मेरठ जिले की किठौर विधानसभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख ग्रामीण और मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों में शामिल है। Kithore Assembly Caste Equations की बात करें तो मुस्लिम, दलित, गुर्जर, त्यागी, जाट और ठाकुर मतदाता यहां चुनावी नतीजे को प्रभावित करने वाले प्रमुख सामाजिक समूह माने जाते हैं। इनके साथ ब्राह्मण और दूसरे पिछड़े वर्गों के मतदाता भी करीबी मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार किठौर विधानसभा में कुल 3,22,769 मतदाता हैं। इनमें 1,77,334 पुरुष, 1,45,419 महिला और 16 अन्य मतदाता शामिल हैं। विधानसभा क्षेत्र में 413 मतदान स्थल निर्धारित किए गए हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 आने वाले समय में राज्य की राजनीति को एक नई दिशा प्रदान करने वाला साबित होगा।
किठौर का हालिया चुनावी इतिहास समाजवादी पार्टी के शाहिद मंजूर और भाजपा के सत्यवीर त्यागी के बीच सीधे मुकाबले की कहानी रहा है। 2017 में सत्यवीर त्यागी ने शाहिद मंजूर की लगातार जीत का सिलसिला रोकते हुए भाजपा को सीट दिलाई थी। 2022 में शाहिद मंजूर ने केवल 2,180 वोट से सीट वापस जीत ली। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में किठौर विधानसभा सेगमेंट से सपा ने भाजपा पर 16,737 वोट की बढ़त बनाई। इससे संकेत मिलता है कि सीट पर सपा का सामाजिक आधार मजबूत है, लेकिन 2022 का मामूली अंतर भाजपा को भी मुकाबले से बाहर नहीं होने देता।
किठौर विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा क्षेत्र | किठौर |
| विधानसभा संख्या | 46 |
| जिला | मेरठ |
| लोकसभा क्षेत्र | मेरठ |
| आरक्षण | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | शाहिद मंजूर |
| राजनीतिक दल | समाजवादी पार्टी |
| 2022 जीत का अंतर | 2,180 वोट |
| 2026 कुल मतदाता | 3,22,769 |
| पुरुष मतदाता | 1,77,334 |
| महिला मतदाता | 1,45,419 |
| अन्य मतदाता | 16 |
| मतदान स्थल | 413 |
| प्रमुख सामाजिक समूह | मुस्लिम, दलित, गुर्जर, त्यागी, जाट और ठाकुर |
| क्षेत्रीय स्वरूप | मुख्य रूप से ग्रामीण |
| प्रमुख मुद्दे | गन्ना, कृषि, रोजगार, सड़क, बिजली, सिंचाई और ग्रामीण विकास |
किठौर सामान्य विधानसभा सीट है और मेरठ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसके अंतर्गत किठौर नगर पंचायत के साथ खरखौदा, माछरा, रजपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाके आते हैं। वर्तमान विधायक शाहिद मंजूर समाजवादी पार्टी से हैं और 2022 में चौथी बार विधायक चुने गए थे।
Kithore Assembly Caste Equations के पुराने चुनावी आकलनों में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा सामाजिक समूह बताए जाते रहे हैं। अलग-अलग पुराने अनुमानों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 70 हजार से सवा लाख तक बताई गई है। इसी तरह गुर्जर मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 35 से 42 हजार और त्यागी मतदाताओं का अनुमान लगभग 18 से 30 हजार के बीच मिलता है।
