शक्कर तालाब के रहवासियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत: खंडवा में तालाब संरक्षण के नाम पर तोड़े 87 मकान, बचे 25 कोर्ट गए; 3 को सुनवाई - Khandwa News

Published on 1 अग॰ 2026

खंडवा के शक्कर तालाब क्षेत्र में स्थित 25 मकानों पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सामाजिक संस्था एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने सुप्रीम कोर्ट

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पिछले साल 87 मकान हटाए गए थे

शहर के बीच स्थित शक्कर तालाब वर्षों पुराना जलाशय है। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और तालाब में नियमित जलभराव नहीं होने से इसकी जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हो गया। तालाब के पुनर्जीवन और वहां पार्क विकसित करने की योजना के तहत नगर निगम ने पिछले वर्ष जून में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था।

इस अभियान के दौरान चिन्हित 112 मकानों में से 87 मकानों को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया था। हालांकि शेष 25 मकानों पर कार्रवाई नहीं हो सकी, क्योंकि वहां रहने वाले परिवारों ने न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश और कुछ शासकीय दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

हाईकोर्ट ने दिए थे हटाने के आदेश

बाद में मामले की सुनवाई के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट ने इन शेष 25 मकानों को भी हटाने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ APCR ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। इसके चलते नगर निगम फिलहाल इन 25 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं कर सकेगा। अब मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जिसमें आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

तालाब संरक्षण और आवास का कानूनी विवाद

यह मामला एक ओर शक्कर तालाब के संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़ा है, तो दूसरी ओर वर्षों से वहां रह रहे परिवारों के आवास और उनके दस्तावेजों से भी संबंधित है। ऐसे में अब सभी की नजरें 3 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।

रसूखदारों को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप

याचिकाकर्ताओं में शामिल जाहिद अहमद ने आरोप लगाया कि राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 1983 में ही शक्कर तालाब को समाप्त कर दिया गया था। उनका कहना है कि तालाब की जमीन का अलग-अलग हिस्सों में डायवर्सन कर हाउसिंग बोर्ड, सुलभ शौचालय, स्लॉटर हाउस और सड़क निर्माण के लिए उपयोग किया जा चुका है। ऐसे में अब तालाब के पुनर्जीवन का दावा व्यावहारिक नहीं लगता।

उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले अधिकांश परिवार पिछले 25 से 30 वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यदि विस्थापन किया जाता है तो प्रत्येक परिवार को कम से कम 300 वर्गफीट जमीन मकान बनाने के लिए उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बस्ती हटने से आसपास की कुछ निजी जमीनों की कीमत बढ़ेगी, जिससे प्रभावशाली लोगों को लाभ मिल सकता है।