लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए भाजपा ने यूपी में बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम योगी को 'फ्री हैंड' दे दिया है। चुनाव में टिकट बांटने से लेकर पूरी रणनीति तय करने तक की कमान सीधे
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चाहे लोकसभा, विधानसभा या राज्यसभा चुनाव हो, अभी तक भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही टिकट पर फैसला लेता था। हालांकि, सहयोगी दलों अपना दल (एस), RLD, निषाद पार्टी और सुभासपा के साथ सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा।
सूत्रों के मुताबिक, यूपी भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के सीएम योगी से अच्छे संबंध हैं। विधानसभा चुनाव में सीएम से बेहतर तालमेल के लिए उन्हें यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सीएम योगी ने 8 अगस्त को दिल्ली में पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी।
जानिए, भाजपा आलाकमान ने क्यों यह फैसला लिया
- पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं, ‘2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम योगी ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व को एक सूची सौंपी थी। इसमें 24 से ज्यादा सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका देने की सलाह दी थी। लेकिन, आलाकमान ने इस सिफारिश को दरकिनार कर दिया था।
- 64 में से 47 सांसदों को दोबारा मैदान में उतारा गया। नतीजा यह रहा कि 47 में से 26 सांसद चुनाव हार गए। भाजपा यूपी में 33 सीटों पर सिमट गई। इस वजह से केंद्र में पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला। RSS और पार्टी के एक बड़े धड़े ने इस पर गंभीर सवाल उठाए थे।’

सपा को 37, बीजेपी को 33 और कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिली थीं।
कैसे होगा टिकट का बंटवारा
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा टिकट बंटवारे के लिए कोर कमेटी बनाएगी। इसमें प्रत्याशियों के नाम पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, RSS के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार, महेंद्र कुमार और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक विचार करेंगे। हालांकि, अंतिम फैसला सीएम योगी का होगा।
MLC चुनाव में भी सीएम योगी प्रत्याशी तय करेंगे
विधान परिषद की शिक्षक-स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों के चुनाव की कमान भी सीएम योगी ही संभाल रहे हैं। इनमें से जिन 6 सीटों पर प्रत्याशी घोषित होने हैं, वहां उम्मीदवार तय करने के लिए योगी ने कड़ा मानदंड रखा है। उन्होंने साफ कर दिया है- जिस दावेदार ने जितने ज्यादा वोटर बनवाए हैं, टिकट का हकदार वही होगा।
खास तौर पर वाराणसी खंड (स्नातक व शिक्षक) और प्रयागराज-झांसी सीट पर सीएम की नजर है। ये सीटें फिलहाल सपा के पास हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़ी वाराणसी की दोनों सीटों को योगी हर हाल में सपा से वापस छीनना चाहते हैं।
बगावत रोकने का 'प्लान-बी': टिकट काटने की जगह बदलेंगे सीटें
भाजपा के शुरुआती आंतरिक सर्वे में पार्टी को 190 से 205 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। हालिया राजनीतिक माहौल को देखते हुए पार्टी को डर है कि अगर ज्यादा विधायकों के टिकट एकमुश्त काटे गए, तो वे सपा, कांग्रेस या बसपा में शामिल होकर बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस बगावत को रोकने के लिए भाजपा ने 'सीट बदलने' की रणनीति बनाई है। जिन विधायकों के खिलाफ माहौल है, लेकिन उनका सियासी नुकसान ज्यादा हो सकता है, उन्हें दूसरी सुरक्षित सीटों पर भेजा जाएगा। वहीं, कमजोर और गैर-प्रभावशाली विधायकों के टिकट काटे जाएंगे।

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