वह रोज टैक्सी चलाता था। दिन में मर्डर कर रेप करता, शाम को घर लौटता, पत्नी और परिवार के साथ रहता और अगली सुबह फिर काम पर निकल जाता। चंडीगढ़ पुलिस के पास एक के बाद एक 3 रेप-मर्डर की फाइल तैयार हो गई लेकिन कातिल का कोई अता-पता नहीं। फिर 2 कत्लों में एक ज
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जिसके बाद पुलिस आखिरकार उस कातिल तक पहुंच गई, जिसका नाम मोनू है। मगर, वह इतना शातिर निकला कि उसने न मोबाइल रखा और न ही आधार कार्ड बनवाया, बैंक में कोई अकाउंट तक नहीं लेकिन आखिर में वह पकड़ा ही गया।
पुलिस ने पूछा तो बोला- जिस वक्त मैं रेप करूं, कोई शोर करे, ये मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए पहले उनका कत्ल कर देता, फिर लाश से रेप करता। अब उसे तीनों मामलों में उम्रकैद की सजा हो गई।

30 जुलाई, 2010 : कोचिंग के लिए निकली थी छात्रा, झाड़ियों में मिला शव
चंडीगढ़ के सेक्टर 38 की रहने वाली 21 साल की एमबीए स्टूडेंट 30 जुलाई, 2010 की शाम को अपने घर से कोचिंग के लिए निकली थी। आम तौर पर वो रात के 9 बजे तक घर वापस लौट आती थी, लेकिन उस दिन नहीं लौटी और ना ही उसका फोन लग रहा था। इस पर घरवालों ने उसके कोचिंग इंस्टीट्यूट में बात की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
इसके बाद परिवार के लोग सेक्टर 39 के पुलिस स्टेशन में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी। इसके बाद भी परिवार अपने तरीके से नेहा को ढूंढने की कोशिश करता रहा। कुछ ही देर बाद उन्हें सेक्टर 38 के करन टैक्सी स्टैंड के पास उन्हें अपनी बेटी की स्कूटी दिखाई दी। उस पर खून के छींटे लगे थे।
परिवार वालों ने आस-पास के पूरे इलाके में तलाश की तो टैक्सी स्टैंड से थोड़ी दूर झाड़ियों में उसकी लाश खून से लथपथ और बिना कपड़ों के पड़ी हुई थी। घरवाले उसे उसी हालत में उठा कर सीधे पीजीआई लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की जांच में सामने आया था कि छात्रा के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था। गला घोटने के बाद निजी अंगों से ज्यादती और छेड़छाड़ की गई थी।
पुलिस ने जांच शुरू करने के साथ ही छात्रा के शरीर पर मिले कातिल के डीएनए सैंपल कलेक्ट कर लिए। इसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई। दिन, महीने, साल निकलते रहे, लेकिन कातिल का कोई पता नहीं चला। दस सालों के बीच पुलिस ने अदालत में इस केस को लेकर अनट्रेस्ड रिपोर्ट दाखिल कर दी।

30 जुलाई 2010 में छात्रा की स्कूटी टैक्सी स्टैंड के पास खड़ी मिली थी। स्कूटी पर खून के छींटे थे। कातिल ने उसके सिर पर पीछे से पत्थर से वार किया था।
12 जनवरी 2022: सेम पैटर्न पर हुई महिला की हत्या
MBA छात्रा के मर्डर केस को पुलिस बंद कर चुकी थी। मगर, 12 साल बाद यानि 12 जनवरी 2022 में चंडीगढ़ में वैसी ही एक और वारदात हुई। इस बार चंडीगढ़ के ही मलोया के जंगलों में 40 साल की एक महिला की लाश मिली। ये लाश भी बगैर कपड़ों के थी। कातिल ने महिला के निजी अंगों को बुरी तरह से जख्मी कर रखा था।
उसके हाथ-पांव बंधे हुए थे और मुंह में जुराब को ठूंसा हुआ था। लाश को देख कर साफ था कि ये मामला भी MBA छात्रा जैसा ही है। महिला के पति ने एक रोज पहले ही अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी। उसने बताया था कि वह अपनी पत्नी मनदीप के साथ 11 जनवरी की रात 8 बजे पास के बाजार से सामान खरीदने गया था। पत्नी के पास 250 रुपए ही थे। वह पत्नी को बाजार में ही छोड़कर रुपए लेने घर चला गया था।
