
मुंबई की मेयर रितु तावड़ेImage Credit source: Facebook/Ritu Tawde
बीएमसी मेयर आए दिन किसी ना किसी मुसीबत में फंसती नजर आ रही हैं. कभी बंगले की मरम्मत के किए करोड़ों का खर्च, तो कभी अपने लिए सरकारी पैसे से 35 करोड़ की आलीशान कार की मांग, तो कभी अपने सोशल मीडिया को चलाने के लिए बीएमसी से 25 लाख का टेंडर जारी करना, लेकिन अबकी बार मामला अलग है. इस बार आर्थिक तंगी के चलते बंद हो चुके एक कोचिंग संस्थान के संस्थापक को शिक्षण विभाग की ‘तकनीकी सलाहकार समिति’ में नियुक्त करने की सिफारिश मेयर ने की है, जिसको लेकर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है.
दरअसल, हाल ही में मुंबई की महापौर रितु तावड़े का एक कथित सिफारिशी पत्र सार्वजनिक हुआ, जिसमें उन्होंने शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजश्री शिरवाडकर से बीएमसी स्कूलों में नए शैक्षणिक उपक्रमों को लागू करने के लिए डॉ. श्रेणिक कोटेचा को मानद सलाहकार नियुक्त करने का अनुरोध किया था. डॉ. कोटेचा आर्थिक तंगी के चलते बंद हो चुके कोचिंग संस्थान ‘महेश ट्यूटोरियल्स’ के संचालक हैं.
मेयर ने पत्र को बताया फर्जी
इस मामले के तूल पकड़ते ही महापौर (मेयर) रितु तावड़े ने इस पत्र को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया है और उनके नाम और फर्जी साइन का इस्तेमाल करके उन्हें फंसाने की साजिश रची जा रही है. तावड़े ने पत्र पर किसी भी तरह के आधिकारिक आवक-जावक रजिस्टर नंबर के न होने का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की कड़ी जांच कराने का आश्वासन दिया है. साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं पर कार्यालय से दस्तावेज गायब करने की आशंका जताते हुए आरोप भी लगाए हैं.
वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा समिति की अध्यक्ष और बीजेपी नगरसेविका राजश्री शिरवाडकर ने यह स्वीकार कर महापौर के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है कि यह पत्र उन्हें महापौर कार्यालय से ही प्राप्त हुआ था. शिरवाडकर ने इस पत्र के आधार पर आगे की जरूरी कार्रवाई करने के लिए अपने कवरिंग लेटर के माध्यम से बीएमसी प्रशासन को निर्देश भी दिए थे, जिसका आदेश पत्र भी सामने आ चुका है. शिक्षा समिति अध्यक्ष के इस बयान के बाद दोनों पक्षों में बयानबाजी तेज हो गई है और इस नियुक्ति को लेकर नगर निगम के राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है.
विपक्ष ने मेयर पर लगाया आरोप
उधर बीएमसी की विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर ने आरोप लगाया कि मुंबई की मेयर रितु तावड़े मेयर बनने के पहले दिन से करप्शन कर रही हैं, उन्होंने कुछ लेकर इस व्यक्ति को पत्र दिया, वो भी बिना जांचे. दरअसल, मुंबई की महापौर रितु तावड़े का कार्यकाल शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है. पदभार ग्रहण करने के शुरुआती 6 महीनों के भीतर ही वो लगातार वित्तीय फिजूलखर्ची और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं.
35 लाख रुपये की आलीशान गाड़ी का विवाद
महापौर के पदभार संभालने के बाद सबसे पहला विवाद उनकी आधिकारिक कार को लेकर खड़ा हुआ. बीएमसी द्वारा महापौर के इस्तेमाल के लिए करीब 35 लाख रुपये की महंगी और आलीशान कार खरीदने की योजना सामने आई. विपक्ष ने इसे जनता के टैक्स के पैसों की सरासर बर्बादी बताया और आरोप लगाया कि शहर की बुनियादी समस्याओं को हल करने के बजाय महापौर व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं पर ध्यान दे रही हैं.
भायकला स्थित मेयर बंगले के रिनोवेशन पर करोड़ों का खर्च
रानी बाग (भायकला) स्थित महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले और उसके आसपास के नवीनीकरण को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ. बीएमसी द्वारा करीब 3.4 करोड़ (हालिया प्रस्ताव में लगभग 3 करोड़ रुपये) का टेंडर जारी किया गया. इसमें मीटिंग हॉल, लग्जरी फर्नीचर, लाइटिंग और परिसर के सौंदर्यीकरण का काम शामिल था. इसपर शिवसेना (यूबीटी) सहित विपक्षी दलों ने इसे बीएमसी कोष का दुरुपयोग करार देते हुए तीखा विरोध जताया.
हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख महापौर रितु तावड़े ने स्पष्ट किया कि यह टेंडर उनके बंगले के निजी नवीनीकरण के लिए नहीं, बल्कि चिड़ियाघर (जू) विभाग द्वारा आसपास के परिसर के विकास के लिए लाया गया था. इसके बावजूद विवाद खत्म न होने पर उन्होंने इस टेंडर को वापस लेने का निर्देश जारी किया.
सोशल मीडिया मैनेजमेंट के लिए 25.12 लाख का ठेका
हाल ही में महापौर के सोशल मीडिया प्रचार और जनसंपर्क के नाम पर 25,12,786 रुपये खर्च करने के प्रस्ताव पर बीएमसी में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है. दरअसल, महापौर कार्यालय के सोशल मीडिया को संभालने के लिए बिना टेंडर प्रक्रिया के एक निजी एजेंसी (‘रन टाइम सॉल्यूशंस’) को एक साल का सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव स्थायी समिति के सामने लाया गया. इस प्रस्ताव पर न केवल विपक्ष ने सवाल उठाए, बल्कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन की सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने भी इसका विरोध करते हुए जनता के पैसे के समझदारी से इस्तेमाल की सलाह दी.
इस विवाद के बाद महापौर ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह सेवा पिछले दो-तीन सालों से चली आ रही है और इस कांट्रैक्ट से उनका कोई सीधा लेना-देना नहीं है. हालांकि बढ़ते विरोध के बाद इस प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. इन लगातार उठते विवादों ने मुंबई नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली और महापौर कार्यालय के खर्चों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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विनोद जगदाले
विनोद जगदाले को 22 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है. वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं. ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और एक्सक्लूसिव खबरें भी सामने लेकर आए. उनकी पहचान निष्पक्ष, बेबाक और जमीनी पत्रकार के तौर पर की जाती है. विनोद जगदाले 10 से ज्यादा सम्मान से सम्मानित और जनहित की आवाज को मजबूती से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं.
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