अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने एक कार्यक्रम में अपनी शादी के बाद का मजेदार किस्सा सुनाया, जब उन्हें 'मौसमी बाई' कहा गया।
शालिनी देवरानी, जागरण। अभिनेत्री मौसमी चटर्जी (Moushami Chatterjee) भले ही 78 साल की हो लेकिन आज भी स्वभाव से बेबाक हैं। उनका यह अंदाज शुक्रवार को सभागार में पहुंचने के साथ ही देखने को मिला। जेन जी उन्हें - 'आप बहुत सुंदर लग रही हैं' जैसे कांप्लीमेंट देते नजर आए जिस पर हंसते हुए मौसमी ने उनका आभार जताया।
पोछा लगाने वाली बाई से पूछा था सवाल
बातचीत की शुरुआत में दर्शक दीर्घा में बैठी उनकी बेटी उन्हें याद दिला रही थी कि वह बाई वाला किस्सा सुनाए, इस पर हंसते हुए उन्होंने बताया कि शादी के बाद वह कोलकाता से मुंबई आई। वह स्कूल में थी जब उनकी शादी हुई थी। उन्होंने कहा कि एक दिन पोछा लगाने वाली उम्रदराज बाई से उन्होंने पूछा कि तुम्हें क्या बुलाऊं? तो उसने कहा मला बाई बुला (मुझे बाई बुला)। मैंने कहा ठीक है।
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मौसमी को किस बात पर आया गुस्सा?
एक दिन ससुर जी हेमंत कुमार ने कहा कि लता मंगेशकर के यहां जाना है। उन्होंने खासतौर पर कहा है बहू को लेकर आना। मैंने पैठनी साड़ी, मैचिंग ज्वेलरी पहनी और सज-धज कर गई। मैं गाड़ी से उतरी तो किसी ने बोला मौसमी बाई आई। मैं इतनी सजी धजी उसे बाई लगी, यह सुनकर दर्शक और मौसमी जोर से हंसे। आगे मौसमी ने कहा कि बहुत तेज गुस्सा आया मुझे, तभी कोई बोला-अरे लता बाई भी आई। तो मैंने बोला कि अगर लता बाई है तो मैं भी... यह सुनकर हाल तालियों और सीटियों से गूंज उठा।
दूसरों की राय को महत्व न दें
'सेलीब्रेटिंग द फेनोमिनन आफ बिकमिंग ए सिनेमेटिक हेरिटेज' विषय पर परिचर्चा के दौरान आगे उन्होंने कहा कि जिंदगी में जो भी करो, दिल से करो। दूसरों को देखकर अपने जीवन का मूल्यांकन करने के बजाय यह देखना चाहिए कि हमारे पास क्या है और हम उसका कितना आनंद लेते हैं। हम अक्सर अपनी खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं और निराश होते हैं। हमें अपने भीतर खुशी तलाशनी चाहिए और दूसरों की राय को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।
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पैसे चुराकर देखी थी फिल्म जिद्दी
इस दौरान उन्होंने अपने फिल्मी सफर और सिनेमा से जुड़ी यादों को अपने खास अंदाज में बयां किया। उनकी मासूमियत, साफगोई और दिलकश अंदाज दर्शकों के दिलों को छू गई। दर्शक दीर्घा में हर आयु वर्ग के लोगों में उन्हें सुनने की बेताबी नजर आई। जैसे ही उन्होंने जिक्र किया कि आशा पारेख की फिल्म जिद्दी इतनी पसंद थी कि पैसे चुराकर पांच बार देखा। हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर और अपने स्वभाव के बारे में भी उन्होंने बात की। उनके साथ अपने रिश्ते पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वह (ऋषि) बहुत केयरिंग थे और उनका स्वभाव नारियल जैसा था- बाहर से सख्त और ब्लंट, लेकिन अंदर से बेहद नरम था। वह मजाकिया अंदाज में कहते थे कि हम दोनों को कभी कोई अवार्ड नहीं मिलेगा, क्योंकि दोनों बहुत मुंहफट हैं। यह सुनकर हाल ठहाकों से गूंज उठा।
बेवजह प्यार करें, वजह ढूंढना जरूरी नहीं
युवाओं को सलाह देते हुए मौसमी कहती हैं कि जिंदगी में प्यार करने के लिए हमेशा कोई वजह ढूंढना जरूरी नहीं है। बेवजह प्यार करो, वजह ढूंढकर प्यार करने में क्या मजा है। उन्होंने कहा कि अगर हम हर कदम पर सोचते रहें कि लोग क्या कहेंगे, तो कभी खुश नहीं रह पाएंगे। वह कहती हैं, दो कान हैं, एक से सुनो और दूसरे से निकाल दो। हालांकि अपनी गलतियों से जरूर सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेल्फ सेंट्रिक, सेल्फिश (स्वार्थी) और सतर्क बनें। अपने बारे में सोचना स्वार्थी होना नहीं है।
जो मन हो वो ही करें, अपने शर्तों पर जिएं
मौसमी ने कहा कि दूसरों को कुछ साबित करने के लिए कुछ न करें। जो मन हो वहीं करें। उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में भी मैंने अपने लिए मर्सिडीज खरीदी और आज भी अपनी कमाई का आधा हिस्सा दूसरों पर खर्च करती हूं। उनके लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि या पैसा नहीं, बल्कि जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना है।

मोदी मन की बात नहीं, काम की बात ही करते हैं : मौसमी
मौसमी ने कहा कि पीएम मोदी चाहें कितनी भी मन की बात कर लें वो हमेशा काम की बात ही करते हैं। वो देश के लिए कितना सोचते हैं और करते हैं, लेकिन एक अकेला इंसान भला क्या ही कर लेगा। देश के लिए सोचना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1970 में लंदन गई थी, तो वहां मुझे किसी ने कहा था बैलगाड़ी में जाओ और आज हमारा देश अपने दम पर कितना आगे बढ़ चुके हैं। मुझे यह देखकर गर्व होता है।