राहुल गांधी बोले- MP में 1 लाख शिक्षक पद खाली: 28 हजार पद बढ़ाने CM को लिखा पत्र; मंत्री टेटवाल बोले- राहुल अनगाइडेड मिसाइल हैं - Bhopal News
Published on 5 अक्टू॰ 2026
भोपाल4 घंटे पहले
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राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को शिक्षक भर्ती को लेकर पत्र लिखा।
मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी 46 दिनों से भोपाल में आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि 1 लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली हैं, लेकिन शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-3 के 13,089 और वर्ग-2 के 10,800 पद ही निकाले गए।
राहुल ने वर्ग-2 में हर विषय के 3 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग की। उन्होंने आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के नोटिस वापस लेने और दूसरे चरण की काउंसलिंग जल्द शुरू करने को भी कहा।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल से मिले थे अभ्यर्थी
इससे पहले इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर ने राहुल गांधी से कहा था- अभ्यर्थी उल्टियां कर रहे हैं, उनकी हालत गंभीर है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस पर राहुल ने कहा था- अपने आंदोलन में मुझे भी बुलाइए।
भोपाल में अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत अपने साथियों के साथ 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। वह सिर्फ पानी पी रहे हैं और उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। राहुल ने 29 सितंबर को CM को पत्र लिखा था, जो अब सामने आया है।
इंदौर की दीप्ति ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम में प्रदर्शन से बिगड़े हालातों की जानकारी राहुल गांधी को दी थी।
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों को नोटिस पर सवाल
राहुल गांधी ने कहा- कई अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए हैं, लेकिन सीमित पदों के कारण वे नियमित नौकरी से वंचित हैं। इनमें लंबे समय से पढ़ा रहे कई अतिथि शिक्षक भी हैं, जो अब उम्र सीमा के करीब पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा- मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शिक्षक अभ्यर्थी आंदोलन और भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। राहुल ने नोटिस वापस लेने और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी बात सुनने की मांग की।
मंत्री टेटवाल बोले- राहुल का निशान हमेशा बेकार ही जाता है
राहुल गांधी के पत्र पर तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा- राहुल गांधी अनगाइडेड मिसाइल हैं। उनको पता ही नहीं लगता कि कहां दागना है। उनका निशाना भी बेकार ही जाता है।
मंत्री ने कहा- मध्य प्रदेश सरकार युवा सम्मेलन के माध्यम से युवाओं को रोजगार देने का काम कर रही है। लाखों युवाओं को रोजगार भी दिया है। आज कृषि विभाग के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं को नियुक्ति पत्र और रोजगार देने का काम किया है। राहुल गांधी को स्वयं का आकलन करना चाहिए।
17 नवंबर 2025 से आंदोलन का दावा
अभ्यर्थियों की ओर से राहुल गांधी को दिए गए ज्ञापन में कहा गया था कि वे मांगों को लेकर 17 नवंबर 2025 से भोपाल में अलग-अलग चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। ज्ञापन के मुताबिक, 22 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन चल रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान उनके साथी नरेंद्र सिंह राजपूत कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस और संतोषजनक समाधान नहीं मिला है।
अभ्यर्थी नरेंद्र ने कहा था- हम मोदीजी को ढूंढ रहे
नरेंद्र सिंह राजपूत ने दैनिक भास्कर से कहा था- हम मोदीजी को ढूंढ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, लेकिन छात्रों से बात नहीं करना चाहते। शायद कोई नाराजगी है। शायद ‘मेलोडी’ नहीं मिली। हम मेलोडी दे देंगे, लेकिन एक बार आकर हमसे बात कर लें, ताकि हम भिखारी की तरह यहां न बैठे रहें।
छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा था
नरेंद्र सिंह राजपूत ने कहा था- छात्र भीख मांगने नहीं, अपना हक मांगने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। लाठीचार्ज किया जा रहा। शुरुआत में आंदोलन पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ गया है।
राजगढ़ के ब्यावरा निवासी आंदोलनकारी नरेंद्र राजपूत बार-बार बेहोश हो रहे थे।
‘आवाज के बदले लाठी-डंडे से हमें मारा जा रहा’
उन्होंने कहा था- ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच और अपना हक मांगना हमारी आवाज है, हमारा हक है। अगर हमारी आवाज के बदले लाठी-डंडे से हमें मारा जा रहा है, तो क्या यह संविधान की हत्या नहीं हो रही है? हमें नहीं मार रहे, हमारे अधिकार और हमारी आवाज को मार रहे हैं।’
साथी अभ्यर्थियों ने कहा था कि नरेंद्र को अनशन खत्म करने के लिए काफी समझाया गया, लेकिन वे मांग पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं थे। आंदोलनकारियों ने कहा था कि उनकी हालत कभी भी बिगड़ सकती है।
आंदोलनकारियों ने खून से पत्र लिखा था। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की थी।
नरेंद्र ने पहले ही जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी
आंदोलनकारियों के अनुसार, नरेंद्र राजपूत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिम्मेदार होंगे।
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि एक महीने से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका यह भी आरोप था कि नरेंद्र की लगातार बिगड़ती तबीयत के बावजूद संबंधित जिम्मेदारों ने उनकी स्थिति जानने तक की कोशिश नहीं की।
स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा था- न चयन सूची में नाम, न वेटिंग में
स्कूल शिक्षा विभाग ने अनशन कर रहे अभ्यर्थियों को लेकर बयान जारी किया था। विभाग ने बताया था कि कर्मचारी चयन मंडल की चयन सूची में दीप्ति सिंह का नाम नहीं था और न ही वे प्रतीक्षा सूची में थीं। चयन सूची में शामिल सभी पात्र अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके थे, जबकि प्रतीक्षा सूची पर कार्रवाई प्रक्रिया में थी।
विभाग के मुताबिक, दीप्ति सिंह कार्यालय में उपस्थित होकर इस मामले में दो बार चर्चा कर चुकी थीं। उन्हें बताया गया था कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद कुछ अभ्यर्थी पदवृद्धि की मांग को लेकर धरना दे रहे थे, जिनमें दीप्ति सिंह भी शामिल थीं।
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