Chehallum 2026 Date in India: चेहल्लुम कब है? जानिए 40वें दिन का क्या है इतिहास और महत्व

Published on 3 अग॰ 2026

अध्यात्म

  • Authored by: मोहित तिवारी
  • Updated Aug 3, 2026, 07:14 PM IST

Chehallum 2026 Date : मुहर्रम के 10वें आशूरा के ठीक चालीस दिन बाद चेहल्लुम आता है। इसमें लोग इमाम हुसैन इब्न अली इब्न अबी तालिब की शहादत को याद करते हैं। आइए जानते हैं कि यह 2026 में कब है।

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चेहल्लुम कब है

Chehallum 2026 Date : वर्ष 2026 में चेहल्लुम (अरबईन) 4 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह तारीख 20 सफर 1448 हिजरी के आसपास आती है। चेहल्लुम को अरबी भाषा में अरबईन कहा जाता है, जिसका अर्थ चालीस है।

चेहल्लुम इस्लामी इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की घटना के 40 दिन पूरे होने पर मनाया जाता है। यह दिन इमाम हुसैन इब्न अली इब्न अबी तालिब की शहादत की याद में मनाया जाता है। इमाम हुसैन, पैगंबर मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे थे।

इस अवसर पर विशेष रूप से शिया मुस्लिम समुदाय की ओर से मजलिस, दुआ, ज़ियारत और मातमी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई मुस्लिम इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि पेश करते हैं।

चेहल्लुम क्या है

चेहल्लुम शब्द फ़ारसी भाषा के 'चेहल' से बना है, जिसका अर्थ चालीस होता है। अरबी में इसे अरबईन कहा जाता है। इस्लामी परंपरा के अनुसार, चेहल्लुम इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत के 40वें दिन आता है। यह दिन कर्बला में दिए गए बलिदान, सब्र, इंसाफ और सच्चाई के संदेश को याद करने का अवसर माना जाता है।

क्या थी कर्बला की घटना

इस्लामी इतिहास के अनुसार 10 मुहर्रम 61 हिजरी (680 ईस्वी) को इराक के कर्बला मैदान में इमाम हुसैन इब्न अली और उनके साथियों के बीच यज़ीद इब्न मुआविया की सेना से मुकाबला हुआ। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि इमाम हुसैन अपने परिवार और साथियों के साथ कर्बला पहुंचे थे। कई दिनों तक उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 10वें मुहर्रम को हुए युद्ध में इमाम हुसैन और उनके साथ मौजूद कई लोगों ने शहादत प्राप्त की। कर्बला की घटना को इस्लामी इतिहास में अन्याय के सामने सत्य और सिद्धांतों पर कायम रहने की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

इमाम हुसैन के बलिदान को किया जाता है याद

इमाम हुसैन इब्न अली इब्न अबी तालिब पैगंबर मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे और हज़रत अली इब्न अबी तालिब तथा हज़रत फातिमा ज़हरा के पुत्र थे। इस्लामी इतिहास में इमाम हुसैन को उनके धैर्य, साहस और सत्य के लिए संघर्ष के कारण विशेष सम्मान प्राप्त है। कर्बला की घटना को उनके बलिदान और सिद्धांतों की दृढ़ता के रूप में याद किया जाता है।

शहीदों के लिए की जाती है दुआ

चेहल्लुम केवल एक ऐतिहासिक स्मरण दिवस नहीं है, बल्कि यह इमाम हुसैन के संदेश को याद करने का अवसर भी माना जाता है। इस दिन कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है और दुआ की जाती है। कई स्थानों पर मजलिस आयोजित होती हैं, जिनमें कर्बला की घटना का वर्णन किया जाता है। अकीदतमंद इस दिन सब्र, इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संदेश याद करते हैं।

कहां है चेहल्लुम का जिक्र

चेहल्लुम का उल्लेख पवित्र कुरआन में सीधे तौर पर नहीं मिलता है। इसका संबंध मुख्य रूप से इस्लामी इतिहास और रिवायतों से है। शिया इस्लामी स्रोतों में इमाम हसन अल-अस्करी से जुड़ी एक प्रसिद्ध रिवायत का उल्लेख मिलता है, जिसमें मोमिन की निशानियों में अरबईन की ज़ियारत को भी शामिल बताया गया है। यह रिवायत शिया परंपरा में चेहल्लुम की धार्मिक अहमियत का प्रमुख आधार मानी जाती है।

जाबिर इब्न अब्दुल्लाह की ज़ियारत

कई ऐतिहासिक इस्लामी स्रोतों में उल्लेख मिलता है कि पैगंबर मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सहाबी जाबिर इब्न अब्दुल्लाह अल-अंसारी ने इमाम हुसैन की शहादत के 40वें दिन कर्बला पहुंचकर उनकी कब्र की ज़ियारत की थी। इसी घटना को अरबईन की पहली ज़ियारत के रूप में भी याद किया जाता है।

चेहल्लुम के दिन क्या किया जाता है

चेहल्लुम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार धार्मिक परंपराएं देखने को मिलती हैं। इस दिन कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है। मजलिस का आयोजन किया जाता है। कुरआन की तिलावत की जाती है और दुआ और फातिहा पढ़ी जाती है। इसके साथ ही इमाम हुसैन की शहादत और कर्बला की घटना बयान की जाती है। मातमी जुलूस निकाले जाते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों के लिए लंगर और सबील की व्यवस्था की जाती है।

दुनिया में अरबईन का महत्व

इराक के कर्बला शहर में होने वाली अरबईन ज़ियारत दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल मानी जाती है। हर साल बड़ी संख्या में जायरीन पैदल यात्रा करते हुए कर्बला पहुंचते हैं और इमाम हुसैन के रौज़े पर हाज़िरी देते हैं। इस दौरान रास्तों में जायरीन के लिए खाने, पानी और रहने की व्यवस्था की जाती है।

भारत में चेहल्लुम का आयोजन कई शहरों में किया जाता है। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई, भोपाल, श्रीनगर और अन्य स्थानों पर मजलिस और पारंपरिक जुलूस आयोजित किए जाते हैं। बड़े आयोजनों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम करता है। चेहल्लुम इमाम हुसैन की उस कुर्बानी को याद करने का दिन है, जिसमें उन्होंने सत्य, इंसाफ और अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया।

कर्बला की घटना मुस्लिम इतिहास में सब्र, हिम्मत और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा के रूप में याद की जाती है। चेहल्लुम के माध्यम से इमाम हुसैन के संदेश और उनके बलिदान को दुनिया के सामने रखा जाता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं पर आधारित है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari

मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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