जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संवाद के लिए आयोजित पंच सम्मेलन तब सुर्खियों में आ गया, जब मंच से ही कलेक्टर और एक सरपंच के बीच तीखी झड़प हो गई। मुद्दा था पुराने लाइसेंसी हथियार को बदलने की अनुमति का।
कांग्रेस नेता और दावतपुरा के सरपंच नरेंद्र सिंह ने खुली सभा में अपनी शिकायत रखी, तो कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने भी उसी लहजे में जवाब दिया। दोनों के बीच हुई नोकझोंक के बाद पूरे हॉल में देर तक चर्चा होती रही। मंच पर पहुंचते ही सरपंच नरेंद्र सिंह ने अपनी पुरानी लाइसेंसी बंदूक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हथियार काफी पुराना हो चुका है और अब काम नहीं कर रहा। उसे बदलने के लिए उन्होंने कई बार आवेदन दिया, लेकिन अनुमति नहीं मिली। सरपंच ने दावा किया कि इस मामले में उन्होंने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह से भी बात करवाई थी। इसके बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ी।
विज्ञापन
उन्होंने कलेक्टर से कहा कि हमारे क्षेत्र में वन्यजीवों का शिकार होता है। शिकारियों के पास हथियार हैं। ऐसे में गांव की सुरक्षा के लिए हमारे पास भी शस्त्र होना चाहिए। अगर अनुमति नहीं देनी है तो मैं अपनी बंदूक कार्यालय में जमा कर दूंगा। सरपंच की बात सुनने के बाद कलेक्टर कन्याल ने पंच-सरपंचों को संबोधित किया। उन्होंने शस्त्र लाइसेंस के मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि कानून के दायरे में रहकर ही अनुमति दी जाएगी। इसी दौरान उनका एक बयान चर्चा का केंद्र बन गया। कलेक्टर ने कहा, हम लाइसेंस बांटकर गुना को हथियारों के लिए बदनाम जिलों जैसा नहीं बनाना चाहते। गुना की मिट्टी और यहां का माहौल शांति का है। इसे हम इसी तरह रखेंगे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- आय से 216 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आरोप, लोकायुक्त ने सहायक राजस्व अधिकारी के ठिकानों पर मारा छापा
कलेक्टर के इस वाक्य के बाद सभागार में सन्नाटा छा गया। कई पंच-सरपंच आपस में इस बयान पर बात करने लगे। बहस यहीं नहीं रुकी। सरपंच ने नाराजगी जताते हुए कलेक्टर को राजनीति में आने तक का न्योता दे दिया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों की बात सुनी जानी चाहिए। दूसरी ओर मंच पर मौजूद भाजपा नेताओं ने कलेक्टर के कामकाज की तारीफ की। उन्होंने कलेक्टर को जिले के लिए बेहतर प्रशासक बताया और कानून व्यवस्था को लेकर उनके सख्त रुख की सराहना की।
पंच सम्मेलन का मकसद गांवों की समस्याएं और सरकारी योजनाओं पर चर्चा करना था। लेकिन हथियार लाइसेंस का मुद्दा बीच में आते ही माहौल बदल गया।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हथियार बदलने के आवेदन तय प्रक्रिया से गुजरते हैं। सुरक्षा, कानून व्यवस्था और पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए ही अनुमति दी जाती है। इसमें किसी का दबाव नहीं चलता। कलेक्टर ने कहा कि सरपंच का आवेदन नियमों के अनुसार देखा जाएगा। यदि पुराना लाइसेंस वैध है और हथियार वाकई खराब है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। लेकिन मनमाने तरीके से लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।
सरपंच नरेंद्र सिंह ने भी कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, बस उनकी समस्या का समाधान चाहते हैं। गुना में पंच सम्मेलन के दौरान हुई इस तीखी बहस ने एक बार फिर दिखा दिया कि मंच पर जनप्रतिनिधि और अफसर आमने-सामने आ जाएं तो छोटा मुद्दा भी बड़ा बन जाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन सरपंच की मांग पर क्या फैसला लेता है।