Retirement Planning: नौकरी करते हुए हर महीने की पहली तारीख को जब मोबाइल पर सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है, तो एक अलग ही सुकून मिलता है. तब हमें घर के खर्च, ईएमआई या राशन की ज्यादा फिक्र नहीं होती. लेकिन जरा सोचिए, जब आप 60 साल के बाद रिटायर हो जाएंगे या आपका काम आगे जाकर काम बंद हो जाएंगा, तब क्या होगा? आपकी नियमित आमदनी तो बंद हो जाएगी, लेकिन खर्चे बिल्कुल नहीं रुकेंगे. घर का राशन, दवाइयां, बिजली का बिल, और रोजमर्रा की जरूरतें बुढ़ापे में भी वैसी ही रहेंगी.
ऐसे में मन में यह सवाल आना लाजमी है कि रिटायरमेंट के बाद अगर हर महीने 50,000 रुपये की जरूरत हो, तो इसके लिए आज से कितनी बचत करनी होगी? आइए इस पूरे कैलकुलेशन को समझते हैं, ताकि आप भी बिना किसी आर्थिक तनाव के अपना बुढ़ापा गुजार सकें.
₹50,000 महीने के लिए कितना बड़ा फंड चाहिए?
अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपके हाथ में हर महीने 50,000 रुपये आएं, तो आपको साल भर में 6 लाख रुपये की जरूरत होगी. अब सवाल है कि यह 6 लाख रुपये हर साल कहां से आएंगे? इसके लिए वित्तीय सलाहकार ‘4% निकासी नियम’ (4% Withdrawal Rule) का इस्तेमाल करते हैं.
यह नियम कहता है कि आपको इतना पैसा जमा करना चाहिए कि अगर आप उसका 4 फीसदी हिस्सा निकालें, तो वह आपकी साल भर की जरूरत को पूरा कर दे. इसका सीधा सा गणित यह है, अगर आपको सालाना 6 लाख रुपये चाहिए, तो आपका कुल रिटायरमेंट फंड करीब 1.5 करोड़ रुपये होना चाहिए. (1.5 करोड़ का 4% = 6 लाख रुपये).
जब आप 1.5 करोड़ रुपये जमा कर लेते हैं और पहले साल 6 लाख रुपये निकालते हैं, तो बाकी बचे पैसे पर मिलने वाला रिटर्न आपके फंड को तेजी से खत्म नहीं होने देता. इस तरह आपका पैसा 25 से 30 साल तक आराम से चल सकता है.
| हर महीने चाहिए (पेंशन) | सालाना जरूरत | 4% नियम के अनुसार जरूरी कॉर्पस |
| ₹30,000 | ₹3.60 लाख | ₹90 लाख |
| ₹50,000 | ₹6 लाख | ₹1.50 करोड़ |
| ₹75,000 | ₹9 लाख | ₹2.25 करोड़ |
| ₹1,00,000 | ₹12 लाख | ₹3 करोड़ |
समय ही पैसा है… 1.5 करोड़ रुपये कैसे जुटाएं?
अब 1.5 करोड़ रुपये का आंकड़ा सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आप सही समय पर निवेश की शुरुआत करते हैं, तो यह रकम आसानी से जुटाई जा सकती है.
मान लीजिए आपकी उम्र 40 साल है और आप 60 की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं. आपके पास निवेश के लिए 20 साल का वक्त है. वहीं, अगर आपकी उम्र 50 साल है, तो आपके पास सिर्फ 10 साल बचे हैं. इन दोनों स्थितियों में आपकी जेब पर पड़ने वाले बोझ में जमीन-आसमान का अंतर होगा.
1.5 करोड़ रुपये के लक्ष्य के लिए मासिक SIP का कैलकुलेशन
| अनुमानित सालाना रिटर्न | 20 साल बाकी (मासिक SIP) | 10 साल बाकी (मासिक SIP) |
| 10% | ₹19,800 | ₹72,000 |
| 12% | ₹15,000 | ₹66,000 |
| 15% | ₹10,500 | ₹57,000 |
अगर आप 20 साल पहले शुरुआत करते हैं और आपको 12% का औसत रिटर्न मिलता है, तो सिर्फ 15,000 रुपये महीने की SIP से आप 1.5 करोड़ रुपये जोड़ सकते हैं. लेकिन अगर आप 10 साल की देरी करते हैं, तो उसी लक्ष्य के लिए आपको हर महीने 66,000 रुपये लगाने होंगे, जो एक आम नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए काफी मुश्किल हो सकता है.
सबसे बड़ा दुश्मन है महंगाई, इसे हल्के में न लें
रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय लोग अक्सर एक बहुत बड़ी गलती करते हैं. वे आज के खर्च को ही भविष्य का खर्च मान लेते हैं. सच तो यह है कि समय के साथ महंगाई हर चीज की कीमत बढ़ा देती है.
मान लेते हैं कि आज आपका घर 50,000 रुपये में आराम से चल रहा है. अगर महंगाई औसतन 6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ती है, तो 20 साल बाद आज की 50,000 रुपये की वैल्यू गिर जाएगी. उसी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए 20 साल बाद आपको करीब 1.60 लाख रुपये महीने की जरूरत होगी. वहीं, 25 साल बाद यह खर्च 2.15 लाख रुपये प्रति माह पहुंच सकता है. इसलिए, अपनी जरूरत का हिसाब लगाते वक्त भविष्य की महंगाई को जरूर ध्यान में रखें.
रिटायरमेंट प्लानिंग में कभी न करें ये भारी गलतियां
- सारा पैसा एफडी में न डालें: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा सुरक्षित जरूर रहता है, लेकिन इसका ब्याज लंबी अवधि में महंगाई को मात देने के लिए काफी नहीं होता. अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी या म्यूचुअल फंड को जरूर जगह दें.
- पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लें: बुढ़ापे में सबसे ज्यादा खर्च बीमारियों पर होता है. अगर आपके पास एक अच्छी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी नहीं है, तो एक ही झटके में आपकी सालों की बचत अस्पताल के बिल में जा सकती है. इसलिए अपनी मेडिकल जरूरतों के लिए रिटायरमेंट फंड को कभी न तोड़ें.
- अंधाधुंध पैसा न निकालें: रिटायरमेंट फंड से जरूरत से ज्यादा पैसा निकालने से बचें. तय नियम के हिसाब से ही निकासी करें, वरना आपका पैसा आपके जीवित रहते ही खत्म हो जाएगा.
- समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करें: हर दो-तीन साल में अपने निवेश को चेक करें. आपकी उम्र और बाजार के हालात के हिसाब से निवेश और निकासी की रणनीति में बदलाव करते रहना जरूरी है.

विभव शुक्ला
विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.
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