4KM तक गूंजती है दहाड़…एक झटके में तोड़ती है गर्दन: बिहार की खूंखार बाघिन बंगाल क्यों जा रही, नए जंगल में कैसे रहेगी - Bihar News

Published on 15 सित॰ 2026

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से रॉयल बंगाल टाइगर को पश्चिम बंगाल के बक्सा भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सब ठीक रहा तो 2 अक्टूबर को बाघिन शिफ्ट हो जाएगी।

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बिहार से बाघिन बंगाल क्यों जा रही, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से ही क्यों, इसकी खासियतें, जानेंगे; बूझे की नाही में...।

सवाल-1ः बिहार से टाइगर को पश्चिम बंगाल क्यों भेजा जा रहा?

जवाबः पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से स्थायी बाघों की संख्या लगभग न के बराबर है। यही कारण है कि केंद्र सरकार 13वें बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत बक्सा में बाघों का पुनर्वास कर उनकी आबादी बढ़ाना चाहती है।

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बक्सा के आसपास सर्दियों के दौरान भूटान और असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान से मेल (नर) बाघ आते-जाते हैं। यहां फीमेल यानी मादा बाघ को लाकर बसाने से मेल बाघ आकर्षित होंगे, जिससे उनकी संख्या बढ़ेगी।

  • बिहार वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WWI) की टीम ने अगस्त के आखिरी और सितंबर के पहले सप्ताह में शुरुआती सर्वे किया था। इसमें 10-12 बाघिनों को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
  • अब इन बाघिनों में से एक बाघिन को सिलेक्ट करने के लिए 15 सितंबर की रात सुंदरबन टाइगर रिजर्व और बक्सा टाइगर रिजर्व की एक टीम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) पहुंची है, जो 8 से 10 दिन तक रहेगी।
  • अधिकारियों ने बताया कि NTCA की मंजूरी के बाद फिलहाल VTR से एक बाघिन को वहां भेजा जाएगा। बाघिन की पहचान वाल्मीकि, सुंदरबन और बक्सा टाइगर रिजर्व के अधिकारी और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के एक्सपर्टस की संयुक्त टीम करेगी।
  • यह चयन सिर्फ बाघिन को देखकर नहीं किया जाएगा। टीम संभावित बाघिनों का बारीकी से आकलन करेगी। इसके बाद ही उसे पकड़ने और ट्रांसलोकेशन की योजना फाइनल करेगी।
  • बाघिन को बेहोश करने और एक रिजर्व से दूसरे रिजर्व तक ले जाने से पहले उसकी सेहत, उम्र, व्यवहार और ट्रांसलोकेशन के लिए उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। यानी बक्सा के लिए ऐसी बाघिन चुनी जाएगी, जो नए इलाके में ट्रांसफर करने पर सर्वाइव कर पाए।
  • पूरी प्रक्रिया पर NTCA की तीन सदस्यों वाली एक्सपर्ट टीम भी नजर रख रही है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह टीम इसी हफ्ते के आखिर तक बक्सा टाइगर रिजर्व का दौरा कर सकती है।
  • VTR के संरक्षक और डायरेक्टर गौरव ओझा ने बताया, 'फिलहाल बक्सा टाइगर रिजर्व में VTR से एक बाघिन शिफ्ट की जाएगी। सिलेक्टेड बाघिन को 2 अक्टूबर 2026 को बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाकर बसाने की तैयारी है।'
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में इस वक्त 65 से ज्यादा बंगाल टाइगर हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड है। फोटो क्रेडिट-VTR.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में इस वक्त 65 से ज्यादा बंगाल टाइगर हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड है। फोटो क्रेडिट-VTR.

सवाल-2ः बाघिन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को ही क्यों चुना गया?

