Aug 30, 2026 02:32 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

RSS chief Mohan Bhagwat in New York: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में चरखी दादरी में हुए हादसे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस घटना के समय सबसे पहले स्वयंसेवक वहां पर पहुंचे थे। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सभी की मदद की और हालात को संभाला था।

संघ प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क में
Mohan Bhagwat in New York: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख इन दिनों अमेरिका में प्रवास कर रहे हैं। न्यूयॉर्क हुए कार्यक्रमों में उनके द्वारा दिए गए कई बयान चर्चा में हैं। ऐसे में 1996 की घटना का उदाहरण देते हुए उन्होंने संघ की सेवा भाव की जो तस्वीर पेश की है। वह वैश्विक स्तर पर संघ को लेकर चली आ रही गलतफहमियों को साफ करती हुई नजर आती है। 13 नंवबर 1996 में हरियाणा के दादरी में हुए प्लेन क्रैश की घटना का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वहां पर मदद के लिए सबसे पहले स्वयं सेवक पहुंचे थे। उन्होंने बिना कोई भेदभाव किए वहां पर हालात नियंत्रित किए थे।
न्यूयॉर्क में 'वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने 30 साल पुरानी उस घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हरियाणा में, दादरी नाम की जगह के ऊपर दो विमान आपस में टकरा गए थे। दोनों विमान अरब देशों के थे। उनमें ज्यादातर यात्री मुसलमान थे। उस टक्कर के बाद, हमारे स्वयंसेवक सबसे पहले वहाँ पहुँचे और सेवा की। घायलों के इलाज में मदद की। शवों को निकाला, रिश्तेदारों के आने पर अंतिम संस्कार का इंतजाम किया और पहचान करने में मदद की। हमने उस समय कभी नहीं सोचा कि वे मुसलमान थे।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक का काम बिना किसी का धर्म देखे, बिना कोई राजनीतिक फायदा देखे केवल सेवा भाव के रूप में सहायता करने का है।
क्या हुआ था चरखी दादरी में? बता दें, चरखी दादरी के आसमान में 12 नवंबर 1996 को सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाकिस्तान एयरलाइंस के दो विमान आसमान में ही टकरा गए थे। इस दुर्घटना से पूरे इलाके में शव ही शव बिखर गए थे। दोनों विमानों में सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी। बकौल भागवत, उस जगह पर सबसे पहले मदद करने के लिए संघ के स्वयं सेवक ही पहुंचे थे।
हम ऐसा कर पाए क्योंकि हम राजनीति में नहीं है- मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि संघ बिना किसी धर्म राजनीति देखकर काम करता है। उन्होंने कहा, "मुख्य रूप से संघ ने ही काम किया। हम ऐसा इसलिए कर पाए क्योंकि हम राजनीति में नहीं हैं और हम इन कामों का प्रचार-प्रसार नहीं करते क्योंकि हमें इससे कुछ नहीं चाहिए। कोई फायदा नहीं चाहिए। संघ में हम सिर्फ देते हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए। इसीलिए प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं।"
मानवता की एकता भारत की पारंपरिक सोच- मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की सोच विविधता में एकता वाली है। उन्होंने कहा कि भारत के डीएनए में ही विविधता में एकता है। भारत की नियति भी यही है कि वह विविधता में एकता के साथ खुद को महसूस करे। इसके साथ ही समय-समय पर वह दुनिया को भी इस बात का अहसास कराए की विविधता के साथ एकता और भी ज्यादा सुंदर लगती है।
भारत में अगर कोई हिंदू सोचता है कि मुसलमान नहीं हो, तो वह हिंदू नहीं- मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने मुसलमानों को लेकर अपनी राय स्पष्ट करते हुए संकेत दिया कि भारत में सभी एक हैं। उन्होंने कहा, "भारत में अगर कोई हिंदू सोचता है कि वहां पर मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते आपको एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। हर इंसान की अपनी एक गरिमा है और उसके साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।"
बता दें, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इस सप्ताह की शुरुआत में न्यूयॉर्क पहुँचे। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उनका यह विदेशी दौरा काफी खास हो जाता है। अमेरिका के बाद वह कनाडा और फिर वहां से यूनाइटेड किंगडम की यात्रा पर जाएंगे।