Updated: Thursday, July 16, 2026, 16:23 [IST]
M Lokesh Success Story: कहते हैं हर किसी की सफलता के पीछे उसके अपनों की मेहनत और दुआएं भी शामिल होती हैं। जब कोई बच्चा अच्छी रैंक लाता है या कोई और अचीवमेंट हासिल करता है तो उसके पीछे उसका परिवार या माता-पिता जरूर खड़े होते हैं। वो सफलता सिर्फ स्टूडेंट की नहीं होती बल्कि उसके साथ-साथ ये जीत होती है उसके परिवार के मेहनत और भरोसे की। ऐसी ही एक जीत मिली है एम लोकेश और उनकी मां को।
तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के रहने वाले 18 वर्षीय एम लोकेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन उनकी मां ने इसे अपने बेटे के भविष्य में बाधा नहीं बनने दिया। एक लोकेश ने भी अपनी मां की मेहनत और तपस्या को खाली नहीं जाने दिया। उन्होंने अपनी लगन से वो कहानी लिखी जिसे पढ़कर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। JEE मेन और JEE एडवांस में रैंक लाने के बाद अब वो देश के टॉप IIT से पढ़ेंगे। ये उनके और उनकी मां की कड़ी मेहनत का फल है।
दिहाड़ी मजदूरी करके मां ने बेटे को पढ़ाया
लोकेश के घर की आर्थिक हालत कमजोर थी। पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। उनकी मां दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार चला रही थीं। इसके बावजूद लोकेश ने अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। मां ने दिन-रात मेहनत की, जबकि बेटे ने पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बनाया। इसी मेहनत का नतीजा है कि लोकेश ने JEE Main और JEE Advanced जैसी कठिन परीक्षाएं पास की। और अब वो देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिने जाने वाले IIT मद्रास में पढ़ाई करेंगे। IIT मद्रास में उनका एडमिशन हो गया है। उनकी यह सफलता आज हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई मिसाल बन गई है।
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लोकेश जब केवल 4 साल के थे तब उनके जीवन में सबसे बड़ी चुनौती आई। इसी उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां एम. अमरावती पर आ गई। तीन बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अमरावती सातवीं कक्षा तक ही पढ़ सकी थीं। इसलिए उनके लिए कोई नौकरी ढूंढ पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था। परिवार की जिम्मेदारी बढ़ने पर उन्होंने ईंट-भट्ठे पर मजदूरी शुरू कर दी। रोज करीब 300 रुपये की दिहाड़ी से घर का खर्च चलता था। कमाई भले ही कम थी, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी।
हर दिन सुबह साढ़े तीन बजे शुरू होती थी मां की मेहनत
लोकेश की मां अमरावती का दिन सुबह साढ़े तीन बजे शुरू हो जाता था। वह अंधेरा रहते ही काम पर निकल जाती थीं और देर शाम घर लौटती थीं। इस बीच बच्चे खुद खाना बनाकर स्कूल जाते थे। खाना पड़ोसी के घर रख दिया जाता था, जिसे बाद में अमरावती काम के दौरान खाती थीं। गर्मी, सर्दी, बरसात, हर मौसम में, कठिन से कठिन परिस्थिति में उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखा। आज उस मेहनत का परिणाम उनके बच्चों की सफलता के रूप में उनके सामने है।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, फिर IIT मद्रास तक का सफर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकेश ने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा विरुधुनगर के म्युनिसिपल टीवीके हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की और JEE मेन के बाद JEE एडवांस भी पास कर लिया। इसके बाद उन्हें IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग में दाखिला मिला। NIRF रैंकिंग के अनुसार IIT मद्रास देश का टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज है।
कोचिंग कार्यक्रम ने बढ़ाया आत्मविश्वास
द न्यू इंडिया एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकेश ने बताया है कि जिला प्रशासन की दिशाई पहल ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी। इस कार्यक्रम के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों को JEE, NEET और CUET जैसी परीक्षाओं की आवासीय कोचिंग दी जाती है। यहां शिक्षकों ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराई, बल्कि हर विषय को आसान तरीके से समझाया और लगातार मार्गदर्शन भी किया।
इस साल विरुधुनगर जिले के लिए यह बड़ी उपलब्धि रही। लोकेश के अलावा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आर. अरुमुगा वेलन राघवन और आई. धरनिया ने भी JEE पास कर NIT में प्रवेश हासिल किया। खास बात यह है कि दोनों छात्र भी दिहाड़ी मजदूर परिवारों से आते हैं।
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