जोधपुर में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय टाइप-1 डायबिटीज समिट 2026 की शुरुआत हुई। उदयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य, 'द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़' की संस्थापक और 'ब्रेक थ्रू T1D' की ग्लोबल एंबेसडर पद्मजा कुमारी ने कहा- मुझे 40 साल से टाइप-1 डायबिटीज है, लेकिन मे
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पद्मजा कुमारी ने आगे कहा- मैं आस पास इस बीमारी को लेकर जो अफवाहें सुन रही थी, तो मैं चुप नहीं बैठ सकी। मैं बिना कुछ किए रह नहीं पा रही थी, मुझे ऐसा लगा कि अगर मैं अभी कुछ नहीं करूंगी, तो बदलाव कब होगा? आज काफी लोग मुझसे जुड़े हैं और उनका मोटिवेशन मेरे साथ है।
उम्मेद भवन पैलेस में समिट शुरुआत पर कहा- जब साहस हमारे साथ चलता है तो रास्ते अपने आप दिखाई देने लगते हैं। जब हमारा उद्देश्य स्पष्ट होता है तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी अपनी शक्ति खो देती हैं।
जोधपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य गज सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए पद्मजा कुमारी के प्रयासों की तारीफ की।

समिट को संबोधित करती पद्मजा कुमारी। उन्होंने बताया कि हम लोगों में इस बीमारी को लेकर फैले डर को निकालना चाहते हैं।
मेरी मां काफी स्ट्रॉन्ग थी , उन्हीं से ये पॉजिटीविटी आई है
इस कार्यक्रम से पूर्व बातचीत में उन्होंने कहा था- इस जागरूकता अभियान की शुरुआत पांच साल पहले हुई थी। मुझे 40 साल से टाइप 1 डायबिटीज है।
मुझे लगा कि आज के समय में सोशल मीडिया या दूसरे प्लेटफॉर्म इतना कुछ कर पा रहे है तो मुझे भी इस बारे में बताना होगा। सबसे बड़ी बात सभी को एक साथ लकार सही जानकारी लोगों तक पहुंचानी होगी।
वे बोलीं- मेरी मां काफी स्ट्रॉन्ग थी। इतनी पॉजिटिविटी मुझे उनकी वजह से आई है। मुझे एक भी भी महसूस नहीं करवाया कि मैं बीमार हूं। इसलिए इस बीमारी में जैसा मैंने दूसरों को देखा वो मैंने नहीं देखा।
यही कारण है कि मैं लोगों को बता पा रही हूं कि इस बीमारी से डरना नहीं है। ये बीमारी होने के बाद भी मेरी मां ने मुझे खेलेने, स्कूल जाने और पिकनिक पर जाने से कभी मना नहीं किया। ये ही आवाज में दूसरे बच्चों और उनके पेरेंट्स तक पहुंचाना चाहती हूं।
मैं जो आस-पास इस बीमारी को लेकर अफवाह सुन रही थी तो मैं बिना कुछ करे रह नहीं पा रही थी। ऐसे लगा कि मैं अभी नहीं करूंगी तो ऐसा बदलाव कब होगा। काफी लोग मुझसे जुड़े और उनका मोटिवेशन मेरीे साथ है।
कार्यक्रम में कहा- इस बीमारी को ताकत में बदलना है
शनिवार को कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा- यह सम्मेलन केवल बीमारी के बारे में नहीं है। एक कम्युनिटी के बारे में है, जिन्होंने न केवल टाइप-1 डायबिटीज को संभालना सीखा है बल्कि पूरी जिंदगी जीना और व्यक्तिगत चुनौती को सामूहिक बदलाव की ताकत में बदलना भी सीखा है।
उन्होंने कहा- साथ मिलकर हम ऐसा भविष्य बना रहे हैं, जहां टाइप 1 डायबिटीज के साथ जीवन जीने वाला हर व्यक्ति स्वयं को समझा हुआ, समर्थित और सशक्त महसूस करे।
उनके इस अभियान में ब्रेकथ्रू T1D और विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन भी काम कर रहे हैं।

जोधपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य गज सिंह ने पद्मजा कुमारी के अभियान की तारीफ की।
जोधपुर पूर्व राजपरिवार ने की तारीफ
कार्यक्रम के दौरान जोधपुर पूर्व राजपरिवार के गज सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने इस अभियान की तारीफ करते हुए कहा- ये प्रेरणादायक काम है। हम ऐसे प्रयासों को सहयोग देने के तरीके खोजेंगे। मुझे द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़ फाउंडेशन और राजकुमारी पद्मजा कुमारी परमार द्वारा किए जा रहे कार्यों पर गर्व है। यह समाज को वापस देने का एक सार्थक माध्यम है।
डॉ. सुनील सिंह, राज्य नोडल अधिकारी, राजस्थान ने सरकार से जुड़ी योजनाओं और इलाज की सुविधाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में नूपुर ललवानी, ज्योत्सना रंगीन, ब्लू सर्कल डायबिटीज फाउंडेशन से स्नेहल नडगावली, हर्ष कोहली (इम्पेशेंट नेटवर्क लीड और टाइप 1 डायबिटीज से जीवन जी रहे 13 वर्षीय बच्चे के पिता), प्रशांत मणि, रिद्धि मोदी और लक्ष्मी समेत कई लोग मौजूद थे।