September 15, 2026 35 बार देखा गया
बिहार में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए। कई परिवारों का घर, सामान सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन सरकार की ओर से आर्थिक मदद की गई कई दिनों बाद। इतनी बड़ी तबाही के बाद मदद के लिए 10-15 दिन का इंतजार क्यों करना पड़ा?

बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (फोटो साभार: सम्राट चौधरी एक्स अकाउंट)
बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को परिवारों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा आर्थिक मदद की गई। आज पटना के एक संकल्प सभागार में कार्यक्रम में 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों को 7-7 हजार रुपए दिया गया। ये डीबीटी के माध्यम से दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार कुल 579.3 करोड़ रुपए की सहायता राशि परिवारों के खातों में ट्रांसफ़र की गई।
#Live: बाढ़ प्रभावित परिवारों को डी.बी.टी. के माध्यम से राहत राशि का अंतरण कार्यक्रम… https://t.co/ScGMFzoM5Y
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 15, 2026
बता दें बीते कुछ दिनों से बिहार बाढ़ से ग्रसित है। बाढ़ का असर पूरे 15 जिलों में अपना कब्जा जमाया। संकल्प सभागार में कार्यक्रम में बताए गए आँकड़ों के मुताबिक तक़रीबन 28 प्रखंडो में 576 पंचायतों में 49 लाख 67 हजार 116 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। लगभग 28 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया। ये भी बताया कि कुल 15 बाढ़ राहत शिविर चले हैं।
15 जिलों में पटना, वैशाली, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर , भोजपुर, सारण, लखीसराय, मुंगेर, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, कटिहार, ख़गड़िया, भागलपुर ये जिले बाढ़ के चपेट में हैं।
बिहार में बाढ़ आए लगभग 10 से 15 दिन होने को हैं। लगभग 48 लाख लोग इससे प्रभावित हुए और कई जगहों पर नदियाँ अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पटना के समकुंडा गांव में लोगों का घर पानी से भरा हुआ था। न खाने की व्यवस्था और न ही सोने की। घर का सामान बारिश से खराब हो गया।
खबर लहरिया द्वारा रिपोर्टिंग से सामने आया कि पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के संपुरा गांव में बाढ़ के पानी में डूबने से 6 वर्षीय बच्ची की मौत भी हो गई। जब लोगों से बात की गई तो सामने आया कि वहां कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची। न ही किसी सरकारी अधिकारी हालत देखने पहुंचे।
क्या 7 हजार रुपए बाढ़ प्रभावितों के लिए पर्याप्त है?
इतना सब होने के बाद इतने दिनों बाद सरकार ने आर्थिक मदद की है। क्या सरकार को बिहार के बाढ़ प्रभावितों लोगों की मदद इससे पहले नहीं करनी चाहिए थी? जिन परिवारों को घर डूब गए, सामान बह गए और उनके पास अपने शरीर के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा, उनके लिए 7 हजार रुपए कितने काम आएँगे?
आज की महंगाई के दौर में 7 हजार रुपए से क्या कोई परिवार अपना घर दोबारा बना सकता है? क्या इससे बह गया पूरा सामान वापस आ सकता है? शायद नहीं। 7 हजार रुपए तो मुश्किल से किसी परिवार के कुछ दिनों के खाने का खर्च निकाल पाएँगे। क्या बिहार सरकार (मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी) की बस इतनी ही जिम्मेदारी है?
दूसरी तरफ नजर डालें तो बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों को और अन्य लोगों द्वारा भी मदद किया गया है। तब जब उनको जरुरत थी।
– राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू यादव ने अपने निजी स्तर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों की मदद की। उन्हें राहत सामग्री चावल, दाल सूखा राशन और सेनेटरी पेड जैसे जरुरत की चीजों के साथ मदद की। इसके अलावा नगद राशि भी दिया गया।
– कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और यूट्यूबर ने भी लोगों की मदद की है। जैसे फिजिक्सवाला के संस्थापक अलख पांडे द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में दौरा किया गया। परिवारों को व्यक्तिगत तौर पर मदद किया गया।
– आदित्य काछवे और उनकी टीम ने बाढ़ पीड़ितों के लिए फंड जुटाने (Fundraising) और राहत सामग्री पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। आदित्य काछवे भारत के एक जाने-माने उद्यमी एआई (AI) शिक्षक और Be10x के सह-संस्थापक हैं।
– आर्यन केल्विन जो और मीडिया समूहों के साथ मिलकर बिहार बाढ़ से प्रभावित लोगों को मदद की। साथ ही जागरूकता बढ़ाने का भी काम किया। आर्यन केल्विन एक प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेटर, कॉमेडियन और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं।
– कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ भी बाढ़ के बीच लोगों के बीच मदद करने जुटे। पटना जेसुइट्स सोसाइटी, बीडीएसएसएस (BDSSS), रेहैब इंडिया फाउंडेशन और कई स्थानीय स्वयंसेवक संगठन राहत शिविर चलाने और खाना बाँटने का काम किए।
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