एक पुराने विस्तृत आकलन में करीब 72 हजार दलित और 28 हजार ठाकुर मतदाताओं का अनुमान भी दिया गया था। जाट मतदाताओं को भी सीट के प्रमुख वोट बैंक में शामिल किया जाता है, हालांकि उनकी संख्या को लेकर उपलब्ध पुराने आकलन एक समान नहीं हैं।
किठौर विधानसभा का पुराना अनुमानित जातीय प्रभाव
| सामाजिक समूह | पुराने चुनावी आकलनों में स्थिति |
|---|---|
| मुस्लिम | करीब 70 हजार से 1.25 लाख |
| अनुसूचित जाति/दलित | एक पुराने अनुमान में करीब 72 हजार |
| गुर्जर | करीब 35 हजार से 42 हजार |
| त्यागी | करीब 18 हजार से 30 हजार |
| ठाकुर | एक पुराने अनुमान में करीब 28 हजार |
| जाट | प्रमुख ग्रामीण एवं किसान समुदाय |
| ब्राह्मण | एक पुराने अनुमान में करीब 12 हजार |
| अन्य OBC समुदाय | बूथ स्तर पर महत्वपूर्ण |
महत्वपूर्ण नोट: ये आंकड़े 2022 से पहले के अलग-अलग चुनावी अनुमानों पर आधारित हैं। इनमें काफी अंतर है और इन्हें 2026 की आधिकारिक जातिवार मतदाता संख्या नहीं माना जा सकता। विधानसभा स्तर पर जाति और धर्म के अनुसार वर्तमान मतदाता सूची प्रकाशित नहीं होती। नई SIR सूची के बाद पुराने अनुमानों को केवल सामाजिक संरचना समझने के संदर्भ के रूप में देखना चाहिए।
2026 में किठौर विधानसभा में 3,22,769 मतदाता
10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में किठौर विधानसभा के 3,22,769 मतदाता दर्ज हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,77,334 और महिला मतदाताओं की संख्या 1,45,419 है। अन्य श्रेणी में 16 मतदाता पंजीकृत हैं। किठौर मतदाता संख्या के आधार पर मेरठ दक्षिण के बाद जिले की दूसरी सबसे बड़ी विधानसभा बन गई है।
| मतदाता वर्ग | 2026 मतदाता |
|---|---|
| पुरुष | 1,77,334 |
| महिला | 1,45,419 |
| अन्य | 16 |
| कुल मतदाता | 3,22,769 |
| मतदान स्थल | 413 |
2024 लोकसभा चुनाव के समय किठौर विधानसभा में कुल 3,70,320 मतदाता दर्ज थे। इनमें सामान्य श्रेणी के 3,68,872 और सर्विस मतदाताओं सहित अंतिम संख्या 3,70,320 थी। 2026 की अंतिम सूची की तुलना 2024 से करें तो मतदाता संख्या में 47,551 की कमी दिखाई देती है, जो करीब 12.84 प्रतिशत बैठती है।
| वर्ष | कुल मतदाता |
|---|---|
| 2012 | 3,03,089 |
| 2017 | 3,38,755 |
| 2024 लोकसभा | 3,70,320 |
| 2026 अंतिम सूची | 3,22,769 |
| 2024 से अंतर | 47,551 कम |
यह अंतर सीधे किसी जाति, धर्म या राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा जा सकता। उपलब्ध आंकड़े सिर्फ कुल मतदाता संख्या बताते हैं। बूथ और समुदायवार आधिकारिक विवरण के बिना यह दावा करना उचित नहीं होगा कि सूची में बदलाव से किस दल को लाभ या नुकसान हुआ है।
मुस्लिम मतदाता किठौर में कितने निर्णायक?