जवाबः इसके पीछे 2 मुख्य वजहें हैं…

1- सेम इकोसिस्टम

बक्सा टाइगर रिजर्व और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का इकोसिस्टम यानी परिस्थिति एक जैसी है। बंगाल के बाघ हाथी और गैंडा जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों के साथ रहते हैं। हिरण, नील गाय, भैंस और सुअर जैसे जानवरों का शिकार करते हैं।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाघ भी इन्हीं जानवरों का शिकार करते हैं। यहां हाथी और गैंडा कम हैं, लेकिन बाघ इन्हें देखने के आदी हैं।

ह्यूमन वाइल्डलाइफ कनफ्लिक्ट एक्सपर्ट अभिषेक बताते हैं, ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाघ के लिए बक्सा टाइगर रिजर्व में रहना मुश्किल नहीं होगा। दोनों वन क्षेत्र हिमालय के तराई क्षेत्र में आते हैं। दोनों जगह एक ही प्रजाति बंगाल टाइगर के बाघ हैं। इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी।’

2- VTR में बाघों की बढ़ती संख्या, घटता एरिया

बाघ टेरिटोरियल जानवर हैं। मतलब वे अपना इलाका बनाकर रहते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 899.38 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें बाघों के लिए महत्वपूर्ण आवास 598.45 वर्ग किलोमीटर और बफर एरिया 300.93 वर्ग किलोमीटर में है।

फिलहाल VTR में 65 प्लस बाघ हैं। NCTA और WWI के मुताबिक, एक मेल बाघ को रहने के लिए कम से कम 60 वर्ग किलोमीटर और फीमेल बाघ के लिए कम से कम 20 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए। अगर मेल-फीमेल टाइगर एक साथ रहे तो उन्हें कम से कम 60 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए।

इस हिसाब से देखें तो VTR में अभी एक बाघ का जोड़ा सिर्फ 18 वर्ग किलोमीटर में है। ऐसे में यहां से बाघ को ट्रांसफर करना जरूरी है।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड एंड ग्लोबल टाइगर फोरम के मुताबिक, दुनिया के 70 फीसदी बाघ भारत में ही रहते हैं। फोटो क्रेडिट-VTR.

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड एंड ग्लोबल टाइगर फोरम के मुताबिक, दुनिया के 70 फीसदी बाघ भारत में ही रहते हैं। फोटो क्रेडिट-VTR.

सवाल-3ः बंगाल जा रही बाघिन की खासियत क्या है?

जवाबः VTR में बंगाल टाइगर (पैंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस) रहते हैं। यह आकार में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बाघ प्रजाति है। इससे बड़ा सिर्फ रूस के साइबेरिया में पाया जाने वाला बाघ ही है। नेशनल ज्योग्रॉफिक, NCTA और WWI के मुताबिक जानिए इनकी खासियतें…

  • लंबाई-वजनः 7 से 9 फीट लंबा बंगाल टाइगर जंगल में 10 से 12 साल तक जिंदा रहता है। एक वयस्क मेल बंगाल टाइगर की लंबाई 7 से 10 फीट (पूंछ सहित) और वजन लगभग 200 से 260 किलोग्राम (या उससे अधिक) होता है। वहीं, फीमेल टाइगर का वजन 110 से 160 किलोग्राम के बीच होता है।
  • बच्चे का जन्मः बाघिन 2 से 6 बच्चों (शावकों) को एक साथ जन्म देती है। उन्हें पालने-पोसने में मेल टाइगर खास मदद नहीं करते। बच्चे 18 महीने की उम्र तक शिकार नहीं कर पाते हैं। इस दौरान वे अपनी मां के साथ ही रहते हैं। इसके बाद अपना इलाका खोजने के लिए अलग हो जाते हैं।
  • भोजनः एक भूखा बाघ एक रात में 27 किलो तक मांस खा सकता है। हालांकि, आमतौर पर इससे कम ही खाते हैं। बंगाल टाइगर इंसानों से दूर रहते हैं। हालांकि, कुछ बाघ खतरनाक आदमखोर बन जाते हैं। ऐसे जानवर अक्सर बीमार होते हैं।
  • अनोखी धारियां: इनका रंग गहरा नारंगी या पीला होता है, जिस पर गहरी काली या भूरी धारियां बनी होती हैं। मनुष्य के फिंगरप्रिंट की तरह हर बाघ की शरीर की धारियां अलग और अनोखी होती हैं, जो उन्हें जंगल में छिपने में मदद करती हैं।
  • खतरनाक दांत और जबड़े: बिल्ली प्रजाति के जानवरों में इनके दांत सबसे लंबे होते हैं, जो करीब 4 इंच तक बढ़ सकते हैं। यह एक ही झटके में शिकार की गर्दन या रीढ़ की हड्डी तोड़ सकते हैं।
  • रफ्तार: भारी-भरकम शरीर होने के बावजूद ये 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं।
  • दहाड़: इनकी दहाड़ लगभग 4 किलोमीटर दूर तक गूंज सकती है।
  • शानदार तैराक: बिल्ली प्रजाति के दूसरे जानवरों से अलग, बंगाल टाइगर को पानी में तैरना बहुत पसंद है। ये पानी में कई किलोमीटर तक बड़ी आसानी से तैर लेते हैं।
  • ताकतवर जबड़े और पंजे: इनके नुकीले दांत 7.5 से 10 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं। इनकी मदद से ये अपने शिकार को बड़ी मजबूती से दबोच लेते हैं।
  • रात में तेज नजर: रात के अंधेरे में देखने की इनकी क्षमता इंसानों से 6 गुना ज्यादा होती है।

