सऊदी-पाक-तुर्की के साथ क्या इस्लामिक NATO में शामिल होगा बांग्लादेश? भारत की बढ़ी टेंशन

Published on 21 अग॰ 2026

सऊदी-पाक-तुर्की के साथ क्या इस्लामिक NATO में शामिल होगा बांग्लादेश? भारत की बढ़ी टेंशन

मक्का समझौता और तारिक रहमान.

बांग्लादेश सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की को शामिल करते हुए एक रीजनल इकोनॉमिक या डिफेंस फ्रेमवर्क में शामिल होने पर विचार कर रहा है, जिससे रीजनल अलायंस के लिए ढाका के अप्रोच में संभावित बदलाव का संकेत मिलता है. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहाकार हुमायूं कबीर ने बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) को बताया कि सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी पर चल रही है, जिसमें राष्ट्रीय हित उसकी विदेश नीति के केंद्र में है.

कबीर ने कहा, सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी पर चल रही है सरकार इंटरनेशनल लेवल पर एक बैलेंस्ड फॉरेन पॉलिसी पर चल रही है, जिसमें नेशनल इंटरेस्ट उसके सेंटर में है.

ढाका ने मक्का पैक्ट में दिखाई दिलचस्पी

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने इस महीने की शुरुआत में मक्का में एक जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन किए. इस पैक्ट पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के प्रेसिडेंट तैयप एर्दोगन और पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर शहबाज शरीफ ने साइन किए.

इस एग्रीमेंट में कलेक्टिव सिक्योरिटी को मजबूत करने और रीजन और उसके बाहर शांति और स्टेबिलिटी को बढ़ावा देने का कमिटमेंट शामिल है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हथियारबंद हमला सभी पर हमला माना जाएगा.

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश का भी ऐसे ही फ्रेमवर्क में शामिल होने को लेकर पॉजिटिव नजरिया है. उन्होंने BSS को बताया, “बांग्लादेश सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की को शामिल करते हुए एक इकोनॉमिक या डिफेंस फ्रेमवर्क में शामिल होने की संभावना को लेकर पॉजिटिव नजरिया रखता है, जिसमें उसके अपने फायदे और ग्लोबल इकॉनमी और ट्रेड के बदलते डायनामिक्स को ध्यान में रखा गया है.”

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर संभावित असर

यह डेवलपमेंट नई दिल्ली का ध्यान खींच सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि हाल ही में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आया है. साथ ही, दोनों पक्ष आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

कबीर ने यह भी कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस के बुलावे पर रहमान का रियाद दौरा गर्मियों के तुरंत बाद फाइनल होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ट्रेड और लोगों से लोगों के बीच कनेक्टिविटी के जरिए पाकिस्तान के साथ अपने आपसी रिश्तों को मजबूत कर रहा है.

‘इस्लामिक NATO’ की ओर झुका बांग्लादेश

मक्का समझौते को कुछ विश्लेषकों ने “इस्लामिक NATO” बताया है. पाकिस्तान और तुर्की ने समुद्री रक्षा सहयोग पर बातचीत का भी समर्थन किया है, जबकि सऊदी अरब ने क्षेत्रीय शिपिंग और एनर्जी रूट की सुरक्षा के प्लान की घोषणा की है

अगर बांग्लादेश आखिरकार इस फ्रेमवर्क में शामिल होता है, तो इसका असर रक्षा से परे समुद्री क्षेत्र में भी हो सकता है. भारत के लिए, ढाका, इस्लामाबाद और अंकारा के बीच करीबी रक्षा संबंध उसकी पड़ोस नीति में एक और मुश्किल जोड़ सकते हैं, खासकर यह देखते हुए कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश में नेटवर्क बनाने की पिछली कोशिशों को नई दिल्ली ने सुरक्षा चिंताओं से जोड़ा है.

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अजय विद्यार्थी

अजय विद्यार्थी

कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन. प्रभात खबर में बतौर सीनियर न्यूज़ एडिटर काम किया. ग्राउंड रिपोर्टिंग और एडिटिंग में करीब 20 सालों से ज्यादा का अनुभव. राजस्थान पत्रिका में चीफ रिपोर्टर रहने के दौरान कई ऐसी स्टोरी की, जिन्हें सराहा गया.

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