सिरसा जिले में रानियां क्षेत्र की अनाज मंडियों में धान की आवक 3.25 लाख क्विंटल पार कर गई है। रानियां, बणी और जीवन नगर मंडियों में अब तक इतनी आवक हुई है। रानियां मंडी परिसर धान से भर गया है।
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रानियां और बणी मंडियों में परमल धान की सरकारी खरीद हो रही है, पर उठान धीमा है। इससे आढ़ती परेशान हैं और किसानों का भुगतान अटका है। हैफेड न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद कर रहा है।
रानियां मंडी में 11,726 क्विंटल और बणी में 5,829 क्विंटल धान उठान का इंतजार कर रहा है। बासमती की 1509, 1692 और 1847 किस्मों की आवक भी जारी है। इसके भाव में रोज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

रानियां अनाज मंडी में लगी धान की ढेरियां।
धान के भाव में रोजाना हो रहे उतार-चढ़ाव
सीजन की शुरुआत में बासमती धान के भाव करीब 3,800 रुपए प्रति क्विंटल थे, जो बढ़कर 4,500 रुपए तक पहुंच गए। इसके बाद भाव फिर करीब 4,200 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गए। रोजाना भाव में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण किसान असमंजस में हैं कि फसल तुरंत बेच दें या बेहतर भाव मिलने की उम्मीद में इंतजार करें। धान में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण लंबे समय तक भंडारण करना भी आसान नहीं है।

रानियां अनाज मंडी की दृश्य।
पिछले साल के मुकाबले कम रही आवक
इस सीजन में अब तक परमल धान की आवक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 25 अक्टूबर तक 1,15,912 क्विंटल परमल धान मंडियों में पहुंचा था, जबकि इस बार आवक 94,122 क्विंटल रही है। इस प्रकार पिछले वर्ष के मुकाबले 21,790 क्विंटल कम परमल धान मंडियों में पहुंचा है।
सीजन की शुरुआत में उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन फसल की कटाई शुरू होने के बाद उत्पादन अच्छा होने के संकेत मिले। जानकारों का मानना है कि इस बार परमल की आवक कम रहने के पीछे दूसरे राज्यों से आने वाली फसल पर सख्ती भी एक कारण हो सकती है।
पहले पंजाब और राजस्थान के क्षेत्रों के किसानों की फसल भी रानियां मंडी में पहुंचती रही है, लेकिन इस बार अन्य प्रदेशों से परमल धान की आवक पर रोक के चलते इसमें कमी मानी जा रही है।

मार्केट कमेटी के सचिव सुरेंद्र सैन।
मौसम अलर्ट से धान को बारिश से बचाने में मिली मदद
मार्केट कमेटी के सचिव एवं कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र सैन ने बताया कि मौसम विभाग की भविष्यवाणियों और अलर्ट से धान को बारिश से बचाने में काफी मदद मिली है। बारिश की संभावना का अलर्ट मिलते ही मंडियों में काम करने वाले आढ़तियों और मजदूरों को सूचित कर दिया जाता है।
इसके बाद आढ़ती तिरपाल और पॉलिथीन की व्यवस्था कर धान की ढेरियों तथा बोरियों में भरे धान को समय रहते ढक देते हैं। उन्होंने बताया कि समय पर किए गए इन प्रबंधों से इस सीजन में बारिश के कारण धान को खराब होने से बचाने में मदद मिली है।