अमेरिकी बेस पर ईरान के लगातार हमले हो रहे हैं. हमले में ईरान अमेरिका को खासा नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है. सवाल है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका का प्लान क्या है?
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अमेरिकी बेस पर ईरान के लगातार हमले हो रहे हैं. हमले में ईरान अमेरिका को खासा नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है. सवाल है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका का प्लान क्या है?
पश्चिम एशिया में ईरान की मिसाइलें और ड्रोन लगातार अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को भेदने में सफल हो रही हैं. ईरान का दावा है कि इन हमलों में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ. ऐसे में सवाल है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका का प्लान क्या है? क्या अमेरिका इलाके में जो चाहता है वो हासिल कर पाएगा? ये अमेरिका पर ईरान का पलटवार है. अमेरिकी बेस पर ईरान के लगातार हमले हो रहे हैं. हमले में ईरान अमेरिका को खासा नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है. सवाल है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका का प्लान क्या है? क्या सहयोगियों को जंग में शामिल होने के लिए राजी कर पाएंगे ट्रंप?
फैसिलिटी को बहुत नुकसान पहुंचा
अमेरिका के लिए सहयोगियों का साथ इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर लगातार वार कर रहा है. ईरान हमले में अमेरिका को नुकसान पहुंचाने का सबूत भी दे रहा है. यह कतर के अल उदैद एयरबेस की सेटेलाइट तस्वीरें हैं. अलैद मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा बेस है. ईरान का दावा है कि उसके हमले में फाइटर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस फैसिलिटी को बहुत नुकसान पहुंचा है.
हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमले किए जा रहे
बहरीन में अमेरिका के पांचवें बेड़े के ड्रोन और कमांड कंट्रोल को नुकसान की भी सेटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं. जॉर्डन पर ईरान के हमले का वीडियो मिडिल ईस्ट की स्थिति को बयां करता है. ईरान का दावा है कि उसके अटैक के बाद जॉर्डन की तरफ से इंटरसेप्टर मिसाइल से अटैक बंद कर दिए गए. ईरान का दावा है कि उसने जॉर्डन में अमेरिका के फायर कंट्रोल रडार को तबाह कर दिया. माना जा रहा है कि ईरान की तरफ से अमेरिकी बेस पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमले किए जा रहे हैं.
अमेरिकी सेना खास लक्ष्य हासिल करने के लिए आगे बढ़ रही
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान बैलेस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ लोएटरिंग ड्रोन यानी हवा में मंडराने वाले ड्रोन की भारी बौछार का इस्तेमाल करता है. यह रणनीति एयर डिफेंस सिस्टम को भारी दबाव में डालकर बेअसर कर रही है. ईरान ने पिछले कुछ सालों में अपनी मिसाइलों की तकनीक को बेहतर बनाया है. इससे वो अमेरिकी एयरफील्ड और रडार ठिकानों को निशाना बनाने में सफल हो रहा है. कुल मिलाकर अमेरिका के लिए ईरान से लड़ना आसान नहीं है. लेकिन पिछली बार की तरह अमेरिका के लिए इस बार कोई सरप्राइज़ फैक्टर नहीं है. ईरान के हमलों के बीच अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका अपने मिशन में लगातार आगे बढ़ रहा है. ईरान के बंदरगाह शहरों को लगातार टारगेट कर रहा है अमेरिका. जाहिर है इस बार अमेरिकी सेना खास लक्ष्य हासिल करने के लिए आगे बढ़ रही है.
बॉस अमेरिका ईरान की समुद्री सुरक्षा को कमजोर करने में जुटा है. ईरान में अमेर की सेना एमफीबीएस हमले की तैयारी कर रही है. अमेरिका के लिए अच्छी बात यह है कि फ्रांस और ब्रिटेन की तरफ से भी अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं. फ्रांस और ब्रिटेन ने इस बार ईरान के हमलों की निंदा की है. लिहाजा आने वाले दिनों में हो सकता है कि पूरा नाटो गठबंधन ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल हो जाए.अमेरिका अपनी इसी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने में जुटा है.