किठौर को मुस्लिम प्रभाव वाली विधानसभा सीट माना जाता है। शाहिद मंजूर और उनके परिवार की लंबी राजनीतिक मौजूदगी भी इस सामाजिक आधार से जुड़ी रही है। शाहिद मंजूर ने 2002, 2007, 2012 और 2022 में सीट जीती, जबकि उनके पिता मंजूर अहमद भी किठौर से विधायक रह चुके थे।
लेकिन चुनावी परिणाम बताते हैं कि सिर्फ मुस्लिम वोटों के आधार पर सीट जीतना संभव नहीं है। 2017 में शाहिद मंजूर को 79,800 वोट मिले, लेकिन भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने 90,622 वोट हासिल कर उन्हें 10,822 वोट से हरा दिया था। बसपा को भी उस चुनाव में 62,503 वोट मिले थे। इससे साफ है कि मुस्लिम और दलित मतों के विभाजन के साथ गैर-मुस्लिम सामाजिक समूहों का एकीकरण भाजपा के पक्ष में गया।
2022 में शाहिद मंजूर ने 1,07,104 वोट हासिल किए और सीट वापस जीत ली। हालांकि भाजपा उनसे केवल 2,180 वोट पीछे रही। मुस्लिम वोटों के बड़े हिस्से के साथ दलित, गुर्जर, जाट या दूसरे समुदायों का सीमित अतिरिक्त समर्थन ही इस करीबी जीत के लिए जरूरी रहा होगा। यह उपलब्ध नतीजों पर आधारित राजनीतिक संकेत है, आधिकारिक समुदायवार मतदान आंकड़ा नहीं।
दलित वोट भाजपा-सपा-बसपा तीनों के लिए महत्वपूर्ण
पुराने चुनावी अनुमान में किठौर के दलित मतदाताओं की संख्या करीब 72 हजार तक बताई गई थी। यह संख्या आधिकारिक नहीं है, लेकिन 2017 और 2022 के परिणाम दलित वोट की बड़ी राजनीतिक भूमिका जरूर दिखाते हैं।
2017 में बसपा ने 62,503 वोट हासिल किए थे और उसका वोट शेयर करीब 25.7 प्रतिशत रहा। 2022 में बसपा के वोट घटकर 31,213 और वोट शेयर लगभग 12.3 प्रतिशत रह गया। इसी चुनाव में सपा के वोट 79,800 से बढ़कर 1,07,104 हो गए, जबकि भाजपा के वोट भी 90,622 से बढ़कर 1,04,924 पहुंच गए।
| चुनाव | बसपा वोट | बसपा वोट शेयर |
|---|---|---|
| 2017 | 62,503 | लगभग 25.7% |
| 2022 | 31,213 | लगभग 12.3% |
बसपा के वोटों में आई करीब 31 हजार की गिरावट ने भाजपा और सपा दोनों के लिए अवसर बनाया। 2027 में बसपा अपना दलित आधार कितना वापस हासिल करती है, यह किठौर के मुख्य मुकाबले पर सीधा असर डाल सकता है।
यदि दलित वोटों का बड़ा हिस्सा बसपा के साथ रहता है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। यह वोट भाजपा या सपा की ओर जाता है तो 2022 का सिर्फ 2,180 वोट का अंतर आसानी से बदल सकता है।
गुर्जर मतदाता सीट का बड़ा स्विंग फैक्टर
किठौर में गुर्जर मतदाताओं की पुरानी अनुमानित संख्या 35 से 42 हजार के बीच बताई गई है। 2022 में कांग्रेस ने गुर्जर प्रत्याशी और बसपा ने भी गुर्जर सामाजिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। इससे गुर्जर वोटों के भीतर कई स्तरों पर मुकाबला बना था।
गुर्जर मतदाता ग्रामीण पंचायत राजनीति, खेती और स्थानीय सामाजिक नेटवर्क में प्रभाव रखते हैं। भाजपा के लिए गुर्जर वोट को त्यागी, ठाकुर और दूसरे गैर-मुस्लिम समूहों के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण है। सपा मुस्लिम मतदाताओं के बड़े आधार के साथ गुर्जर समर्थन का हिस्सा हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।
2022 में सिर्फ 2,180 वोट से परिणाम तय हुआ था। ऐसे मुकाबले में गुर्जर समाज के भीतर दो से तीन हजार वोटों का बदलाव भी सीट का विजेता बदल सकता है।
त्यागी मतदाता भाजपा के मजबूत आधारों में शामिल
