भगवान शिव और माता पार्वती की अनोखी चौसर खेल: जब खेल-खेल में हुआ बड़ा विवाद - Haribhoomi

Published on 31 जुल॰ 2026

भगवान शिव और माता पार्वती की अनोखी चौसर खेल: जब खेल-खेल में हुआ बड़ा विवाद

भगवान शिव और माता पार्वती के चौसर (पासे) खेलने की यह पौराणिक कथा बहुत रोचक है। जानिए कैसे इस खेल में एक साधारण मजाक बड़ा विवाद बन गया।

Lord Shiva and Mata Parvati story

भगवान शिव और माता पार्वती के चौसर (पासे) खेलने की पौराणिक कथा। (Ai Image)

  • Published: 31 Jul 2026, 04:28 PM IST
  • Last Updated: 31 Jul 2026, 04:28 PM IST

Lord Shiva and Mata Parvati story: पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती शांत वातावरण में चौसर (पासा) खेल रहे थे। उनके साथ उनके सेवक नंदी भी वहीं मौजूद थे। खेल के दौरान दोनों के बीच हंसी-मजाक और नोकझोंक चल रही थी। खेल आगे बढ़ा तो दोनों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि इस दौर का विजेता कौन है।

माता पार्वती का कहना था कि उनकी चाल सही थी और वे जीत चुकी हैं, जबकि भगवान शिव का दावा था कि जीत उनकी हुई है। दोनों अपनी-अपनी जीत पर अड़ गए और बात इतनी बढ़ गई कि बीच-बचाव के लिए किसी गवाह की जरूरत आन पड़ी।

नंदी की गवाही और माता पार्वती का गुस्सा
जब विवाद ज्यादा बढ़ा, तो भगवान शिव ने अपने प्रिय सेवक नंदी से पूछा कि बताओ इस खेल में किसकी जीत हुई है। नंदी भगवान शिव के प्रति बहुत समर्पित थे, इसलिए उन्होंने बिना किसी संकोच के शिवजी के पक्ष में गवाही दे दी और कहा कि विजेता भोलेनाथ हैं।

जबकि सच्चाई यह थी कि उस दौर में माता पार्वती जीती थीं। नंदी का यह पक्षपातपूर्ण उत्तर सुनकर माता पार्वती बेहद क्रोधित हो गईं। उन्हें लगा कि नंदी ने भगवान शिव के डर या उनके प्रति निष्ठा के कारण झूठ बोला है। गुस्से में आकर माता पार्वती ने नंदी को श्राप दे दिया कि जाओ, तुम्हें अपनी इस बेईमानी और पक्षपात के कारण पृथ्वी पर जाना पड़ेगा और तुम्हें बैल बनकर कष्ट सहना होगा।

माता पार्वती की परीक्षा और प्रायश्चित
श्राप मिलते ही नंदी भयभीत होकर क्षमा मांगने लगे। जब माता पार्वती का गुस्सा शांत हुआ, तो उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने नंदी से कहा कि प्रदोष काल में तुम्हारी यह पीड़ा दूर होगी। इसके बाद, भगवान शिव और माता पार्वती के बीच का यह विवाद शांत हुआ और उन्होंने इस खेल के जरिए यह सीख दी कि न्याय के समय पक्षपात नहीं करना चाहिए, चाहे सामने कोई भी हो।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पौराणिक ग्रंथों और सनातन संस्कृति की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक नैतिक और धार्मिक मूल्य पहुंचाना है।