8 मीटर की नदी, 1782 मीटर का पुल... राजस्थानी अफसरों के आंकड़ों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

Published on 26 अक्टू॰ 2026

8 मीटर की नदी, 1782 मीटर का पुल… राजस्थानी अफसरों के आंकड़ों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

लूनी नदी के आंकड़ों पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

नदी की चौड़ाई 8 मीटर बताई जाए, जबकि उस पर बने पुल की चौड़ाई करीब 1,782 मीटर हो, तो सवाल उठना लाजिमी है. राजस्थान की जोजरी-लूनी नदी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसा ही मामला आया. नदी में प्रदूषण और उसकी सीमाएं तय करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के अधिकारियों के आंकड़ों पर गंभीर नाराजगी जताई.

कोर्ट ने सवाल उठाया कि अधिकारियों ने नदी की चौड़ाई तय करने के लिए सूखे मौसम में बहने वाले पानी को आधार कैसे बना लिया? अदालत ने यह भी कहा कि उसके आदेश का गलत मतलब निकालकर पेश किया गया है. इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है.

जस्टिस ने अधिकारियों से किया सवाल

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान के अधिकारियों से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के किस आदेश में नदी की चौड़ाई सूखे मौसम में बहने वाले पानी के आधार पर तय करने की अनुमति दी गई है. अदालत ने कहा कि अधिकारी यह बताएं कि उन्हें ऐसा करने का निर्देश कहां से मिला. कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि नदी की सीमाएं तय करने के लिए सूखे मौसम में पानी के बहाव को आधार बनाया गया.

आंकड़ों के अंतर पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

अदालत के मुताबिक, नदी की वास्तविक सीमाएं समझने के लिए सिर्फ कम पानी वाले दिनों को देखना सही नहीं है. सुनवाई के दौरान लूनी नदी का उदाहरण देते हुए अदालत ने अधिकारियों के आंकड़ों पर सवाल उठाए. जस्टिस मेहता ने बताया कि नदी पर बने एक पुल की चौड़ाई करीब 1,782 मीटर बताई गई, जबकि अधिकारियों ने नदी के बहाव की चौड़ाई महज 8 मीटर दर्ज की. इस अंतर पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने आंकड़ों को बेतुका बताया.

जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने की बात

जस्टिस मेहता ने स्पष्ट किया कि नदी की सीमाएं केवल सूखे मौसम में पानी की स्थिति देखकर तय नहीं की जा सकतीं. इसके बजाय बाढ़ के दौरान नदी में पानी फैलने की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इन नदियों में हर दो से तीन साल में बाढ़ आती है. अदालत ने कहा कि उसके आदेश का गलत मतलब निकालकर इस्तेमाल करना गंभीर मामला है. सुनवाई के दौरान जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने की बात भी कही गई. कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर किस आदेश के आधार पर अधिकारियों ने इस तरह की जानकारी जारी की.

‘पता लगाना है कि गलती जानबूझकर की या नहीं’

राजस्थान सरकार की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने कहा कि यह पता लगाना होगा कि गलती जानबूझकर की गई या नहीं. अदालत ने यह भी कहा कि अगर समिति को आंकड़ों में गड़बड़ी की जानकारी थी, तो उसे इस मुद्दे को पहले ही सामने लाना चाहिए था. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाए कि लूनी एक मौसमी नदी है और सूखे मौसम में इसमें केवल 15.3 एमएलडी सीवेज का पानी बहता है.

अदालत ने समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें भी नदी के बहाव के रास्तों और किनारों से जुड़े आंकड़ों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं बताया गया है. यह मामला नदी में प्रदूषण के साथ-साथ उसकी वास्तविक सीमाएं तय करने और सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है.

पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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