जब लौटा तो पत्नी वहां नहीं थी। उसकी दिन पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई तो अगले रोज लाश मिल गई। पुलिस ने इस केस की भी पूरी गंभीरता से जांच शुरू की, लेकिन धीरे-धीरे वक्त गुजरता रहा और पुलिस के हाथ खाली ही रहे। हालांकि,पुलिस ने महिला की लाश से कातिल के डीएनए सैंपल कलेक्ट कर लिए थे।
फरवरी 2024: 60 साल की महिला से रेप-मर्डर फरवरी 2024 में 60 साल महिला की भी रेप के बाद हत्या कर दी गई। महिला उत्तर प्रदेश की रहने वाली थीं और घटना से करीब ढाई महीने पहले ही चंडीगढ़ आई थीं। पिछले 10-15 दिनों से उनकी तबीयत भी ठीक नहीं चल रही थी। 27 फरवरी की शाम करीब 6:30 बजे उनके पति काम से घर लौटे तो महिला वहां नहीं थीं। उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला।
अगले दिन मोहाली थाने में उनकी गुमशुदगी की डीडीआर दर्ज कराई गई। इसी बीच 28 फरवरी को सेक्टर-54 में सरकारी स्कूल के पास जंगलनुमा इलाके में एक महिला का शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे पति ने शव की पहचान अपनी पत्नी के रूप में की।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि महिला की हत्या रेप के बाद की गई थी। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर DNA सैंपल भी जांच के लिए भेजा गया। जांच आगे बढ़ी तो इस वारदात की कड़ी ऐसे आरोपी तक पहुंची, जो उस समय एक दूसरे रेप-मर्डर केस में पुलिस की हिरासत में था।

तत्कालीन डीएसपी चरणजीत सिंह, तत्कालीन मलोया थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जसपाल सिंह ने सुलझाया मामला।
अब जानिए कैसे गिरफ्तार हुआ सीरियल किलर…
- दोनों हत्याओं में मिला एक ही कातिल का सुराग: 2010 में हुई MBA छात्रा की हत्या का केस बंद हो चुका था। लेकिन, जनवरी 2022 में मलोया के जंगल क्षेत्र में 40 साल की महिला की रेप के बाद हत्या ने इस पुराने केस की जांच को फिर से जिंदा कर दिया। दोनों मामलों में समानता मिलने पर पुलिस ने MBA छात्रा और 40 साल की महिला से मिले DNA की जांच कराई। वह एक ही व्यक्ति के निकले। यानी 2010 और 2022 में हुई दोनों हत्याओं के पीछे एक ही कातिल था।
- 800 लोगों की प्रोफाइलिंग की: अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था—वह कातिल कौन है?। इसके बाद पुलिस ने दोनों वारदातों के आसपास रहने वाले संदिग्धों की पड़ताल शुरू की। करीब 800 लोगों की प्रोफाइलिंग और पूछताछ की गई। इनमें 2010 के केस से जुड़े करीब 500 और 2022 के केस से जुड़े करीब 300 संदिग्ध शामिल थे।
- DNA सैंपल के लिए पुलिस ने ब्लड डोनेशन कैंप लगाया: पुलिस के आगे चुनौती थी कि इन लोगों के सैंपल कैसे लिए जाएं। पुलिस ने नवंबर-दिसंबर 2023 में पुलिस ने प्रशासन के साथ मिलकर ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किया। इस कैंप के दौरान DNA सैंपल लेने की अनुमति भी ली गई। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने एक-एक सैंपल की जांच शुरू की। पुलिस ने इस प्रक्रिया के तहत 100 से ज्यादा लोगों के DNA सैंपल CFSL भेजे।
- एक व्यक्ति का DNA मैच हो गया: करीब 8 महीने की जांच के बाद एक DNA प्रोफाइल 2022 में मारी गई महिला के शरीर से मिले DNA से मैच हो गई। इसके बाद उसी प्रोफाइल का मिलान 2010 में मारी गई MBA छात्रा से मिले सुरक्षित DNA से कराया गया। यहां भी मैच हो गया। यानी पुलिस के हाथ ऐसा फोरेंसिक सुराग लग चुका था, जो 14 साल के अंतर से हुई दोनों हत्याओं को एक ही व्यक्ति से जोड़ रहा था।
