छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त जमीन का मुआवजा मांगना पड़ा भारी, एनएचएआई वसूलेगा 50 से 70 लाख - demanding compensation for additional land in chhattisgarh proves costly

Published on 15 सित॰ 2026

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम सकरी में खसरा नंबर 407/5 के भू-स्वामियों द्वारा तीन से चार डिसमिल अतिरिक्त जमीन का दावा करना भारी पड़ गया है।

छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त जमीन का मुआवजा मांगना पड़ा भारी (सांकेतिक तस्वीर)

छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त जमीन का मुआवजा मांगना पड़ा भारी (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. कुल रकबा 25 डिसमिल से बढ़कर लगभग 28 डिसमिल हुआ

  2. पूर्व में भू-स्वामियों को मिला था 1.43 करोड़ रुपये का मुआवजा

जेएनएन, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम सकरी में खसरा नंबर 407/5 के भू-स्वामियों द्वारा तीन से चार डिसमिल अतिरिक्त जमीन का दावा करना भारी पड़ गया है।

हाई कोर्ट के निर्देश पर हुए भौतिक सत्यापन में कुल रकबा 25 डिसमिल से बढ़कर लगभग 28 डिसमिल हो गया है।

राजस्व नियमों के अनुसार, 25 डिसमिल की सीमा पार होते ही पूरा भूखंड छोटे आवासीय-व्यावसायिक स्लैब (वर्गफुट/डिसमिल दर) से बाहर होकर थोक हेक्टेयर गाइडलाइन दर के दायरे में आ जाता है, जो काफी कम होती है।

इस तकनीकी फेरबदल के कारण मुआवजा राशि में भारी गिरावट आई है। इसे देखते हुए एसडीएम न्यायालय ने एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए हैं। अब एनएचएआई पूर्व में भुगतान किए गए 1.43 करोड़ रुपये में से 50 से 70 लाख रुपये तक की अतिरिक्त राशि की रिकवरी करेगा।

ये है पूरा मामला

खसरा नंबर 407/5 के भू-स्वामियों की लगभग 25 डिसमिल जमीन एनएच निर्माण के तहत अधिग्रहित हुई थी।

इसका मुआवजा छोटे आवासीय-व्यावसायिक भूखंड के स्लैब (वर्गफुट/डिसमिल दर) से 1.43 करोड़ रुपये उन्हें मिल चुका है। इसके बाद भू-स्वामियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर लगभग तीन से चार डिसमिल जमीन और अधिक दबने का दावा किया था।

कोर्ट के निर्देश पर तहसीलदार और एनएचएआई की संयुक्त टीम ने भौतिक सत्यापन किया, जिसमें अतिरिक्त रकबा प्रभावित होना पाया गया। यहीं राजस्व गाइडलाइन का पेचीदा नियम फंस गया।

नियमानुसार 25 डिसमिल तक की भूमि का मूल्यांकन वर्गफुट या खुदरा डिसमिल की उच्च दर पर होता है। लेकिन कुल रकबा 25 डिसमिल पार कर लगभग 28 डिसमिल होते ही पूरे भूखंड की गणना थोक हेक्टेयर गाइडलाइन दर से होने का नियम है। हेक्टेयर दर, वर्गफुट दर की तुलना में कई गुना कम होती है।

इस तकनीकी फेरबदल के कारण कुल मूल्यांकन 1.43 करोड़ रुपये से काफी कम हो गया है। इस आधार पर एसडीएम न्यायालय ने एनएचएआइ को पुनर्मूल्यांकन करने और अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की रिकवरी के निर्देश दिए हैं।