Delhi SIR Controversy: दिल्ली में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत करीब 33 लाख लोगों को "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" और "अनमैप्ड" के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
दिल्ली SIR विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
- Published: 17 Sep 2026, 12:20 PM IST
- Last Updated: 17 Sep 2026, 12:20 PM IST
Delhi SIR Controversy: दिल्ली में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान करीब 33 लाख लोगों को "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" और "अनमैप्ड" के कारण नोटिस दिए जा रहे हैं। बता दें कि यह संख्या उन 42 लाख लोगों से अलग है जिनके नाम पहले ही वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। इस मामले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले पर मंगलवार 22 सितंबर को सुनवाई करने की सहमति जताई है।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद चुनाव आयोग की उस प्रक्रिया से जुड़ा है जिसमें वोटर लिस्ट को सही करने के लिए लोगों की जांच की जा रही है। दरअसल इस जांच के दौरान लाखों लोगों के नाम के आगे "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" यानी तार्किक गड़बड़ी और "अनमैप्ड" जैसे टैग लगा दिए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन नोटिस को लेकर कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग इन नोटिस से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहा है।
#SupremeCourt | Supreme Court hears an urgent mentioning of a fresh writ petition concerning SIR in Delhi.
Prashant Bhushan says notices have been issued to 33 lakh more people over "logical discrepancies" and being "unmapped", apart from 47 lakh-plus deletions from the draft… pic.twitter.com/F39VqjjE8h
— Bar and Bench (@barandbench) September 17, 2026
याचिका में क्या आरोप लगाया गया ?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन लोगों को यह नोटिस भेजे गए हैं, उनके नाम चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिखाए ही नहीं गए हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आखिर उनके नाम के आगे किस आधार पर यह गड़बड़ी वाला टैग लगाया गया है? इसका परिणाम यह है कि आम लोगों को यह पता ही नहीं चल पा रहा कि उन्हें नोटिस मिला है या नहीं, और अगर मिला है तो उसकी वजह क्या है?
मंगलवार को होगी सुनवाई
बिना वजह बताए इतने बड़े लेवल पर लोगों के नाम पर सवाल उठाना गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे वोटर लिस्ट से नाम कटने का खतरा बढ़ जाता है। इसी मुद्दे को लेकर SIR के दौरान सामने आई "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि इसे दूसरे एसआईआर से जुड़े मामलों के साथ मंगलवार को सुना जाएगा। अब इस मामले पर स्थिति मंगलवार को ही स्पष्ट हो सकेगी, इन नोटिस का कारण क्या है, और आयोग को इसमें क्या नियम मानने होंगे।