किठौर के पुराने सामाजिक आकलनों में त्यागी मतदाताओं की संख्या लगभग 18 से 30 हजार के बीच बताई गई है। 2017 और 2022 में भाजपा ने सत्यवीर त्यागी को प्रत्याशी बनाया था। 2017 में उन्होंने सीट जीती और 2022 में हार के बावजूद 1,04,924 वोट हासिल किए।
त्यागी मतदाताओं के साथ भाजपा को ठाकुर, ब्राह्मण, दलित और दूसरे गैर-यादव OBC समुदायों का समर्थन मिलने पर मजबूत सामाजिक गठबंधन तैयार होता है।
हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में मेरठ सीट से बसपा ने भी त्यागी उम्मीदवार उतारा था। किठौर जैसे क्षेत्र में प्रत्याशी की जातीय पहचान गैर-मुस्लिम वोटों के विभाजन को प्रभावित कर सकती है। 2027 में भाजपा का उम्मीदवार सत्यवीर त्यागी रहते हैं या पार्टी नया चेहरा लाती है, इससे त्यागी वोटों के हस्तांतरण की परीक्षा होगी। अभी उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
जाट और किसान वोट की भूमिका
किठौर विधानसभा मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है। पुराने जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में इसकी करीब 90.7 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 9.3 प्रतिशत शहरी बताई गई थी। इसलिए जातीय पहचान के साथ किसान मुद्दे भी चुनावी व्यवहार पर बड़ा असर डालते हैं।
| क्षेत्रीय स्वरूप | पुराना अनुमान |
|---|---|
| ग्रामीण | 90.7% |
| शहरी | 9.3% |
जाट मतदाता गन्ना खेती, किसान संगठनों और ग्राम पंचायतों में प्रभावशाली माने जाते हैं। गन्ना मूल्य एवं भुगतान, सिंचाई, ग्रामीण बिजली, खाद-बीज, आवारा पशु, फसल खरीद और सड़कों जैसे मुद्दे जाटों के साथ मुस्लिम, गुर्जर, त्यागी और दलित किसान परिवारों को भी प्रभावित करते हैं।
2022 में सपा और रालोद साथ थे, जिससे जाट और मुस्लिम मतों के बीच राजनीतिक तालमेल की संभावना बढ़ी थी। भविष्य में गठबंधन की स्थिति और उम्मीदवार चयन जाट मतदाताओं की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
ठाकुर और ब्राह्मण वोटों की भूमिका
एक पुराने चुनावी आकलन में किठौर में करीब 28 हजार ठाकुर और 12 हजार ब्राह्मण मतदाता बताए गए थे। ये संख्या आधिकारिक नहीं है, लेकिन भाजपा के व्यापक गैर-मुस्लिम सामाजिक गठबंधन में दोनों समुदाय महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
2017 में भाजपा की जीत और 2022 में उसके एक लाख से अधिक वोट यह दिखाते हैं कि पार्टी का आधार केवल त्यागी मतदाताओं तक सीमित नहीं रहा। ठाकुर, ब्राह्मण, गुर्जर, दलित और दूसरे समुदायों में समर्थन के बिना इतनी बड़ी संख्या तक पहुंचना कठिन होता।
सपा के लिए मुस्लिम मतदाताओं के साथ इन समुदायों का छोटा हिस्सा जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। करीबी मुकाबले में दो या तीन प्रतिशत अतिरिक्त मत निर्णायक हो सकते हैं।
2022 में सिर्फ 2,180 वोट से जीते शाहिद मंजूर
2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के शाहिद मंजूर को 1,07,104 वोट और 42.19 प्रतिशत वोट शेयर मिला। भाजपा के सत्यवीर त्यागी को 1,04,924 वोट और 41.33 प्रतिशत मत मिले। बसपा के कुशल पाल मावी 31,213 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। शाहिद मंजूर ने सिर्फ 2,180 वोट से चुनाव जीता।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| शाहिद मंजूर | समाजवादी पार्टी | 1,07,104 | 42.19% |
| सत्यवीर त्यागी | भाजपा | 1,04,924 | 41.33% |
| कुशल पाल मावी | बसपा | 31,213 | 12.29% |
| तस्लीम अहमद | AIMIM | 4,833 | 1.90% |
| बबीता गुर्जर | कांग्रेस | 1,589 | 0.63% |
| NOTA | — | 912 | 0.36% |
| जीत का अंतर | — | 2,180 | 0.86% |
यह परिणाम किठौर को मेरठ जिले की सबसे करीबी सीटों में रखता है। सपा और भाजपा के संयुक्त वोट शेयर में एक प्रतिशत से भी कम अंतर था। बसपा और AIMIM के वोट मुख्य मुकाबले की जीत के अंतर से कई गुना अधिक थे।
2017 में भाजपा ने रोका था सपा का विजय रथ
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने 90,622 वोट हासिल किए थे। सपा के शाहिद मंजूर को 79,800 और बसपा के गजराज सिंह को 62,503 वोट मिले। भाजपा ने यह चुनाव 10,822 वोट के अंतर से जीता था।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| सत्यवीर त्यागी | भाजपा | 90,622 | 37.31% |
| शाहिद मंजूर | सपा | 79,800 | 32.86% |
| गजराज सिंह | बसपा | 62,503 | 25.73% |
| मतलूब गौड़ | रालोद | 6,598 | 2.72% |
| NOTA | — | 1,224 | 0.51% |
| जीत का अंतर | — | 10,822 | 4.45% |
इस चुनाव में सपा और बसपा अलग-अलग मजबूत स्थिति में थीं। भाजपा विरोधी वोटों का विभाजन सत्यवीर त्यागी की जीत में महत्वपूर्ण रहा।
2012 में शाहिद मंजूर ने 11,106 वोट से जीती सीट
2012 विधानसभा चुनाव में शाहिद मंजूर को 73,015 वोट मिले थे। बसपा के लखी राम नागर ने 61,909 और रालोद के सत्यवीर त्यागी ने 34,791 वोट हासिल किए। सपा ने यह चुनाव 11,106 वोट से जीता था।
| चुनाव | विजेता | पार्टी | विजेता के वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2012 | शाहिद मंजूर | सपा | 73,015 | 11,106 |
| 2017 | सत्यवीर त्यागी | भाजपा | 90,622 | 10,822 |
| 2022 | शाहिद मंजूर | सपा | 1,07,104 | 2,180 |
तीनों चुनावों में जीत का अंतर 11 हजार से नीचे रहा है। 2022 में यह घटकर सिर्फ 2,180 वोट रह गया। यानी किठौर लंबे समय से प्रतिस्पर्धी सीट है।
मंजूर परिवार का लंबे समय तक रहा प्रभाव
किठौर के राजनीतिक इतिहास में मंजूर परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंजूर अहमद ने 1967 और 1969 में जीत दर्ज की थी। शाहिद मंजूर ने 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन चुनाव जीते। 2017 में वह भाजपा से हार गए, लेकिन 2022 में चौथी बार विधायक बने।
| चुनाव वर्ष | विजेता | पार्टी |
|---|---|---|
| 2002 | शाहिद मंजूर | समाजवादी पार्टी |
| 2007 | शाहिद मंजूर | समाजवादी पार्टी |
| 2012 | शाहिद मंजूर | समाजवादी पार्टी |
| 2017 | सत्यवीर त्यागी | भाजपा |
| 2022 | शाहिद मंजूर | समाजवादी पार्टी |
शाहिद मंजूर की व्यक्तिगत पकड़ सपा के संगठनात्मक आधार को मजबूती देती है। हालांकि 2022 का बेहद करीबी परिणाम बताता है कि व्यक्तिगत प्रभाव के बावजूद भाजपा का सामाजिक गठबंधन लगभग बराबरी पर मौजूद है।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा को 16,737 वोट की बढ़त
2024 लोकसभा चुनाव में किठौर विधानसभा सेगमेंट से सपा प्रत्याशी को 1,10,315 वोट, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 93,578 वोट मिले। सपा ने किठौर से 16,737 वोट की बढ़त बनाई।
| 2024 लोकसभा: किठौर सेगमेंट | वोट |
|---|---|
| समाजवादी पार्टी | 1,10,315 |
| भाजपा | 93,578 |
| सपा की बढ़त | 16,737 |
2024 में किठौर में कुल 3,70,320 पंजीकृत मतदाताओं में से 2,28,238 ने मतदान किया। मतदान प्रतिशत करीब 61.63 रहा।
2022 और 2024 के आंकड़े क्या बताते हैं?
