने लगा है. मरीजों ने बताया कि ऑपरेशन के तुरंत बाद से ही उनकी आंखों में असहनीय दर्द शुरू हो गया था. परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सही कदम उठाए जाते तो इंफेक्शन को इतना बढ़ने से रोका जा सकता था.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने राज्य में सियासी और सामाजिक पारा बढ़ा दिया है. विपक्ष ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सीधा हमला बोलते हुए इसे मेडिकल सिस्टम की बड़ी विफलता करार दिया है. हालांकि सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह पहला मौका नहीं है जब किसी सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर इस तरह के सवाल उठे हों. अब देखना यह होगा कि जांच टीम की रिपोर्ट में क्या निकलकर सामने आता है और पीड़ितों को कब तक न्याय मिलता है.
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