करोड़ों के कर्ज और कंपनी पर कब्जे की लालच, उद्योगपति पर बिजनेस पार्टनर ने कराया जानलेवा हमला; 7 गिरफ्तार

Published on 1 अग॰ 2026

वसई (उत्तम हिन्दू न्यूज): व्यापारिक साझेदारी में पैसों का लालच और कर्ज का बोझ किस कदर खौफनाक रूप ले सकता है, इसका एक सनसनीखेज मामला महाराष्ट्र के वसई से सामने आया है। यहां 32 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय विवाद और कंपनी पर पूरा नियंत्रण हासिल करने की नीयत से एक बिजनेस पार्टनर ने अपने ही सहयोगी की हत्या की सुपारी दे दी। जीएसएम फॉइल्स (GSM Foils) के प्रबंध निदेशक और जाने-माने उद्योगपति मोहनसिंह परमार पर उनकी ही फैक्ट्री के बाहर नकाबपोश बदमाशों ने सरेआम फायरिंग कर दी। इस दुस्साहसिक हमले में वालिव पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमले के मास्टरमाइंड बिजनेस पार्टनर समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

32 करोड़ का कर्ज और हत्या की साजिश

मीरा-भायंदर, वसई-विरार (MBVV) पुलिस के पुलिस उपायुक्त (जोन II) अशोक विरकर ने इस साजिश का पर्दाफाश करते हुए बताया कि हमले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि परमार का बिजनेस पार्टनर सागर भानुशाली है। पुलिस के मुताबिक, सागर भानुशाली को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके कारण उस पर करोड़ों रुपये का कर्ज चढ़ गया था। इस कर्ज से उबरने के लिए भानुशाली ने परमार को कंपनी में अपने शेयर लगभग 32 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए राजी कर लिया था। परमार ने यह भारी-भरकम रकम भानुशाली को चुका भी दी थी। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि भानुशाली ने हत्या की साजिश इसलिए रची ताकि अगर परमार मारा जाता है, तो उसे 32 करोड़ की यह रकम वापस नहीं लौटानी पड़ेगी और कंपनी पर उसका पूरा मालिकाना हक भी हो जाएगा।

महज 5 लाख में दी गई हत्या की सुपारी

इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए भानुशाली ने 5 लाख रुपये में कॉन्ट्रैक्ट किलर्स (सुपारी किलर) को काम सौंपा था। पुलिस का दावा है कि इस पूरी रकम में से महज कुछ हजार रुपये ही एडवांस के तौर पर विजय प्रजापति नामक शख्स को दिए गए थे। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड सागर भानुशाली के अलावा, यूपी के आजमगढ़ और बलिया निवासी शूटर सुजीत पांडे और मनोज ठठेरा, विजयकुमार प्रजापति, अनूप प्रजापति, विजय कुमार विश्वकर्मा, गोकुल गौतम और गोरेगांव निवासी मोहम्मद यूसुफ खान को धर दबोचा है।

कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?

पुलिस के अनुसार, यह जानलेवा हमला 24 जुलाई की रात करीब 8 बजे वसई ईस्ट के डायमंड इंडस्ट्रियल एस्टेट स्थित जीएसएम फॉइल्स लिमिटेड के बाहर हुआ। फैक्ट्री से निकलकर परमार जैसे ही अपनी महिंद्रा थार गाड़ी की तरफ बढ़े, वहां मोटरसाइकिल पर पहले से घात लगाए बैठे सुजीत पांडे और अनूप प्रजापति ने अपने खूनी मंसूबों को अंजाम दिया। नकाब पहने पांडे ने एक वैगनआर के पीछे से परमार को उनके नाम ‘मोहन’ से आवाज लगाई। जैसे ही परमार पलटे, पांडे ने कुछ ही फीट की दूरी से उनकी छाती पर गोली दाग दी। गोली लगते ही परमार मदद के लिए चिल्लाते हुए जमीन पर गिर पड़े।

पिस्तौल जाम होने से बची जान, सिर पर किया वार

एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार, जब कंपनी का कर्मचारी नरेंद्र रोहिदास बोराडे परमार की मदद के लिए दौड़ा, तो शूटर ने उस पर भी पिस्तौल तान दी और दोबारा फायरिंग करने की कोशिश की, लेकिन गनीमत रही कि पिस्तौल जाम हो गई। इसके बाद शूटर ने परमार के सिर पर पिस्तौल की बट से जोरदार वार किया और फैक्ट्री के गेट पर इंतजार कर रहे अनूप प्रजापति की मोटरसाइकिल पर बैठकर फरार हो गया। इस हमले में परमार की दाहिनी छाती में गोली लगी है और बाईं आंख के ऊपर सिर में गहरी चोट आई है। परमार फिलहाल खतरे से बाहर हैं और नालासोपारा के रिद्धि विनायक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

पुलिस की तकनीकी जांच से यूपी में दबोचे गए आरोपी

पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए औद्योगिक क्षेत्र और आसपास की सड़कों के सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और आईडीपीआर का बारीकी से विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस की टीमें सीधे उत्तर प्रदेश पहुंचीं और वहां से आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विश्वकर्मा ने हथियार, वाहन और शूटरों की व्यवस्था की थी, जबकि ठठेरा ने यूपी से अवैध हथियार मंगवाए थे। वहीं, अनूप प्रजापति ने इलाके की रेकी करने से लेकर मोटरसाइकिल चलाने और सबूत मिटाने तक का काम किया था। फिलहाल सभी आरोपियों पर हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश, आर्म्स एक्ट और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

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