| चुनाव | सपा वोट | भाजपा वोट | अंतर |
|---|---|---|---|
| विधानसभा 2022 | 1,07,104 | 1,04,924 | सपा +2,180 |
| लोकसभा 2024 | 1,10,315 | 93,578 | सपा +16,737 |
सपा का वोट 2022 के मुकाबले 2024 में करीब तीन हजार बढ़ा, जबकि भाजपा के वोट में 11 हजार से अधिक की गिरावट दिखाई दी। हालांकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के प्रत्याशी, मुद्दे और मतदान प्रतिशत अलग थे। इसलिए 2024 की बढ़त को 2027 का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
फिर भी दोनों चुनावों में सपा का आगे रहना पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। भाजपा के लिए चुनौती अपने 2022 के एक लाख से अधिक वोट वाले सामाजिक आधार को दोबारा संगठित करने की होगी।
सपा के लिए जीत का सामाजिक रास्ता
सपा के लिए मुस्लिम मतदाता सबसे मजबूत शुरुआती आधार हैं। इसके साथ दलित, गुर्जर, जाट और दूसरे पिछड़े समुदायों का समर्थन पार्टी को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।
शाहिद मंजूर का व्यक्तिगत नेटवर्क भी पार्टी के पक्ष में है। 2002 से अब तक चार विधानसभा जीत इस बात का संकेत हैं कि उनकी पकड़ केवल पार्टी के पारंपरिक वोट तक सीमित नहीं रही।
लेकिन 2022 में जीत सिर्फ 2,180 वोट की थी। इसलिए सपा को बसपा या दूसरे दलों की ओर जाने वाले दलित और मुस्लिम मतों के विभाजन से सावधान रहना होगा।
भाजपा के लिए सीट वापस जीतने का गणित
भाजपा ने 2017 में सीट जीती और 2022 में 1,04,924 वोट हासिल किए। उसका वोट सपा से केवल 0.86 प्रतिशत कम था।
पार्टी के लिए त्यागी, ठाकुर, ब्राह्मण, गुर्जर, दलित और दूसरे गैर-मुस्लिम समुदायों का व्यापक एकीकरण जरूरी होगा। मुस्लिम मतों में सीमित समर्थन या विपक्षी वोटों का विभाजन भाजपा की स्थिति मजबूत कर सकता है।
2024 में किठौर से 16 हजार से अधिक वोट से पिछड़ना पार्टी के लिए चेतावनी है। नया प्रत्याशी, स्थानीय संगठन और 2026 की बदली हुई मतदाता सूची भाजपा की रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
बसपा फिर बना सकती है त्रिकोणीय मुकाबला
बसपा ने 2017 में 62,503 वोट हासिल किए थे, लेकिन 2022 में उसका वोट घटकर 31,213 रह गया। इसके बावजूद यह संख्या सपा की जीत के अंतर से 14 गुना से अधिक थी।
अगर बसपा अपने दलित आधार के साथ मुस्लिम या गुर्जर मतदाताओं का कुछ हिस्सा जोड़ती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।
बसपा का वोट और कमजोर होने पर यह तय करना मुश्किल होगा कि उसके मतदाता भाजपा या सपा में किस तरफ ज्यादा जाएंगे। यही किठौर का सबसे बड़ा स्विंग फैक्टर बन सकता है।
2026 SIR के बाद बदल गया बूथ गणित
2024 में किठौर में 3,70,320 मतदाता थे, जबकि 2026 की अंतिम सूची में संख्या 3,22,769 रह गई है। यह अंतर पिछले विधानसभा चुनाव की जीत के अंतर से करीब 22 गुना बड़ा है।
