हाईकोर्ट के निर्देश- हजारों तोतों के आश्रय की सुरक्षा करें: इंदौर में पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी में मेट्रो स्टेशन के लिए कटेंगे पेड़, हर साल देनी होगी रिपोर्ट - Indore News

Published on 23 अक्टू॰ 2026

इंदौर में रानी सराय स्थित एसपी कार्यालय परिसर में भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पक्षियों के संरक्षण को लेकर कई निर्देश दिए हैं।

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कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि पेड़ों को मनमाने तरीके से या एक साथ नहीं काटा जाएगा। कटाई और शाखाओं की छंटाई कम से कम दो पक्षी विशेषज्ञों की सलाह और निगरानी में चरणबद्ध तरीके से करनी होगी।

साथ ही, परियोजना से जुड़े पक्षों को 2500 पौधे लगाने और उनके रखरखाव की जानकारी हर साल कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने 22 अक्टूबर 2026 को जनहित याचिका (प्रियांशु जैन विरुद्ध भारत संघ एवं अन्य) के मामले में यह आदेश दिया।

याचिका में आशंका जताई गई थी कि रानी सराय परिसर में 182 पेड़ों की कटाई से हजारों पक्षियों, खासकर तोतों के प्राकृतिक आश्रय पर असर पड़ेगा।

घोंसलों, अंडों और छोटे पक्षियों की सुरक्षा जरूरी

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि पेड़ों की कटाई या शाखाओं की छंटाई इस तरह की जाए कि पक्षियों को आसपास के दूसरे पेड़ों पर जाने का समय मिल सके। इस दौरान घोंसलों, अंडों और उनमें मौजूद छोटे पक्षियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा।

कोर्ट ने मौके पर वन्यजीव बचाव दल को जाल और चिकित्सा किट के साथ मौजूद रखने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि घायल पक्षियों या घोंसलों से गिरने वाले बच्चों को जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद मिल सके।

2500 पौधे लगाने होंगे, हर साल अप्रैल में रिपोर्ट

मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े पक्षों ने 2500 पेड़ लगाने का आश्वासन दिया था। हाईकोर्ट ने इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा है। कोर्ट के निर्देशानुसार आसपास पर्याप्त जगह उपलब्ध होने पर उसी तरह की प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं, ताकि पक्षियों को भविष्य में दोबारा आश्रय मिल सके।

पेड़ लगाने के संबंध में एक वर्ष के भीतर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद लगाए गए पेड़ों के रखरखाव और उनकी स्थिति की जानकारी हर साल अप्रैल में रिपोर्ट तथा गूगल इमेज के साथ अदालत में पेश करनी होगी।

निरीक्षण में पेड़ों पर दिखे थे हजारों पक्षी

आदेश में उल्लेख है कि 29 सितंबर 2026 को न्यायाधीशों ने पक्षकारों और उनके वकीलों के साथ रानी सराय परिसर का निरीक्षण किया था। इस दौरान पेड़ों पर हजारों पक्षी दिखाई दिए थे, जिनमें अधिकांश तोते थे। कोर्ट ने माना कि पेड़ों की कटाई से पक्षियों के विश्राम और आश्रय स्थल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

हालांकि बेंच ने मेट्रो स्टेशन का स्थान बदलने की मांग स्वीकार नहीं की। पूर्व में मेट्रो मार्ग को लेकर पारित न्यायिक आदेश को ध्यान में रखते हुए अदालत ने इस मामले में प्रस्तावित स्टेशन के स्थान में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही पक्षियों की सुरक्षा और पौधरोपण को लेकर निर्देश जारी किए।

पर्यावरणविद् भालचंद्र मोंढे सुझाएंगे विशेषज्ञों के नाम

कोर्ट ने पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् भालचंद्र मोंढे को पक्षी विशेषज्ञों के नाम सुझाने की अनुमति दी है। ये विशेषज्ञ पेड़ों की छंटाई और पक्षियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों को सलाह दे सकेंगे। प्रत्येक विशेषज्ञ को उनकी सेवाओं के लिए 10 हजार रुपए पारिश्रमिक दिया जाएगा।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट लवेश सरस्वत और शिवेंद्र सिंह परिहार उपस्थित हुए। इंटरविनर की ओर से अधिवक्ता अभिनव पी. धनोडकर ने पैरवी की।

राज्य शासन की ओर से सरकारी वकील प्रद्युम्न किबे, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से एजवोकेट अमोल श्रीवास्तव और नगर निगम की ओर से एडवोकेट कामाक्षी सिंह उपस्थित हुईं।

हाईकोर्ट के आदेश से मेट्रो स्टेशन निर्माण पर रोक नहीं लगी है, लेकिन पेड़ों की कटाई के तरीके, पक्षियों की सुरक्षा और पौधों के रखरखाव को लेकर जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

लालबाग पैलेस में 155 पेड़ काटने पर रोक

उधर, ऐतिहासिक लालबाग पैलेस परिसर में पार्किंग और बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 155 पेड़ों की कटाई के आदेश पर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य शासन और नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

चीफ जस्टिस ए. वाय. कोगजे और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। एडवोकेट रितेश ईनानी की ओर से सीनियर एडवोकेट गिरीश पटवर्धन ने याचिका दायर कर पेड़ों की कटाई और पर्यावरण पर इसके प्रभाव का मुद्दा उठाया।

नगर निगम के उद्यान अधिकारी ने परिसर में प्रस्तावित बाउंड्रीवॉल निर्माण में बाधक 186 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी। राज्य शासन ने इनमें से 155 पेड़ों की कटाई की मंजूरी दी थी। इसी अनुमति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।