Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा रुपया, 3 साल बाद Fed ने बढ़ाईं ब्याज दरें - Haribhoomi

Published on 17 सित॰ 2026

रुपया डॉलर के मुकाबले 96 का स्तर पार कर करीब 96.03 तक पहुंच गया। अमेरिकी Fed ने तीन साल से ज्यादा समय बाद ब्याज दर 0.25% बढ़ाकर 3.75-4% कर दी। मजबूत डॉलर, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है।

US Dollar vs indian rupee

US Dollar vs indian rupee

  • Published: 17 Sep 2026, 11:58 AM IST
  • Last Updated: 17 Sep 2026, 11:58 AM IST

भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया। गुरुवार, 17 सितंबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 96 का अहम स्तर पार कर गया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 96.03 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिन यह 95.95 के आसपास बंद हुआ था। जुलाई के बाद यह पहला मौका है, जब रुपया 96 के पार गया।

 भारतीय रुपए में आई इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला है। फेड ने तीन साल से ज्यादा समय बाद पहली बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की। ब्याज दर 0.25% बढ़ाकर 3.75% से 4% के दायरे में कर दी गई। फेड ने कहा है कि अमेरिका में महंगाई अब भी ऊंची बनी हुई और इसे 2% के लक्ष्य की तरफ लाने के लिए यह कदम उठाया गया।

आगे भी बढ़ सकती हैं अमेरिकी ब्याज दरें
बाजार की चिंता सिर्फ इस बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। फेड के अनुमानों ने आगे भी सख्त मॉनेटरी पॉलिसी जारी रहने के संकेत दिए हैं। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दूसरी एशियाई करेंसी पर दबाव बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स भी सात हफ्ते के ऊंचे स्तर के आसपास पहुंच गया।

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबारी के मुताबिक, रुपया पिछले दो सेशन से 96 के आसपास बना हुआ था और अब ग्लोबल हालात इसके लिए ज्यादा मुश्किल हो गए हैं। अगर रुपया लगातार 96 के पार बना रहता है तो डॉलर के मुकाबले 96.30 से 96.50 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।

महंगा कच्चा तेल भी बढ़ा रहा मुश्किल
रुपये के लिए दूसरी बड़ी परेशानी कच्चे तेल की कीमत है। ब्रेंट क्रूड में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन भाव अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में महंगा क्रूड डॉलर की मांग बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी भी रुपये की मुश्किल बढ़ा रही है।

अब RBI पर भी रहेंगी नजरें
Fed के रेट बढ़ाने के बाद अब नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर हैं। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक अक्टूबर की शुरुआत में होनी है। महंगा कच्चा तेल और महंगाई का दबाव बना रहा तो ब्याज दरों को लेकर RBI के अगले कदम पर बाजार की खास नजर रहेगी।

(प्रियंका कुमारी)