JEE Main में 2 बार फेल, पर 2 लाख कमा रहा इंदौर का लड़का, IIT IIM के ठप्पे पर अंकुर वारिकू ने छेड़ी बहस

Published on 19 अग॰ 2026

Aug 19, 2026 11:23 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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अंकुर वारिकू ने बताया है कि एक डिजाइनर फ्रीलांसिंग के जरिए करीब 2 लाख प्रति महीने कमाता है। वह जेईई में दो बार फेल गया था। इस पोस्ट के बाद कॉलेजों के टैग व उसकी वेल्यू को लेकर बहस शुरू हो गई है।

success story

सफलता की कहानी

भारत में आमतौर पर किसी छात्र के टैलेंट को उसके कॉलेज या डिग्री से आंका जाता है। सबसे पहले उसकी काबिलियत की परख यह देखकर की जाती है कि वह कहां से पासआउट है। IIT, NIT या IIM या फिर किसी बड़े कॉरपोरेट ब्रांड का नाम उम्मीदवार के बारे में राय बनाने में मदद करता है, भले ही उसने क्षमता और स्किल्स साबित नहीं की हो। लेकिन उन युवाओं का क्या, जिन्हें किसी नामी संस्थान का टैग नहीं मिल पाता? जाने माने कंटेंट क्रिएटर और एंटरप्रिन्योर अंकुर वारिकू ने इसी मुद्दे को उठाते हुए इंदौर के एक डिजाइनर की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की है। इस डिजाइनर को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE में दो बार नाकामी मिली लेकिन हार मानने के बजाय उसने खुद से प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया और आगे चलकर एक सफल फ्रीलांसिंग करियर बनाया। वारिकू के मुताबिक आज यह डिजाइनर फ्रीलांसिंग के जरिए करीब 2 लाख प्रति महीने कमाता है। इस पोस्ट के बाद भारत में टैलेंट, डिग्री और नामी कॉलेजों के टैग व उसकी वेल्यू को लेकर बहस शुरू हो गई है।

भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की दिक्कत है

अंकुर वारिकू ने इस कहानी के आधार पर कहा है कि भारतीय समाज में अकसर टैलेंट को प्रतिष्ठित कॉलेज, डिग्री और बड़ी कंपनियों के ब्रांड नेम से पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों को टैलेंट तभी पहचानने की आदत हो गई है, जब उसके साथ सही कॉलेज, डिग्री या कंपनी का नाम जुड़ा हो। उनका मानना है कि इस सोच के कारण कई प्रतिभाशाली लोगों का हुनर नजरअंदाज हो जाता है। इंदौर के जिस डिजाइनर की कहानी उन्होंने साझा की, वह JEE में दो बार असफल रहा। लेकिन उसने इन असफलताओं को अपने भविष्य की पहचान नहीं बनने दिया। इसके बजाय उसने खुद से प्रोडक्ट डिजाइन सीखने का फैसला किया।

अंकुर वारिकू ने बताया गया है कि उसने YouTube के जरिए पढ़ाई की और अक्सर रात में डिजाइन सीखने में समय बिताया। धीरे-धीरे उसने अपना मजबूत प्रोफेशनल पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांसिंग के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। वारिकू के अनुसार आज वह डिजाइनर फ्रीलांसिंग से करीब 2 लाख रुपये प्रति माह कमाता है। उसका पोर्टफोलियो ऐसा है कि ज्यादातर IIT ग्रेजुएट भी शर्मिंदा हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि JEE अहम नहीं है। लेकिन यह दिखाता है कि किसी परीक्षा में प्रदर्शन और किसी व्यक्ति की भविष्य की प्रोफेशनल क्षमता हमेशा एक जैसी नहीं होती।

अपनी पोस्ट पर एक कमेंट का जवाब देते हुए, वारिकू ने बताया कि फ्रीलांसर का नाम नमन है।

इंटरनेट पर क्या बोले लोग

वारिकू की पोस्ट को सभी लोगों का समर्थन नहीं मिला। इस पोस्ट पर ऑनलाइन मिले-जुले रिएक्शन आए। कुछ यूजर्स ने कहा कि नमन की कहानी को बड़ी आबादी की पूरी तस्वीर के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए। एक यूजर ने ऐसी सक्सेस स्टोरीज को अपवाद कहा और बताया कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में हर महीने 2 लाख रुपये नहीं कमाते हैं। यूजर ने यह भी कहा कि अधिकतर नॉन-IIT ग्रेजुएट कॉर्पोरेट करियर में अच्छा परफॉर्म करने के बावजूद शायद ही कभी इतनी सैलरी तक पहुंच पाते हैं।

एक और यूजर ने IIT ग्रेजुएट्स के साथ तुलना पर एतराज जताया, यह कहते हुए कि देश के सबसे मुश्किल एंट्रेंस एग्जाम में से एक को पास करना प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी दिखाता है। कमेंट करने वाले ने यह भी सवाल किया कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स में IIT ग्रेजुएट्स इतने खास क्यों हैं।

“लोग एक्सेप्शन को रोमांटिक बनाना कब बंद करेंगे!” एक तीसरे यूजर ने रेयर सक्सेस स्टोरीज को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की बुराई की। यह कहना अलग बात है कि प्रतिष्ठित डिग्री सफलता की गारंटी नहीं देती और यह कहना बिल्कुल अलग है कि प्रतिष्ठित डिग्री का कोई मूल्य ही नहीं है।

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay

पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।

15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।

विजन

तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।

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