विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है. एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि जुटाने की प्रक्रिया में प्रशासन ने पहले चरण के तहत 45 गांवों को चिह्नित किया है.
विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है. एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि जुटाने की प्रक्रिया में प्रशासन ने पहले चरण के तहत 45 गांवों को चिह्नित किया है.
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सांकेतिक तस्वीर Photograph: (NHAI)
Expressway: विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है. एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि जुटाने की प्रक्रिया में प्रशासन ने पहले चरण के तहत 45 गांवों को चिह्नित किया है. इन गांवों में छह हजार से अधिक किसानों की जमीन परियोजना के दायरे में आने की बात सामने आई है. सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाने के बजाय किसानों की सहमति से जमीन लेने पर जोर दिया है. इसके लिए संबंधित किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन का बैनामा कराने की तैयारी की जा रही है. प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी हो सकेगी.
अभिलेखों की जांच के बाद किसानों से होगा संपर्क
परियोजना के लिए चिह्नित गांवों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड जुटाने का काम चल रहा है. प्रशासन संबंधित अभिलेखों की जांच कर यह सुनिश्चित करेगा कि किस किसान की कितनी भूमि एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रस्तावित है. रिकॉर्ड सत्यापन के बाद किसानों से संपर्क कर सहमति के आधार पर बैनामे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. पहले चरण में शामिल 45 गांवों में छह हजार से ज्यादा किसानों की जमीन प्रभावित होने की संभावना है. जमीन की उपलब्धता और किसानों की सहमति के अनुसार बैनामा कराया जाएगा। इसके बाद परियोजना के अन्य हिस्सों के लिए भी भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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जल्द तैयार होगा डीपीआर
विंध्य एक्सप्रेसवे को प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में माना जा रहा है. इसका उद्देश्य पूर्वांचल क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है. परियोजना की विस्तृत योजना तैयार करने के लिए डीपीआर यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जानी है. परियोजना को लेकर शासन स्तर पर भी लगातार निगरानी की जा रही है. माना जा रहा है कि निर्माण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसके शिलान्यास की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा सकता है. प्रयागराज जिले की तीन तहसीलों से होकर प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के गुजरने की योजना है.
बारिश ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की व्यवस्था पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, बारिश के बाद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई स्थानों पर सड़क दबने के कारण पानी जमा हो गया है। जलभराव की वजह से वाहन चालकों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि पानी के नीचे सड़क की सतह सामान्य है या कहीं क्षतिग्रस्त हो चुकी है. इसका असर यातायात की रफ्तार पर भी पड़ रहा है. लखनऊ से कानपुर और कानपुर से लखनऊ आने-जाने वाली दोनों दिशाओं में कुछ स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आने की बात कही जा रही है.
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200 मीटर हिस्से में दिखा जलभराव
लखनऊ से कानपुर की ओर जाने वाली लेन में किलोमीटर 66.6 के आसपास हाई-स्पीड लेन के करीब 200 मीटर हिस्से में पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है. डिवाइडर के पास जमा पानी के बीच सड़क के दबे हुए हिस्से भी दिखाई दे रहे हैं. बारिश के दौरान बार-बार पानी जमा होने से सड़क की गुणवत्ता और मजबूती को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. लगातार जलभराव रहने की स्थिति में सड़क को और नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. वहीं, डिवाइडर के बिल्कुल पास पानी जमा होने के कारण तेज रफ्तार वाहनों के लिए यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. एक तरफ विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सामने आ रही समस्याएं सड़क निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर चर्चा का विषय बन गई हैं.