मर्चेंट नेवी में था अफसर, फिर नौकरी से निकाला गया... लखनऊ में 3 लोगों की हत्या करने वाला आरोपी ऋषभ शुक्ला कौन?

Published on 26 अक्टू॰ 2026

मर्चेंट नेवी में था अफसर, फिर नौकरी से निकाला गया… लखनऊ में 3 लोगों की हत्या करने वाला आरोपी ऋषभ शुक्ला कौन?

लखनऊ पुलिस ने ट्रिपल मर्डर के आरोपी ऋषभ शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया.

Lucknow Triple Murder: लखनऊ में दिनदहाड़े एक ही परिवार के तीनों लोगों की गोली मारकर हत्या करने वाला आरोपी ऋषभ शुक्ला चर्चा में है. पुलिस के मुताबिक, ऋषभ मर्चेंट नेवी में नेविगेशन अफसर रह चुका है, लेकिन बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. उसकी शादी नहीं हुई थी और वह अपनी मां के निधन के बाद पिता के साथ रहता था. घर में ऋषभ और उसके पिता के अलावा और कौन-कौन था, अभी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. सोमवार सुबह पार्किंग को लेकर हुए विवाद में उसने पड़ोसी शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू तिवारी और बेटे सुयश को गोली मार दी. इस वारदात में तीनों की मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने ऋषभ को पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर लिया.

कौन है आरोपी ऋषभ शुक्ला?

पुलिस के मुताबिक, करीब ऋषभ शुक्ला (30) सआदतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मण टोला में रहता है. वह पहले मर्चेंट नेवी में नेविगेशन अफसर के पद पर काम करता था. हालांकि बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. उसकी शादी नहीं हुई थी और वह अपने पिता के साथ रहता था. उसकी मां का निधन हो चुका है. ऋषभ की पहचान अब उस आरोपी के तौर पर सामने आई है, जिस पर मामूली पार्किंग विवाद के दौरान तीन लोगों की हत्या करने का आरोप है.

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बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरे को लेकर पुराना विवाद

ऋषभ शुक्ला और तिवारी परिवार के बीच विवाद कोई नया नहीं था. पड़ोसियों के मुताबिक, ऋषभ के घर के सामने बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाने को लेकर दोनों परिवारों के बीच पहले से तनातनी चल रही थी. करीब डेढ़ महीने पहले भी विवाद बढ़ने पर मामला सआदतगंज थाने तक पहुंचा था. उस समय पुलिस ने मामले को नगर निगम से जुड़ा बताया था. इसके बाद चबूतरा बनाने का काम रुक गया था. हालांकि दोनों परिवारों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. सोमवार सुबह गाड़ी खड़ी करने की बात को लेकर एक बार फिर कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते खूनी वारदात में बदल गई.

गाड़ी खड़ी करने पर शुरू हुआ झगड़ा

घटना सोमवार सुबह 10:35 बजे की है. तिवारी परिवार के मुताबिक, शंभू तिवारी ने बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे के पास अपनी कार खड़ी कर दी थी. इसी बात पर ऋषभ और शंभू के बीच विवाद शुरू हो गया. पहले ऋषभ ने शंभु को गोली मारी, फिर शोर सुनकर बाहर आए शंभू के बड़े भाई शिवाजी तिवारी को गोली मार दी. खून से लथपथ दोनों जमीन पर पडे़ रहे. शोर-शराबा सुनकर जब शिवाजी तिवारी का बेटे सुयश बाहर आया तो ऋषभ ने उसे घर के पास सीढ़ियों पर गोली मार दी. इस वारदात में शिवाजी तिवारी और उनके बेटे सुयश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शिवेंद्र तिवारी ने ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

शिवाजी तिवारी बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी थे. वह RSS में जिला सर कार्यवाह की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे. उनके भाई शिवेंद्र तिवारी लखनऊ विश्वविद्यालय में काम करते थे. वहीं, सुयश बिजली के सामान का कारोबार करता था. परिवार में उसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं और 5 दिसंबर को उसकी शादी होनी थी, लेकिन उससे पहले ही परिवार में मातम छा गया.

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प्रत्यक्षदर्शी ने बताई गोली चलने की कहानी

नाम ने छापने की शर्त पर एक पड़ोसी ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था. सोमवार सुबह जब विवाद शुरू हुआ तो उन्होंने लोगों से कहा कि सुबह-सुबह झगड़ा क्यों कर रहे हैं. अनूप का दावा है कि इस दौरान ऋषभ ने उनसे पुलिस को फोन करने के लिए कहा. अनूप के मुताबिक, वह अपना फोन लेने घर के अंदर गए. इसी बीच 8 से 10 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी. जब वह बाहर लौटे तो वहां तीनों के शव पड़े थे. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी विवाद हुआ था और उस समय पुलिस से शिकायत की गई थी.

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. पुलिस ने आरोपी ऋषभ शुक्ला को पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में पार्किंग विवाद को वारदात की वजह माना जा रहा है. तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस परिवार के आरोपों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और घटनाक्रम की जांच कर रही है.

सफी अहमद

सफी अहमद

सफी अहमद, राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है. इसी जुनून को जमीन पर उतारते हुए उन्होंने लखनऊ की जमीनी हकीकत से लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक की खबरों को करीब से कवर किया है. सफी अहमद की खास पकड़ क्राइम रिपोर्टिंग पर रही है. अपराध की खबरों की तह तक जाना, घटनाओं के पीछे की कहानी सामने लाना और सबसे पहले सटीक जानकारी पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख पहचान रही है. कई बड़ी और चर्चित घटनाओं की कवरेज में सफी अहमद की सक्रिय भूमिका रही है. 2020 के कानपुर बिकरू कांड, 2022 के अलाया होटल अग्निकांड और 2026 के अलीगंज अग्निकांड जैसी घटनाओं पर उन्होंने लगातार नजर बनाए रखी और घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सबसे पहले साझा करने का प्रयास किया. ऐसी घटनाओं में 24 घंटे लगातार अपडेट रहने और खबर की तह तक पहुंचने का उनका अनुभव उनकी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण ताकत है. सफी अहमद ने पत्रकारिता की शुरुआत एक साप्ताहिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के साथ की. इसके बाद उन्हें PPN न्यूज़, APN न्यूज़ और K न्यूज़ जैसे संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. विभिन्न संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने रिपोर्टिंग के अलग-अलग आयामों को करीब से समझा और अपनी पत्रकारिता को लगातार मजबूत किया. करीब चार वर्षों के अनुभव के बाद उन्हें TV9 भारतवर्ष के साथ काम करने का अवसर मिला. पिछले 6 वर्षों से TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़े हुए सफी अहमद लखनऊ से लगातार पत्रकारिता कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और निष्ठा के साथ खबरों को जमीन से उठाकर दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है.

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