China: दिन-रात काम फिर भी नहीं पल रहा परिवार, क्या चीन के गिग वर्कर्स का सपना टूट रहा? सरकार की नजरें टेढ़ी

Published on 22 अग॰ 2026

चीन में आर्थिक दबाव और कठिन कामकाजी हालात अब केवल आंकड़ों या रोजगार के सवाल तक सीमित नहीं रह गए हैं। इनका असर वहां के श्रमिकों की लिखी कविताओं और किताबों में भी दिखाई देने लगा है। फूड डिलीवरी बॉय, कूरियर कर्मचारी और फैक्ट्री मजदूर अपनी रोजमर्रा की परेशानियों, कम आमदनी और परिवार से दूरी को साहित्य के जरिए सामने ला रहे हैं। यह श्रम साहित्य चीन के मध्य वर्ग और युवाओं के बीच भी जगह बना रहा है। इसकी वजह यह है कि बहुत से लोगों को इन रचनाओं में अपनी जिंदगी की झलक दिखाई देती है।

क्यों साहित्य में उतर रही है मजदूरों की मुश्किल जिंदगी?

  • फूड डिलीवरी ड्राइवर रहे वांग जिबिंग की कविताएं चीन के श्रमिक जीवन की इसी तस्वीर को सामने रखती हैं।
  • उनकी एक कविता में ऐसे डिलीवरी कर्मचारी की जिंदगी दिखाई गई है, जो दूसरे शहर में रहकर दिन-रात काम करता है।
  • उसके लिए हर मिनट का मतलब एक और ऑर्डर पूरा करना है, लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
  • घर से दूर रहने के कारण वह अपने बच्चे से भी दूर होता जाता है।
  • यह कहानी अकेले एक व्यक्ति की नहीं मानी जा रही, बल्कि चीन में काम कर रहे कई प्रवासी मजदूरों और गिग वर्कर्स की स्थिति को दिखाती है।
  • ऐसे श्रमिक साहित्य में आर्थिक दबाव, थकान, अपमान और बेहतर जीवन की अधूरी उम्मीद जैसे विषय लगातार सामने आ रहे हैं।

क्या गिग वर्कर्स और फैक्ट्री मजदूरों की आवाज अब दबाना मुश्किल हो रहा है?

चीन में कई मजदूर, डिलीवरी कर्मचारी और फैक्ट्री वर्कर अपनी वास्तविक जिंदगी को कहानियों और कविताओं में बदल रहे हैं। युवाओं में बेरोजगारी की ऊंची दर और बेहतर जीवन की उम्मीदों के कमजोर पड़ने से इस साहित्य की मांग बढ़ रही है। इन रचनाओं में वे कठिनाइयां सामने आती हैं, जिन्हें सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया में बहुत कम जगह मिलती है। श्रमिक साहित्य के बढ़ते प्रभाव से चीन के अधिकारी भी इसके प्रति सतर्क बताए जा रहे हैं। इसकी खास वजह यह है कि ये रचनाएं किसी राजनीतिक भाषण की तरह नहीं, बल्कि सीधे उस व्यक्ति की जिंदगी से निकलती हैं जो रोज काम करता है, कमाता है और अपने परिवार को चलाने की कोशिश करता है।

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कूरियर कर्मचारी की किताब कैसे बनी बेस्टसेलर?

प्रवासी श्रमिक हू अनयान ने कूरियर कर्मचारी समेत 19 अलग-अलग तरह के काम किए हैं। उन्होंने लॉजिस्टिक्स कंपनी में छंटनी करने वाले कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड और सुविधा स्टोर कर्मचारी जैसे काम भी किए। इन नौकरियों के दौरान आए अनुभवों और संघर्षों को उन्होंने इंटरनेट पर निबंधों के रूप में लिखा। बाद में 2023 में इन्हीं अनुभवों पर आधारित किताब प्रकाशित हुई। किताब को लोकप्रियता मिली और उसका अंग्रेजी में अनुवाद भी हुआ। यह उदाहरण बताता है कि श्रमिकों की जिंदगी पर लिखी रचनाएं केवल साहित्यिक वर्ग तक सीमित नहीं हैं। आम पाठक भी इनमें अपनी या अपने आसपास के लोगों की जिंदगी पहचान रहा है। यही वजह है कि श्रम साहित्य चीन में एक बड़े सामाजिक अनुभव को आवाज देने वाला माध्यम बनता जा रहा है।

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वांग जिबिंग को साहित्यिक सम्मान मिलने का क्या मतलब?

वांग जिबिंग की कविताओं को अब साहित्यिक दुनिया में भी गंभीरता से देखा जा रहा है। उनके कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को पिछले महीने प्रतिष्ठित लू शुन साहित्यिक पुरस्कार मिला। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में प्रोफेसर झू पिंग के अनुसार, चीनी लोगों की इस साहित्य में रुचि इसलिए बढ़ रही है क्योंकि उन्हें इसमें अपनी जिंदगी की सच्चाई दिखाई देती है। यही इस पूरे बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। मजदूर अब केवल उत्पादन या डिलीवरी व्यवस्था का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि अपनी कहानी खुद लिख रहे हैं। उनकी कविताएं और किताबें चीन में आर्थिक दबाव, काम की असुरक्षा और बेहतर जीवन की कमजोर होती उम्मीदों को सामने ला रही हैं। सवाल यह है कि जैसे-जैसे यह साहित्य और लोकप्रिय होगा, क्या चीन में श्रमिकों की वास्तविक स्थिति पर बहस भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगी?