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शहर के सिविल लाइंस स्थित एकीकृत मिडिल स्कूल माधवगंज क्रमांक-2 में पिछले 5 महीने से ताला लगा है। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद भी स्कूल नहीं खुला। यहां पढ़ने वाले 137 बच्चों को हेड मिस्ट्रेस ने प्राइमरी स्कूल में मर्ज कर दिया है। स्कूल परिसर में बारिश के पानी की निकासी के लिए नाली खोदी गई है और पूरे परिसर में घास उग आई है। उधर, पुलिस लाइन स्थित स्कूल भवन जर्जर होने के कारण वहां के बच्चों को भी माधवगंज क्रमांक-2 के प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया। स्थिति यह है कि 6 कमरों के छोटे से प्राइमरी स्कूल भवन में 3 स्कूलों की कक्षाएं लग रही हैं।
शहर के पीतल मिल स्थित प्राइमरी स्कूल का पुराना भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यहां पढ़ने वाले 47 बच्चों की कक्षाएं एक ही कमरे में लग रही हैं। जिले में 197 प्राइमरी और मिडिल स्कूल भवन जर्जर बताए जा रहे हैं, जबकि 84 स्कूलों में मरम्मत कराए जाने का दावा किया गया है।
एकीकृत मिडिल स्कूल माधवगंज क्रमांक-2 की हेड मिस्ट्रेस ज्योति अग्रवाल और अन्य शिक्षकों का कहना है कि बारिश के दौरान स्कूल परिसर में चार बार सांप निकल चुके हैं। नगरपालिका ने परिसर के बीच से नाली खोद दी है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल में कक्षाएं लगाना मुश्किल है। हालांकि स्कूल बंद रहने से 137 बच्चों की पढ़ाई दूसरे स्कूल में करानी पड़ रही है।
प्रधानाध्यापिका को देंगे नोटिस निलंबन की कार्रवाई करेंगे ^एकीकृत मिडिल स्कूल माधवगंज क्रमांक-2 की मरम्मत के लिए 7.50 लाख का टेंडर हो चुका है। जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। नपा को भी काम जल्द पूरा करने कहा गया है। स्कूल का ताला नहीं खोलने वाली प्रधानाध्यापिका को कारण बताओ नोटिस जारी कर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। जिले के 84 स्कूलों में मरम्मत कराई जा चुकी है और बाकी स्कूलों में भी जल्द काम कराया जाएगा। -आरपी लखेर, डीपीसी
जर्जर हो चुके 150 से ज्यादा भवन अब तक नहीं तोड़े जिले में 1,829 प्राइमरी और मिडिल स्कूल भवन हैं। इनमें से 197 भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन्हें तोड़ने के आदेश जारी होने के बावजूद 150 से ज्यादा भवन अब तक नहीं तोड़े गए हैं। इन भवनों में कक्षाएं नहीं लग रही हैं। इसके अलावा 550 स्कूल भवनों में मरम्मत की जरूरत बताई गई है। जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) कार्यालय की ओर से मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन बजट नहीं मिलने से काम अटका हुआ है। मरम्मत के लिए कुछ स्कूलों को सीधे 1 से 1.50 लाख रुपए तक की राशि मिली थी।
पीतल मिल स्थित शासकीय प्राइमरी स्कूल का पुराना भवन ध्वस्त हो चुका है। उसके पास बने तीन कमरों में से एक में स्टाफ बैठता है, दूसरे में सामान रखा है और तीसरे कमरे में 47 बच्चों की कक्षाएं लगती हैं। इस कमरे में 20 से 25 बच्चे ही बैठ सकते हैं। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस अरुणा तिवारी ने बताया कि नया भवन बनने तक इसी कमरे में कक्षाएं लगाना मजबूरी है। सीमित जगह से बच्चों की पढ़ाई कराने में परेशानी होती है।