Explainer: कतर के पूर्व शासक के निधन पर भारत क्यों मना रहा शोक? जानिए क्या है इसके पीछे की वजह| Navbharat Live

Published on 13 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 13, 2026 | 05:22 PM IST

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सार

National Mourning in India: कतर के फादर अमीर शेख हमद बिन खलीफा के निधन पर भारत ने राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया है। जानिए विदेशी नेताओं के निधन पर देश में क्या नियम हैं?

National Mourning in India Sheikh Hamad Thani death

भारत में शेख हमद थानी के निधन पर राष्ट्रीय शोक (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

Qatar Father Emir Death: कतर के फादर अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार (12 जुलाई 2026) को लंबी बिमारी के बाद निधन हो गया। साल 1995 से 2013 तक कतर पर राज करने वाले थानी को कतर में राष्ट्रपिता का दर्जा हासिल है। इस समय उनके बेटे अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के पास कतर की बागडोर है।

भारत ने अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर एक दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। इस दौरान भारत के प्रमुख इमारतों पर राष्टीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार के अधिकारिक मनोरंजव के कार्यक्रम नहीं होंगे। ऐसे में सवाल आता है कि किसी दूसरे देश राष्ट्राध्यक्ष के निधन पर भारत में शोक क्यों बनाया जा रहा है? इस दौरान किन नियमों का पालन करना पड़ता है? राष्ट्रीय शोक में क्या-क्या होता है?

कतर के अमीर के निधन पर भारत में शोक क्यों?

भारत या कोई भी देश किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के निधन पर हर बार राष्ट्रीय शोक की ऐलान नहीं करते हैं। इसे एक खास राजनयिक और संवेदनशील निर्णय माना जाता है। राष्ट्रीय शोक का मतलब अक्सर लोग इसी सरकारी छूट्टी मान लेते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होता देश किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के दिन पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा करके उस व्यक्ति के प्रति सम्मान और दुख व्यक्त करते हैं।

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भारत में राष्ट्रीय शोक पर आधा झुका रहता है राष्ट्रीय ध्वज (सोर्स- सोशल मीडिया)

राष्ट्रीय शोक की घोषणा दिवंगत व्यक्ति के भारत से संबंध, नेता के वैश्विक महत्व और उसका भारत के प्रति योगदान को देखते हुए लिया जाता है। राष्ट्रीय शोक सिर्फ औपचारिकता नहीं है। बल्कि यह देश की विदेश नीति की दिशा को दर्शानें का काम करती है, साथ ही  मानवीय संवेदना और कूटनीतिक संदेश देना का भी काम करती है।

क्या होता है राष्ट्रीय शोक?

राष्ट्रीय शोक पूरे देश की ओर से दुख प्रकट करने का तरीका है। सरकार तय अवधि को दौरान कुछ खास कदम उठाती है, जिसका मकसद दिवंगत व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करना होता है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया जाता है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि दिवंगत व्यक्ति का भारत और दुनिया के लिए क्या महत्व था। यह सम्मान भारत के बड़े नेताओं, सामाजिक हस्तियों और कुछ विदेशी नेताओं को भी दिया जा सकता है। राष्ट्रीय शोक की घोषणा केंद्र सरकार करती है।

राष्ट्रीय शोक की घोषणा क्यों की जाती है?

किसी विदेश राष्ट्राध्यक्ष के निधन पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा न केवल उस व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करना है, बल्कि इससे उस देश की जनता को संदेश दिया जाता है कि दुख की घटी में भारत आपके साथ खड़ा है। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में भरोसा बढ़ता है। जिसके असर व्यापार से लेकर वैश्विक राजनीति पर पड़ता है। इसके अलावा यह भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को भी दर्शाने का काम करता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि किसी भी देश के हर वर्तमान या पूर्व प्रमुख के निधन पर भारत राष्ट्रीय शोक घोषित करे। प्रत्येक निर्णय परिस्थितियों और दोनों देशों के संबंधों की प्रकृति को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

किन विदेशी नेताओं के निधन पर हुई राष्ट्रीय शोक घोषणा

भारत ने समय-समय पर कुछ प्रमुख विदेशी नेताओं के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। पिछले कुछ सालों की बात करें तो इसमें तीन प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं।

National Mourning in India Sheikh Hamad Thani death

किन नेताओं के निधन पर हुई थी राष्ट्रीय शोक की घोषणा (AI जेनरेटेड इमेज)

शिंजो आबे: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के बाद भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। आबे को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के निधन पर भी भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था।

इब्राहिम रईसी: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद भी भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक रखा था।

विदेशी नेताओं के मामलों में भारत सरकार अक्सर एक दिन का राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया जाता है। हालांकि इसकी अवधि तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है। इसकी घोषणा अक्सर गृह मंत्रालय विदेश और रक्षा मंत्रालय से विचार-विमर्श के बाद करती है।

एक दिन का राष्ट्रीय शोक क्यों?

एक दिन का राष्ट्रीय शोक भारत की ओर से सम्मान और संवेदना का औपचारिक तथा गरिमापूर्ण संकेत माना जाता है। यह संबंधित देश के साथ भारत के रिश्तों की गंभीरता और निकटता को भी दर्शाता है। वहीं, दो या उससे अधिक दिनों का राष्ट्रीय शोक सामान्यतः भारत के वर्तमान या पूर्व शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों के निधन जैसे विशेष अवसरों पर घोषित किया जाता है।

राष्ट्रीय शोक के दौरान क्या-क्या होता है?

राष्ट्रीय शोक घोषित होने के बाद केंद्र सरकार औपचारिक आदेश जारी करती है, जिसमें शोक की अवधि, तारीख और पालन किए जाने वाले निर्देश स्पष्ट किए जाते हैं। आमतौर पर इसके तहत कुछ नियमों का पालन किया जाता है।

National Mourning in India Sheikh Hamad Thani death

राष्ट्रीय शोक में क्या करती है भारत सरकार (AI जेनरेटेड इमेज)

राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया जाता है: देशभर में उन सरकारी भवनों और संस्थानों पर तिरंगा आधा झुकाया जाता है, जहां वह नियमित रूप से फहराया जाता है। जरूरी होने पर विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों को भी ध्वज आधा झुकाने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसा करनाअंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

मनोरंजन कार्यक्रमों पर रोक: राष्ट्रीय शोक की अवधि में सरकार की ओर से आयोजित सांस्कृतिक समारोह, उत्सव, मनोरंजन कार्यक्रम और अन्य औपचारिक आयोजन नहीं किए जाते। इसका मकसद शोक की गरिमा बनाए रखना होता है।

संवेदना संदेश: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री या अन्य वरिष्ठ नेता दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद करते हैं और संबंधित देश की जनता तथा शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।

राजनयिक स्तर पर संवेदना व्यक्त करना: विदेश मंत्रालय संबंधित देश की सरकार या दूतावास को औपचारिक शोक संदेश भेजता है। भारत में स्थित उस देश के दूतावास में जाकर भी संवेदना व्यक्त की जा सकती है। इसी प्रकार विदेशों में तैनात भारतीय राजदूत या उच्चायुक्त भी संबंधित सरकार से मिलकर भारत की ओर से शोक संदेश सौंपते हैं।

हालांकि, बहुत से लोग राष्ट्रीय शोक का मतलब छुट्टी समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है राष्ट्रीय शोक के दौरान किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं होता है और सरकारी कार्यालय और स्कूल सामान्य रूर से चलते रहते हैं।

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