झज्जर की बेटी दीक्षा ने एशियन गेम्स में जीता सिल्वर: गोल्फ टीम इवेंट में दूसरे स्थान पर, महिला टीम गोल्फ में भारत का पहला एशियाई खेल पदक - Jhajjar News

Published on 3 अक्टू॰ 2026

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में झज्जर की बेटी और अंतरराष्ट्रीय गोल्फर दीक्षा डागर ने देश का मान बढ़ाया है। दीक्षा डागर ने प्रणवी शरथ उरस और अदिति अशोक के साथ मिलकर महिला गोल्फ टीम इवेंट में भारत के लिए रजत पदक जीता। भारतीय टीम ने कुल

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दीक्षा, प्रणवी और अदिति की तिकड़ी का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स के महिला टीम गोल्फ में भारत का यह पहला पदक है। इस उपलब्धि ने भारतीय महिला गोल्फ के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। टीम की ओर से प्रणवी उरस ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी इतिहास रचा और एशियन गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं।

अंतिम दौर में प्रणवी ने 70 का स्कोर बनाकर कुल 15-अंडर 265 के साथ व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। अदिति अशोक ने अंतिम दौर में 67 और दीक्षा डागर ने 77 का स्कोर बनाया। टीम के दो सर्वश्रेष्ठ स्कोरों को जोड़कर भारत का कुल स्कोर 546 रहा।

झज्जर की बेटी का सफर रहा संघर्ष और उपलब्धियों से भरा

दीक्षा डागर का सफर बचपन से ही संघर्ष और उपलब्धियों से जुड़ा रहा है। वह छह-सात वर्ष की उम्र से गोल्फ खेल रही हैं। सुनने में अक्षम होने के बावजूद उन्होंने इस कमी को कभी अपनी राह में बाधा नहीं बनने दिया। उनके पिता कर्नल नरेंद्र डागर भी गोल्फ खेलते रहे हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने बेटी को प्रशिक्षण दिया।

दीक्षा ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वर्ष 2017 के डेफलिम्पिक्स में उन्होंने रजत पदक जीता था। इसके बाद 2018 में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व एशियन गेम्स में किया।

दीक्षा डागर को वर्ष 2023 का अर्जुन अवॉर्ड भी दिया गया था।

दीक्षा डागर को वर्ष 2023 का अर्जुन अवॉर्ड भी दिया गया था।

18 साल की उम्र में रचा था बड़ा इतिहास

वर्ष 2019 में दीक्षा ने प्रोफेशनल गोल्फ में कदम रखा और उसी साल साउथ अफ्रीकन महिला ओपन जीतकर इतिहास रच दिया। वह उस समय सिर्फ 18 वर्ष की थीं और लेडीज यूरोपियन टूर पर खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला गोल्फर बनीं। इससे पहले यह उपलब्धि अदिति अशोक के नाम थी।

इसके बाद दीक्षा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान मजबूत की। उन्होंने 2021 में लेडीज यूरोपियन टूर पर टीम इवेंट भी जीता और 2023 में टिप्सपोर्ट चेक लेडीज ओपन का खिताब अपने नाम किया।

ओलिंपिक से लेकर डेफलिम्पिक्स तक भारत का प्रतिनिधित्व

दीक्षा की उपलब्धियों में ओलिंपिक भी शामिल है। उन्हें टोक्यो ओलिंपिक में अंतिम समय पर प्रवेश मिला और वह ओलिंपिक तथा डेफलिम्पिक्स दोनों में हिस्सा लेने वाली पहली गोल्फर बनीं। उन्होंने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

डेफलिम्पिक्स में भी दीक्षा ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। 2022 में ब्राजील के कैक्सियास डो सुल में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2025 टोक्यो डेफलिम्पिक्स में भी उन्होंने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में गोल्ड जीतकर अपना खिताब बरकरार रखा।

टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं दीक्षा।

टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं दीक्षा।

अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुकी

दीक्षा डागर को वर्ष 2023 का अर्जुन अवॉर्ड भी दिया गया। जनवरी 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। खेल मंत्रालय ने इससे पहले उन्हें टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS में भी शामिल किया था।

अब एशियन गेम्स का रजत भी उपलब्धियों की सूची में जुड़ा

एशियन गेम्स 2026 का रजत पदक दीक्षा के शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है। झज्जर की इस बेटी ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिभा, मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर चुनौतियों को पीछे छोड़कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी दीक्षा डागर समेत भारतीय महिला गोल्फ टीम को एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने पर बधाई दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। दीक्षा की यह उपलब्धि झज्जर के साथ-साथ पूरे हरियाणा के लिए गर्व का विषय है।