- DNA मैच हुआ, लेकिन आरोपी गायब था: DNA मैच के बाद पुलिस उस व्यक्ति की पहचान तक पहुंची। वह सेक्टर-38 की शाहपुर कॉलोनी में रहने वाला टैक्सी ड्राइवर था। लेकिन जब पुलिस ने उसे तलाशना शुरू किया तो पता चला कि वह चंडीगढ़ छोड़कर जा चुका है। कोई उसका घर UP तो कोई बिहार बता रहा था।
- चंडीगढ़ लौटते ही पुलिस ने पकड़ लिया: पुलिस के आगे मुश्किल यह भी थी कि वह मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं करता था। उसके पास आधार कार्ड नहीं था और बैंक अकाउंट भी नहीं था। यानी पुलिस के पास उसकी लोकेशन ट्रेस करने का कोई डिजिटल रास्ता नहीं था। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने मुखबिर नेटवर्क एक्टिवेट कर दिया। करीब छह महीने बाद जब वह दोबारा चंडीगढ़ लौटा, तो मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
- पूछताछ में पहले मुकरा, DNA के सबूत से टूटा: गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने 30 जुलाई 2010 की उस वारदात के बारे में बताया, जिसे पुलिस 14 साल से सुलझाने की कोशिश कर रही थी। उसने बताया कि 30 जुलाई, 2010 की शाम हल्की बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए छात्रा अपनी स्कूटी को रोककर सड़क किनारे खड़ी हो गई थी। उसने पीछे से आकर उसके सिर में पत्थर से वार किया। इससे उसका मुंह एक्टिवा के शीशे पर लगा। लहूलुहान हालत में ही वह छात्रा को खींचते हुए जंगल में ले गया और दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी।
- हिमाचल में की वारदात को भी कबूला: पूछताछ के दौरान उसने एक और पुरानी वारदात का खुलासा किया। पुलिस के सामने कबूल किया कि 12 सितंबर 2008 को हिमाचल प्रदेश के चंबा में 6 साल की बच्ची के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी थी। बच्ची एक ढाबे में काम करती थी। उसे अकेला पाकर आरोपी ने अपना शिकार बनाया। वारदात के बाद बच्ची की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी गिरफ्तार हुआ और करीब डेढ़ साल तक हिमाचल प्रदेश की जेल में रहा। हालांकि, बाद में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उसे इस केस में बरी कर दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी मोनू को पकड़कर ले जाती पुलिस।
आखिर में जानिए, रेप से पहले हत्या क्यों करता था मोनू पुलिस पूछताछ में मोनू ने बताया था कि रेप के वक्त कोई आवाज करे, यह उसे बर्दाश्त नहीं होता था। इसलिए वह पहले हत्या करता और फिर रेप करता था। उसने यह भी बताया था कि जब वह किसी महिला या लड़की को अकेले देखता था तो खुद को रोक नहीं पाता था। हालांकि उसके साथ ऐसा क्यों होता, उसने पुलिस को इसके बारे में कुछ नहीं बताया।
वह अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखता था और न ही कोई सबूत छोड़ता था। परिवार के साथ सोता था, सुबह टैक्सी लेकर निकल जाता। मोनू वारदात करने के बाद बिना डरे अपने घर लौट आता था। वह शाहपुर कॉलोनी में परिवार के साथ रहता था। उसकी पत्नी भी उसके साथ रहती थी। मोहल्ले और परिवार को उसके अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो किसी को विश्वास नहीं हुआ कि उनकी कॉलोनी में रहने वाला मोनू ऐसा कर सकता है।