National Boyfriend Day: सालों से आपने वैलेंटाइन डे, प्रपोज डे, प्रॉमिस डे को सेलिब्रेट किया होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि 3 अक्टूबर को नेशनल बॉयफ्रेंड डे मनाया जाता है. आज के दिन सोशल मीडिया कपल्स की खूबसूरत तस्वीरों, महंगे गिफ्ट्स और लंबे-चौड़े लव नोट्स से भरा रहता है. लेकिन क्या एक बेहतरीन पार्टनर होने का मतलब सिर्फ मूवी डेट, सरप्राइज गिफ्ट्स या सोशल मीडिया पर रिलेशनशिप फ्लॉन्ट करना है? अगर प्यार का मतलब सिर्फ इतना ही है, तो इतिहास के पन्नों में दर्ज 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी के डेडिकेशन को हम क्या नाम देंगे?
जब पत्नी के प्यार में एक इंसान ने तोड़ दिया पहाड़
बिहार के गया के गहलौर गांव के रहने वाले दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी की याद में एक ऐसा बार सेट कर दिया जिसे तोड़ना लगभग नामुमकिन है. दरअसल, पहाड़ की वजह से उनके गांव और आसपास के इलाकों के लोगों को अस्पताल तक पहुंचने के लिए काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ता था और इस वजह से कई लोग अपने परिजनों से हमेशा के लिए दूर हो जाते थे. इसी वजह से मांझी की पत्नी को भी समय पर इलाज नहीं मिला था और उनकी मौत हो गई थी. उसके बाद मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का फैसला किया.
यही वजह है कि दशरथ मांझी की कहानी आज भी यह सवाल पूछती है कि आखिर किसी रिश्ते को निभाने के लिए हमारे भीतर कितना धैर्य होना चाहिए?
इसी सवाल को आज के रिश्तों के संदर्भ में समझने के लिए हमने झारखंड के झालसा के एक्सपर्ट मेडिएटर निर्मल रंजन से बात की.

एक्सपर्ट मेडिएटर निर्मल रंजन ने कहा, “दशरथ मांझी एक अडिग इंसान थे. उन्होंने जो ठान लिया, उसे पूरा करके दिखाया...आज के रिश्तों में इसके बिल्कुल उलट तस्वीर देखने को मिलती है. कई बार सुबह किसी बात को लेकर मन में खटास आती है और दोपहर तक रिश्ता खत्म करने की बात होने लगती है.”
हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके लिए सिर्फ लड़के या लड़की को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, रिश्ते को निभाने की जिम्मेदारी दोनों की बराबर होती है.
'माउंटेन मैन' से आज की पीढ़ी के लिए रिश्ते की असली सीख
एक तरफ आज के डिजिटल दौर में कुछ घंटों तक मेसेज का रिप्लाई न आने या समय पर विश करना भूल जाने जैसी छोटी बातों पर भी कई बार कपल्स के बीच नाराजगी शुरू हो जाती है. दूसरी तरफ, दशरथ मांझी ने बिना किसी शिकायत के 22 साल तक पत्थर काटकर यह साबित किया कि प्यार अगर सच्चा हो तो पार्टनर के गुजर जाने के बाद भी डेडिकेशन कम नहीं होता.
इसे लेकर एक्सपर्ट मेडिएटर निर्मल रंजन ने कहा कि जेन-जी को दशरथ मांझी की जिंदगी से धैर्य और अटूट प्रयास सीखने की जरूरत है. इसे समझाते हुए उन्होंने कहा, "एक बच्चा पढ़ाई शुरू करके आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनता है, तो उसके पीछे वर्षों का धैर्य और निरंतर प्रयास होता है. यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है. हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन थोड़ी सी बात को लेकर रिश्ता तोड़ लेना समाधान नहीं है.”

मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहना
मांझी की कहानी हमें सिखाती है कि प्यार सिर्फ अच्छे पलों का साथी नहीं है. असली प्यार वह है जो सबसे गहरे संकट और मुश्किल वक्त में ढाल बनकर खड़ा रहे, और समाधान निकालने के लिए किसी भी हद तक चला जाए.
कुल मिलाकर नेशनल बॉयफ्रेंड डे सिर्फ कपल्स की तस्वीरें शेयर करने या एक-दूसरे को गिफ्ट देने का दिन नहीं है. यह मौका है थोड़ा ठहरकर सोचने का कि हम अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: पार्टनर छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता है? बात बिगड़ने से पहले अपनाएं ये 5 तरीके, रिसर्च से जानें