Delhi Jal Board: दिल्ली जलबोर्ड ने MCD से 5 साल के बिल्डिंग रिकॉर्ड मांगे हैं। दरअसल सरकार IFC चार्ज नहीं चुकाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में जुटी है।
दिल्ली जलबोर्ड ने MCD से मांगे 5 साल के बिल्डिंग रिकॉर्ड।
- Published: 16 Jul 2026, 03:39 PM IST
- Last Updated: 16 Jul 2026, 03:39 PM IST
Delhi Jal Board: दिल्ली सरकार द्वारा उन सभी बिल्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिनके निर्माण के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (DJB) का पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड चार्ज जमा नहीं कराया गया है। DJB ने इसके लिए दिल्ली नगर निगम से राजधानी के पिछले 5 सालों के बिल्डिंग प्लान के रिकॉर्ड मांगे हैं। पेमेंट नहीं करने पर संपत्ति को सील करने जैसे फैसले लिए जा सकते हैं।
जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने क्या कहा ?
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सभी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार बताया कि सरकार ने इस साल की शुरुआत में लोगों, हाउसिंग यूनिट्स, संस्थानों और उद्योगों को राहत देने के लिए डीजेबी का इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज कम और आसान कर दिया था।
उन्होंने कहा कि हमारी प्रारंभिक इंटरनल इन्क्वायरी में यह बात पता चली कि कई बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के मामलों में इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज चुकाए बिना बिल्डिंगें खड़ी कर ली गईं। इससे ऐसा लगता है जैसे बिल्डरों और डीजेबी अधिकारियों के बीच साठगांठ है। आईएफसी चार्ज नहीं चुकाने वालों पर हम न सिर्फ जुर्माना लगाएंगे, बल्कि बिल्डिंगों को सील भी करेंगे।
जल मंत्री ने कहा कि हमने एमसीडी से पिछले पांच सालों में अप्रूव हुए सभी बिल्डिंग प्लान का डेटा मांगा है। हम इस डेटा का मिलान अपने उस डेटा से करेंगे, जिसमें जल बोर्ड को इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज का भुगतान किया गया है। जहां भी हमें कोई गड़बड़ी मिलेगी, वहां मूल राशि के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।
2000 करोड़ के राजस्व का नुकसान
अनुमान लगाया गया है कि, राजधानी में 3000 वर्ग मीटर और उससे बड़े आकार की करीब 300 ऐसी संपत्तियां हैं, जिनके लिए कोई IFC चार्ज जमा नहीं किया गया है। इससे दिल्ली जलबोर्ड करीब 2000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। प्रवेश वर्मा ने कहा कि सरकार ने अब इस सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव किया है। वहीं IFC प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और निष्पक्ष बना दिया है।
जल मंत्री ने कहा कि 200 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा और अधिकारियों द्वारा बेवजह नाप-जोख या परेशान करने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। कई मामलों में जहां लोगों को पहले पुराने सिस्टम के तहत 15-16 लाख रुपये तक देने पड़ते थे, अब यह रकम घटाकर लगभग 2-3 लाख रुपये कर दी गई है।
IFC चार्ज पॉलिसी में बदलाव की मंजूरी
ऐसा कहा जाता है कि राजधानी में 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर नए या अतिरिक्त निर्माण पर दिल्ली जल बोर्ड आईएफसी चार्ज वसूल करता है। यह चार्ज पानी और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले वसूल करने होते हैं।
सीएम रेखा गुप्ता ने भी कुछ दिन पहले IFC चार्ज पॉलिसी में बदलाव और उसे आसान बनाने को मंजूरी दी थी। इसके तहत DJB के बदले हुए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज का सबसे अधिक फायदा फैक्टरियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स को हुआ है, क्योंकि इससे शुरुआती कंस्ट्रक्शन लागत काफी कम हो गई है।