अगर आपके ऊपर एक साथ कई लोन चल रहे हैं, तो शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग सकता है। लेकिन जैसे-जैसे होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन की EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल एक साथ आने लगता है, हर महीने की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में जाने लगता है। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी वित्तीय लापरवाही भी बजट बिगाड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि कई लोन होने के बावजूद कर्ज को व्यवस्थित तरीके से मैनेज किया जाए। सबसे पहले अपनी सभी EMI और क्रेडिट कार्ड की न्यूनतम देनदारी को एक जगह लिखें और देखें कि हर महीने आपकी आय का कितना हिस्सा कर्ज चुकाने में जा रहा है। आम तौर पर कोशिश करें कि कुल मासिक Debt Payment आपकी मासिक आय के करीब 40–50% से ज्यादा न हो। अगर यह अनुपात लगातार इससे ऊपर जा रहा है, तो इसे गंभीर संकेत मानकर तुरंत खर्च और कर्ज की समीक्षा करनी चाहिए।
सभी कर्ज एक जैसे महंगे नहीं होते। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड और कुछ पर्सनल लोन पर ब्याज दर होम या एजुकेशन लोन की तुलना में ज्यादा हो सकती है। इसलिए अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो पहले उस कर्ज को कम करने पर ध्यान दें, जिस पर सबसे ज्यादा ब्याज लग रहा है। इससे भविष्य में जाने वाला ब्याज घट सकता है और कर्ज जल्दी खत्म हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड का Minimum Due भरने से भुगतान की समयसीमा पूरी हो सकती है, लेकिन इससे पूरा कर्ज खत्म नहीं होता, बाकी बकाया पर ब्याज बढ़ता रह सकता है। इसलिए संभव हो तो हर महीने पूरा बिल चुकाएं। अगर पहले से कई महंगे कर्ज चल रहे हैं, तो बैंक से कम ब्याज वाली EMI या Loan Consolidation का विकल्प पूछ सकते हैं। लेकिन, किसी भी नए लोन से पहले उसकी ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और कुल भुगतान की तुलना जरूर करें।
एक भी EMI समय पर नहीं भरने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सभी जरूरी भुगतानों के लिए Auto-Debit या Standing Instruction सेट कर सकते हैं। साथ ही बैंक खाते में पर्याप्त रकम रखना जरूरी है, ताकि भुगतान की तारीख पर EMI बाउंस न हो।
पुराना कर्ज चुकाने के दौरान नया क्रेडिट कार्ड, BNPL या पर्सनल लोन लेकर खर्च बढ़ाना समस्या को और गंभीर बना सकता है। जब तक आपकी Debt स्थिति नियंत्रण में न आ जाए, गैर-जरूरी खरीदारी को टालना बेहतर है।
अचानक नौकरी जाने, आय घटने या किसी बड़े जरूरी खर्च की स्थिति में अगर आपके पास बचत नहीं है, तो आपको फिर से लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ सकता है। इसलिए धीरे-धीरे कम से कम तीन महीने के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) बनाने का लक्ष्य रखें। इससे अचानक आने वाली आर्थिक परेशानी में नया कर्ज लेने की जरूरत कम होगी।
कई लोन होना अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उनका भुगतान आपकी आय और बजट पर कितना दबाव डाल रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। हाई इंटरेस्ट डेब्ट (High-interest debt) को प्राथमिकता देना, EMI समय पर भरना, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का पूरा बिल चुकाना और इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) बनाना आपको कर्ज के जाल से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।