'बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु तो नहीं बन जाएगा', चुनाव जीतते ही ऐसा क्यों बोले प्रशांत किशोर

Published on 3 अग॰ 2026

'बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु तो नहीं बन जाएगा', चुनाव जीतते ही ऐसा क्यों बोले प्रशांत किशोर

Aug 03, 2026 08:33 pm ISTहिन्दुस्तान टीम, अनीता गोस्वामी, पटना

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जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की है।

 Jan Suraaj Party (JSP) founder Prashant Kishor

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की है।

बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे की चर्चा देशभर में हो रही है। इस सीट से चुनावी रणनीतिकार रहे और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के इस गढ़ से भाजपा उम्मीदवार को हराया है। इस बीच, उन्होंने चुनावी जीत से पहले एक बड़ी बात कही है। सोमवार को अपनी बड़ी जीत से पहले प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनकी जीत से इस विधानसभा क्षेत्र में साफ तौर पर बदलाव देखने को मिलेंगे।

चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 मतों के अंतर से हराकर ये जीत दर्ज की है। चुनाव आयोग के अनुसार, सभी 32 चरणों की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर को 64,151 मत मिले जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 मत प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

'बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा'

जब वोटों की गिनती आखिरी दौर में थी, तभी अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "मेरे विधायक बनने से बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में आप यहां कुछ सुधार देखेंगे।" किशोर ने कहा कि जीतने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता बड़े-बड़े वादे करने के बजाय बांकीपुर को बेहतर बनाने पर काम करना होगी। उन्होंने कहा, "मेरा पहला काम लोगों के आशीर्वाद से बांकीपुर को बेहतर बनाना होगा। आप अगले दो-तीन महीनों में बदलाव देखेंगे। मैं बड़ी-बड़ी बातें नहीं करना चाहता।"

सम्राट चौधरी पर भी निशाना

उन्होंने इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा और जोर देकर कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य के नेतृत्व के खिलाफ है। पीके ने कहा, “यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है। सम्राट चौधरी का आचरण, चरित्र और चेहरा सबके सामने है। अगर आप किसी अपराधी को बिहार का राजा या मुख्यमंत्री बनाते हैं, तो बिहार तरक्की नहीं कर सकता।”उन्होंने अपील की कि बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के पास बहुमत है इसलिए गठबंधन किसी काबिल नेता को अगला मुख्यमंत्री बनाए। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है। बहुमत बीजेपी और NDA के पास है, इसलिए मुख्यमंत्री भी उन्हीं का होगा। हम बस मोदी जी से गुज़ारिश कर रहे हैं कि वे किसी अच्छे चरित्र वाले काबिल व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाएं ताकि बिहार तरक्की कर सके और लोगों को बिहारी होने पर गर्व हो सके।”

दूसरे दल के लोग क्या कह रहे?

दूसरी तरफ, प्रशांत किशोर की जीत को उनकी पार्टी से बाहर के कई नेताओं ने भी "भाजपा के अहंकार के लिए सबक" करार दिया है। इनमें जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी शामिल हैं। भाकपा (माले) लिबरेशन विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की सहयोगी पार्टी है। 30 जुलाई को हुए मतदान से पहले कई दिनों तक प्रशांत किशोर और भाजपा की ओर से जोरदार चुनाव प्रचार किया गया था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए और इस संबंध में निर्वाचन आयोग का भी रुख किया।

नितिन नवीन ने छोड़ी थी ये सीट

1970 के दशक के जेपी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, "बांकीपुर का जनादेश हाल के छात्र आंदोलनों में भाजपा के प्रति दिखे व्यापक असंतोष की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। साथ ही प्रशांत किशोर को भी इसका श्रेय दिया जाना चाहिए, जिन्होंने असाधारण ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।" राजद के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने भी परिणाम पर खुशी जताई। राजद अक्सर प्रशांत किशोर को भाजपा की "बी टीम" बताती रही है। गगन ने कहा, "हमारे लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है कि भाजपा अपने गढ़ में पराजित हुई, बजाय इसके कि जीत किसकी हुई।" बता दें कि नितिन नवीन ने नवंबर 2025 में यानी पिछले वर्ष लगातार पांचवीं बार बांकीपुर विधानसभा सीट जीती थी। हालांकि, अप्रैल में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। (भाषा इनपुट्स के साथ)