मतदाता संख्या में बदलाव का अर्थ किसी पार्टी की निश्चित जीत या हार नहीं है। हटे और जुड़े नामों का बूथ तथा समुदायवार आधिकारिक विश्लेषण उपलब्ध नहीं है।
लेकिन इतना तय है कि 2022 की मतदाता संपर्क सूची, बूथ कमेटी और जातीय गणित को 2027 में सीधे लागू नहीं किया जा सकता। सभी दलों को नई सूची के आधार पर मतदाताओं का दोबारा सत्यापन करना होगा।
2027 में इन आठ समीकरणों पर रहेगी नजर
2027 के विधानसभा चुनाव में किठौर का परिणाम आठ प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक सवालों से प्रभावित हो सकता है।
पहला सवाल मुस्लिम मतों की एकजुटता का होगा। सपा अपने सबसे बड़े सामाजिक आधार को बनाए रखती है या बसपा, AIMIM और दूसरे प्रत्याशी इसमें सेंध लगाते हैं, इससे मुख्य मुकाबला प्रभावित होगा।
दूसरा, दलित मतदाताओं का रुख होगा। 2017 के मुकाबले 2022 में बसपा का वोट लगभग आधा हो गया था। यह वोट किस तरफ जाता है, वही सीट का संतुलन बदल सकता है।
तीसरा, गुर्जर मतदाता होंगे। पुराने 35 से 42 हजार के अनुमान वाला यह समूह भाजपा और सपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
चौथा, त्यागी वोट होगा। भाजपा की 2017 की जीत और 2022 के मजबूत प्रदर्शन में इस समुदाय की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही।
पांचवां, जाट और किसान मतदाता होंगे। गन्ना, खेती और ग्रामीण मुद्दे पार्टी आधारित मतदान को प्रभावित कर सकते हैं।
छठा, ठाकुर, ब्राह्मण और दूसरे गैर-मुस्लिम समुदायों का संयुक्त रुख होगा। भाजपा इस आधार को संगठित रखना चाहेगी, जबकि सपा इसमें सीमित सेंध भी निर्णायक मानकर चलेगी।
सातवां, प्रत्याशी चयन होगा। शाहिद मंजूर और सत्यवीर त्यागी के बीच पिछले दो चुनावों के सीधे मुकाबले ने सीट को व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई का स्वरूप भी दिया है।
आठवां और सबसे नया फैक्टर 2026 की 3,22,769 मतदाताओं वाली अंतिम सूची है। 2024 के मुकाबले करीब 47,551 कम मतदाताओं के कारण हर पार्टी को बूथवार समीकरण नए सिरे से तैयार करना होगा।
2012 में सपा की 11,106 वोट की जीत, 2017 में भाजपा की 10,822 वोट की बढ़त, 2022 में सपा की सिर्फ 2,180 वोट की विजय और 2024 लोकसभा चुनाव में सपा की 16,737 वोट की बढ़त किठौर की प्रतिस्पर्धी राजनीति को दिखाती है। सपा के पास मौजूदा विधायक और 2024 की बढ़त है, जबकि भाजपा के पास 2017 की जीत तथा 2022 में लगभग बराबरी का मजबूत आधार मौजूद है।
उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विस्तृत कवरेज पढ़ी जा सकती है।
प्रत्याशियों, टिकट वितरण, गठबंधन और सीटवार चुनावी गतिविधियों से जुड़े अपडेट के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज पढ़ें।
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