Updated On: Aug 06, 2026 | 09:35 PM IST
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सार
Mohan Bhagwat Gen Z: जेन-अल्फा से LGBT समुदाय तक, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं पर जताया अटूट भरोसा। छात्र आंदोलन, शिक्षा सुधार और सामाजिक व्यवस्था पर दिए उनके बयान की पूरी A to Z रिपोर्ट।

मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Gen Alpha To LGBT Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में छात्रों और युवाओं के साथ एक विस्तृत संवाद किया, जिसमें उन्होंने वर्तमान पीढ़ी, सामाजिक बदलाव और देश की चुनौतियों पर खुलकर अपनी राय रखी। Gen-Z के विरोध-प्रदर्शनों से लेकर एलजीबीटी LGBT समुदाय के अधिकारों तक, भागवत का यह संबोधन एक नए वैचारिक बदलाव की ओर संकेत करता है।
एंटी-नेशनल नहीं, ईमानदार पीढ़ी
मोहन भागवत ने हालिया छात्र आंदोलनों और जेन-जी को लेकर एक बहुत ही सकारात्मक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि आज के युवा विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उन्हें देशविरोधी या एंटी-नेशनल कहना पूरी तरह गलत है। भागवत के अनुसार, जेन-जी और जेन-अल्फा पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और उनके भीतर देशभक्ति और सेवा की भावना अधिक प्रभावी तरीके से काम करती है।
सवाल पूछना युवाओं का हक
आज की पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए भागवत ने कहा कि पहले के लोग बड़ों की बात बिना सवाल किए मान लेते थे, लेकिन आज का युवा तार्किक जवाब चाहता है। उन्होंने इसे भारतीय परंपरा के शास्त्रार्थ से जोड़ा, जिसमें संवाद के माध्यम से सत्य को खोजा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठा रहे हैं।
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व्यापार नहीं, निर्माण का जरिया
शिक्षा के मुद्दे पर भागवत ने छात्रों की शिकायतों को वास्तविक बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा पैसा कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के निर्माण का जरिया होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा जगत की गंभीर समस्याओं पर उंगली उठाते हुए 10 लाख रिक्त पदों का उल्लेख किया और शिक्षा बजट को सकल बजट का 6 प्रतिशत करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया।
समाज का अभिन्न अंग
एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि LGBT समुदाय भी हमारे समाज का हिस्सा है। हालांकि, समलैंगिक विवाह पर उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह दी ताकि विवाह संस्था की संरचना प्रभावित न हो, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा तरीका विकसित किया जाना चाहिए जिससे दो लोग सम्मानपूर्वक साथ रह सकें।
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महिलाओं की भूमिका और संघ का रुख
महिलाओं के सशक्तिकरण पर भागवत ने स्पष्ट किया कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें हर अवसर मिलना चाहिए। आरएसएस में महिलाओं की भागीदारी पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संगठन की स्थापना के समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज समय बदल चुका है और ऐसे प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
तकनीक, राष्ट्रहित और अटूट भरोसा
सोशल मीडिया और तकनीक के युग में उन्होंने फर्जी वीडियो और डीपफेक जैसी चुनौतियों के प्रति सचेत किया और विश्वसनीय स्रोतों के महत्व पर जोर दिया। पाकिस्तान और चीन के साथ रिश्तों पर उन्होंने साफ कहा कि युद्ध और आतंकवाद के समय राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जा सकता।
अंत में, मोहन भागवत ने युवाओं के प्रति अपना अटूट विश्वास प्रकट करते हुए कहा, यदि कभी आंख मूंदकर किसी पर विश्वास करने की बात आएगी, तो मैं जेन-जी पर विश्वास करूंगा। उन्होंने युवाओं को डॉ. अंबेडकर के भाषणों और संविधान की भावना को समझने की विशेष सलाह भी दी।