व्यवहार और आदतें

  • अकेले रहना पसंद: ये अकेले रहना पसंद करते हैं। ये सिर्फ बच्चे पैदा करने के समय या फिर मां अपने छोटे बच्चों के साथ ही नजर आती है।
  • अपना इलाका तय करना: मेल और फीमेल बाघ अपने रहने की जगह खुद चुनते हैं। वे अपने दुश्मनों को दूर रखने के लिए बड़े इलाकों में अपनी गंध छोड़कर निशान बनाते हैं। भैंस, हिरण, जंगली सूअर और दूसरे बड़े जानवरों को खोजने के लिए कई मील तक घूमते हैं।
  • घात लगाकर शिकार: ये छिपकर शिकार करने में माहिर होते हैं। घनी झाड़ियों या जंगलों में छिपकर शिकार के करीब पहुंचते हैं और अचानक उस पर झपट पड़ते हैं।
  • रहने का ठिकाना: ये ज्यादातर घने जंगलों, मैंग्रोव (जैसे सुंदरबन के दलदली जंगल) और ऐसे जंगलों में रहना पसंद करते हैं, जहां मौसम के हिसाब से पत्ते गिरते हैं।

सवाल-4ः …तो क्या बंगाल में तेजी से आबादी बढ़ा पाएगी बाघिन?

जवाबः बिल्कुल। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट समीर सिन्हा ने बताया, ‘बंगाल और बिहार के बाघों के जेनेटिक्स में बहुत अधिक समानता है। इसलिए बंगाल जाकर बिहार के बाघों को आबादी बढ़ाने में परेशानी नहीं होगी।’

समीर सिन्हा बताते हैं, ‘दूसरी जगह भेजने के लिए युवा बाघों को चुना जाता है, जो नए क्षेत्र के अनुसार खुद को ढाल सके और ज्यादा संतान पैदा कर सकें। बाघिन 3 से 4 साल में मैच्योर हो जाती है। ये करीब 3 महीने में 2 से 6 बच्चों को जन्म देती हैं। बच्चे 18-24 महीने तक मां के साथ रहते हैं। इस दौरान मां उन्हें जंगल में जीना और शिकार करना सिखाती है।’

सिन्हा बताते हैं, ‘बच्चे के जन्म के करीब 2 साल बाद बाघिन अलग होकर अपना खुद का इलाका बनाती है। मेल बच्चा मां से अधिक दूर जाता है। वहीं, फीमेल बच्ची कम दूरी तक जाती है। बच्चों के अलग होने के बाद बाघिन फिर से गर्भवती होने के लिए तैयार हो जाती है। अगर बच्चों की मौत हो जाए तो फीमेल बीच में ही गर्भधारण कर सकती है।’