क्या स्ट्रेस की वजह से निकलते हैं एक्ने-पिंपल? एक्सपर्ट से समझें इसके पीछे का साइंस

Published on 3 अक्टू॰ 2026

क्या स्ट्रेस की वजह से निकलते हैं एक्ने-पिंपल? एक्सपर्ट से समझें इसके पीछे का साइंस

स्ट्रेस की वजह से क्यों होते हैं पिंपल्स और एक्ने?Image Credit source: pexels

एक्ने या मुंहासे किसी भी उम्र के इंसान को हो सकते हैं, लेकिन टीनएज और युवाओं में त्वचा की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्या है. अक्सर इससे छुटकारा पाने के लिए लोग सीरम से लेकर कई तरह की क्रीम, DIY टिप्स और घरेलू नुस्खों का सहारा भी लेते हैं. खानपान में बदलाव करके भी मुंहासों को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन आपको ये पता लगाना बहुत जरूरी है कि कहीं ये पिंपल्स या एक्ने ज्यादा तनाव लेने की वजह से तो नहीं हो रहे हैं.

दरअसल इसपर कई रिसर्च भी हैं और एक्सपर्ट भी कहते हैं कि आपको स्ट्रेस की वजह से पिंपल्स और एक्ने की समस्या हो सकती है. इस आर्टिकल में जानेंगे एक्ने और पिंपल्स का क्या है स्ट्रेस से कनेक्शन, जान लेते हैं इसके पीछे की साइंस.

क्या कहती है रिसर्च?

पबमेड में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय के चिकित्सा संकाय में पढ़ रही 22 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 144 छठे वर्ष की महिला चिकित्सा छात्राओं के बीच एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन किया गया. इसमें तनाव के संबंध में मुंहासे की गंभीरता का आकलन करने के लिए ग्लोबल एक्ने ग्रेडिंग सिस्टम (जीएजीएस) का उपयोग किया गया, जिसके लिए परसीव्ड स्ट्रेस स्केल (पीएसएस) का प्रयोग किया गया। प्रश्नावली में मुंहासे की गंभीरता को प्रभावित करने वाले कुछ कारकों को भी शामिल किया गया था. इसके परिणामों से पता चलता है कि तनाव ज्यादा होने और मुंहासे निकलने में वृद्धि होने का गहरा संबंध है. इसमें पाया गया कि ज्यादा स्ट्रेस होने से मुंहासे हो सकते हैं.

इसी तरह की एक और रिसर्च है, जिसमें कुल मिलाकर, 11 अध्ययनों ने समावेशन मानदंडों को पूरा किया, जिनमें 3,063 प्रतिभागी शामिल थे. ये भी मेडिकल छात्रों पर किया गया अध्ययन था, जिसके निष्कर्ष कहते हैं कि नौ अध्ययनों में तनाव और मुंहासे की गंभीरता के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध पाया गया. हालांकि इसके अलावा भी कई फैक्टर्स सामने आए जैसे मेडिकल छात्रों में उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड का सेवन, गर्मी और आर्द्रता जैसे पर्यावरणीय कारक और नींद की कमी जैसी जीवनशैली संबंधी आदतें शामिल हैं.

क्यों होते हैं स्ट्रेस से मुहांसे?

दरअसल मुंहासे एक ऐसी समस्या है जो सभी आयु वर्ग के तकरीबन 9.38% लोगों को प्रभावित करती है. इसे लेकर कई तरह के अध्ययन सामने आए हैं. दरअसल कॉर्टिकॉट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन रिसेप्टर्स के स्राव के कारण, त्वचा तनावपूर्ण स्थितियों के जवाब में मुहांसे पैदा करती है. कोरियाई अस्पतालों को शामिल करने वाले एक बहुकेंद्रीय अध्ययन में बताया गया कि 82% प्रतिभागियों को मनोवैज्ञानिक तनाव के कारण मुंहासे हुए थे. इसी तरह से और भी स्टडी की गई हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसलटेंट डर्मेटोलॉजी डॉक्टर संदीप अरोड़ा ने बताया था कि चेहरे के अलग-अलग जगहों पर निकलने वाले मुंहासे आपकी सेहत के बारे में बताते हैं, जैसे माथे पर ज्यादा पिंपल्स आपके डाइजेशन की समस्या खासकर लिवर और गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल इंबैलेंस की वजह से हो सकते हैं. इसमें डाइट में सुधार करना चाहिए, क्योंकि शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाएं तो ये त्वचा की समस्या बन सकते हैं. इसके अलावा नाक के आसपास पिंपल्स ज्यादा होना ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल सही न रहने की तरफ इशारा करते हैं. यहां के पिंपल नर्वस सिस्टम के अलावा ब्लड सर्कुलेशन से भी जुड़े होते हैं. ऐसे में ध्यान देना जरूरी होता है. ठुड्डी के आसपास पिंपल्स बने रहना हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है तो वहीं गालों पर ज्यादा पिंपल्स आपकी रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी समस्या की वजह से हो सकते है.

ये भी हैं पिंपल्स की वजहें

  • पॉल्यूशन और धूल-मिट्टी के ज्यादा संपर्क में रहना.
  • त्वचा की साफ-सफाई का ध्यान सही से न रखना.
  • खाने की किसी खास चीज से एलर्जी हो जाना.
  • स्किन का बहुत ज्यादा ऑयली होने की वजह से पोर्स का बंद होना.
  • ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार चीजें खाने से डाइजेशन खराब होना.
  • ये अनुवांशिक भी हो सकते हैं जैसे पेरेंट्स में से किसी को पिंपल्स की समस्या हो.

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शशि सिंह

शशि सिंह

शशि सिंह टीवी9 डिजिटल हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से ताल्लुक रखने वाली शशि ने बरेली कॉलेज (महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय) से आर्ट्स से ग्रेजुएशन किया है और अमर उजाला से संबंद्ध इंस्टीट्यूट 'द आरोहन मीडिया स्कूल' से इंटीग्रेटेड डिजिटल मीडिया में पीजी डिप्लोमा कर चुकी हैं. इसके साथ ही अमर उजाला से ही इन्होंने बतौर जूनियर कंटेंट राइटर पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. वह रिलीजन, रिलेशनशिप, फूड, हेल्थ, और मनोरंजन जैसे टॉपिक्स पर लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन सालों से ज्यादा का अनुभव है. वहीं मनोरंजन के साथ राजनीति, क्राइम और देश-दुनिया की खबरों के लेखन में भी दिलचस्पी रखती हैं. इसके अलावा इन्होंने 'टेकवन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन' से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी ली है. वह किताबें पढ़ने, कविताएं और शायरी लिखने-पढ़ने का शौक रखती हैं और नई-नई चीजों को एक्सप्लोर करना पसंद करती हैं.

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