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1 कच्चे तेल में अचानक लगी आग
बाजार गिरने की सबसे बड़ी और सीधी वजह है कच्चा तेल। ब्रेंट क्रूड करीब 2% उछलकर 106.5 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल बाहर से खरीदता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, भारत का आयात खर्च बढ़ जाता है, महंगाई का खतरा बढ़ता है और कंपनियों की कमाई (मार्जिन) पर चोट पड़ती है। इसी डर से घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
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2. अमेरिका और ईरान के बीच ठनी
मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक तनाव थमने के बजाय और भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और संघर्ष खत्म करने की बात कही गई थी। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि मसला सिर्फ बातचीत से सुलझ सकता है। तेल सप्लाई का सबसे अहम समुद्री रास्ता फंसने की आशंका से दुनियाभर के शेयर बाजारों में दहशत फैल गई।
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3. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली
ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ते ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसे खींचने तेज कर दिए हैं। शुक्रवार को ही विदेशी फंड्स ने एक ही दिन में करीब 3,696 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे। सोमवार को भी यह बिकवाली जारी रही। जब बड़े विदेशी निवेशक एकतरफा बिकवाली करते हैं, तो रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए बाजार को संभालना मुश्किल हो जाता है।
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चार्ट्स पर टूटा अहम सपोर्ट, अब निफ्टी में आगे क्या?
- टेक्निकल नजरिए से बाजार की चाल काफी कमजोर हो गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर बहुत महत्वपूर्ण था, लेकिन इंडेक्स इसके नीचे फिसल गया है।
- अगर गिरावट और गहरी होती है, तो अगला बड़ा सहारा 22,600 से 22,580 के दायरे में (200-वीक SMA) और उसके बाद 22,400 पर मिलेगा।
- रिकवरी की स्थिति में 23,300 और 23,500 पर रुकावट देखने को मिलेगी। जब तक निफ्टी 23,500 के पार नहीं निकलता, बाजार का मूड 'हर उछाल पर बिकवाली' (Sell on Rise) वाला ही बना रहेगा।
- बैंक निफ्टी 55,175 के पास अपने 100-वीक SMA के बेहद करीब है। अगर बैंकिंग शेयर यहां टिकते हैं, तभी बाजार को थोड़ा सहारा मिल सकता है।
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रिटेल इनवेस्टर क्या करें?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाजार में आई इस अचानक गिरावट से घबराकर हड़बड़ी में कोई फैसला न लें। नए ट्रेडर जब तक बाजार स्थिर न हो, एग्रेसिव खरीदारी से दूर रहें। अगर आप लॉन्ग टर्म के निवेशक हैं, तो अच्छी क्वालिटी वाले मजबूत फंडामेंटल शेयरों में धीरे-धीरे गिरावट पर नजर रखें। फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में बिना कड़े स्टॉपलॉस के कोई भी पोजीशन कैरी करने की गलती न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सूचना और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। ये किसी भी शेयर में निवेश, खरीद या बिक्री की सिफारिश (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (SEBI रजिस्टर्ड सलाहकार) से सलाह जरूर लें।
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