घुटने-कूल्हे की सर्जरी में नई तकनीक: पीजीआई में चंडीगढ़ में डॉक्टरों को दी जा रही ट्रेनिंग, अब होगा ज्यादा सटीक और सुरक्षित इलाज - Chandigarh News

Published on 20 सित॰ 2026

चंडीगढ़ के पीजीआई घुटने और कूल्हे के जॉइंट रिप्लेसमेंट को लेकर नई तकनीकों और ज्यादा सटीक सर्जिकल तरीकों पर डॉक्टरों ने तीन दिन तक प्रशिक्षण और चर्चा की। PGIMER के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित Annual PGI Arthroplasty Conference 2026 17 से 19

.

मरीजों के लिए क्यों अहम है यह ट्रेनिंग

जॉइंट रिप्लेसमेंट में केवल खराब जोड़ को बदलना ही पर्याप्त नहीं होता। ऑपरेशन के दौरान सही तकनीक, इम्प्लांट का चयन और मरीज की स्थिति के अनुसार निर्णय लेना भी महत्वपूर्ण होता है। कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने प्राइमरी और रिविजन जॉइंट रिप्लेसमेंट के साथ मुश्किल मामलों पर चर्चा की। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को ऐसे मामलों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना था, ताकि मरीजों के इलाज में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सके।

लाइव सर्जरी और कैडेवर पर मिली प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

इस बार कॉन्फ्रेंस के साथ 3rd PGI Arthroplasty Course भी आयोजित किया गया। इसमें डॉक्टरों को केवल लेक्चर के जरिए जानकारी नहीं दी गई, बल्कि लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन, कैडेवर वर्कशॉप और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग कराई गई। इससे युवा सर्जनों को जॉइंट रिप्लेसमेंट की तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझने का मौका मिला।

पुराना इम्प्लांट निकालना और दोबारा सर्जरी ज्यादा चुनौतीपूर्ण

कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन रिविजन आर्थ्रोप्लास्टी पर विशेष सत्र हुआ। इसमें पहले हुए घुटने के रिप्लेसमेंट के बाद दोबारा सर्जरी में आने वाली चुनौतियों, हड्डी में आई कमी को संभालने और पुराने इम्प्लांट को सटीक तरीके से निकालने पर चर्चा हुई। ऐसे मामलों में सही निर्णय और तकनीक मरीज के इलाज को प्रभावित कर सकते हैं।

इसके अलावा ट्रॉमा के बाद होने वाले जटिल टोटल नी रिप्लेसमेंट, टोटल हिप रिप्लेसमेंट, एनेस्थीसिया, ऑपरेशन के आसपास की मरीज की देखभाल, ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज और जॉइंट को बचाने वाली प्रक्रियाओं पर भी चर्चा हुई।

दवा और ऑपरेशन के बाद की देखभाल पर भी फोकस

टोटल नी रिप्लेसमेंट में इस्तेमाल होने वाले कॉकटेल की अलग-अलग संरचनाओं पर भी भारतीय परिस्थितियों के संदर्भ में चर्चा की गई। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज और जॉइंट रिप्लेसमेंट के बीच संबंध को समझाया गया। यानी फोकस केवल ऑपरेशन की तकनीक पर नहीं, बल्कि मरीज के ऑपरेशन से पहले, दौरान और बाद के पूरे इलाज पर रहा।

आयोजक प्रो. विजय जी. गोनी के अनुसार, कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य नई तकनीकों की जानकारी देने के साथ डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था, ताकि विशेषज्ञता और कौशल का इस्तेमाल बेहतर एवं सुरक्षित मरीज देखभाल में किया जा सके।

तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन अवॉर्ड सेरेमनी और वैलेडिक्टरी सेशन के साथ हुआ। इसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों और युवा सर्जनों ने जॉइंट रिप्लेसमेंट से जुड़ी तकनीकों और जटिल मामलों पर अनुभव साझा किए।